कर्नाटक में रमज़ान के दौरान उर्दू स्कूलों के समय में बदलाव, राजनीति भी गर्माई

कर्नाटक सरकार ने रमज़ान महीने को ध्यान में रखते हुए राज्य के उर्दू माध्यम के स्कूलों का समय बदल दिया है। इस फैसले को लेकर राजनीतिक बहस भी तेज हो गई है। भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार वोट बैंक की राजनीति को प्राथमिकता देती है और समानता के सिद्धांत को नजरअंदाज करती है।
नए समय की व्यवस्था एक महीने तक लागू
राज्य के उर्दू एवं अन्य अल्पसंख्यक भाषा स्कूल निदेशालय के अनुसार, रमजान के दौरान जूनियर प्राइमरी और सेकेंडरी प्राइमरी के स्कूल सुबह 8 बजे से दोपहर 12:45 बजे तक खुलेंगे। यह व्यवस्था रमजान की शुरुआत से एक महीने तक लागू रहेगी। निदेशालय ने स्पष्ट किया कि यह निर्णय 31 अक्टूबर 2002 के स्थायी आदेश के विस्तार के तहत लिया गया है।
शैक्षणिक कैलेंडर में भी बदलाव
इसके अलावा शिक्षा विभाग ने शैक्षणिक वर्ष 2025-26 के लिए सभी सरकारी, सहायता प्राप्त और गैर-सहायता प्राप्त उर्दू माध्यम के स्कूलों के शैक्षणिक कैलेंडर में भी संशोधन किया है। नई समय-सारिणी रमजान की शुरुआत से लेकर 20 मार्च 2026 तक लागू रहेगी।
राजनीतिक विवाद और सवाल
भाजपा के शहजाद पूनावाला ने कहा कि रमजान के दौरान यह रियायत दी जा रही है, लेकिन क्या सरकार ने कभी हिंदू त्योहारों के दौरान भी ऐसा कदम उठाया है? उन्होंने सवाल उठाया कि अगर रमजान में शिक्षकों और कर्मचारियों को जल्दी जाने की अनुमति दी जा रही है, तो नवरात्रि जैसे पर्वों में क्या ऐसी सुविधा होगी। पूनावाला ने कांग्रेस पर वोट बैंक की राजनीति करने और संविधान में समानता के सिद्धांत का पालन न करने का आरोप लगाया।
सरकार का रुख
कर्नाटक के गृह मंत्री जी. परमेश्वर ने कहा कि समाज के कुछ वर्गों को लंबे समय तक नजरअंदाज किया गया था और अब उन्हें बराबरी का दर्जा देना जरूरी है। उन्होंने कहा, "क्या आप नहीं चाहते कि ये लोग भी समान हों? अगर इस तरह के कदमों को स्वीकार नहीं किया जाता, तो इसका मतलब है कि कुछ लोग समानता के खिलाफ हैं।"
राज्य सरकार का कहना है कि यह बदलाव समावेशी शिक्षा को मजबूत करने और अल्पसंख्यक समुदाय के छात्रों को सुविधा देने के उद्देश्य से किया गया है।
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