केरल में भारी बारिश से तबाही, भूस्खलन में 6 की मौत; कई जिलों में रेड अलर्ट

HIGHLIGHTS
- इडुक्की, कोट्टायम और पथानमथिट्टा में भूस्खलन की घटनाओं से जनजीवन प्रभावित हुआ।
- पम्पा नदी का जलस्तर बढ़ने से कई इलाकों में पानी भर गया और संपर्क मार्ग बाधित हुए।
- राज्य में 65 राहत शिविरों में 1,465 लोगों को सुरक्षित आश्रय दिया गया है।
केरल के कई हिस्सों में शनिवार को हुई भारी बारिश के कारण भूस्खलन, जलभराव और नदियों व बांधों के जलस्तर में बढ़ोतरी से हालात गंभीर हो गए। प्रभावित क्षेत्रों में प्रशासन ने बड़े स्तर पर बचाव अभियान शुरू कर दिया है और लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने का काम जारी है। इडुक्की, कोट्टायम और पथानमथिट्टा जिलों में अलग-अलग भूस्खलन की घटनाओं में छह लोगों की मौत हो गई, जबकि कई अन्य लोगों को सुरक्षित बचाया गया।
पहाड़ी और मध्य जिलों में सबसे ज्यादा असर
राज्य के मध्य और पहाड़ी इलाकों में बारिश का सबसे ज्यादा प्रभाव देखने को मिला है। इडुक्की, कोट्टायम, पथानमथिट्टा और कोझिकोड जिलों में स्थिति अधिक गंभीर बनी हुई है।
इडुक्की जिले के कुदायथूर के पास अडूरमाला में हुए भूस्खलन में सुमति (65) नामक महिला की मौत हो गई, जबकि उनके पति और बेटा घायल हो गए। वहीं, कोट्टायम जिले के पूंजर और वागामोन इलाकों में भी भूस्खलन के कारण नुकसान की खबर सामने आई है।
पम्पा नदी का जलस्तर बढ़ा, कई इलाके जलमग्न
पथानमथिट्टा जिले में पम्पा नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ने के कारण रन्नी, कोझेनचेरी और अरणमुला के कई इलाके पानी में डूब गए हैं। कई स्थानों का मुख्य मार्गों से संपर्क टूट गया है। फंसे हुए लोगों को बाहर निकालने के लिए प्रशासन ने विशेष नौकाओं की व्यवस्था की है।
कोझिकोड के अनाक्कमपॉयल क्षेत्र में पिछले 35 घंटों के दौरान 340 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई, जबकि वायनाड के मेप्पाडी में 177 मिलीमीटर बारिश रिकॉर्ड हुई है।
65 राहत शिविरों में 1,465 लोगों को शरण
मुख्यमंत्री वीडी सतीशन ने स्थिति की समीक्षा कर प्रभावित जिलों के अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए हैं। राज्यभर में 65 राहत शिविर शुरू किए गए हैं, जहां फिलहाल 1,465 लोगों को सुरक्षित पहुंचाया गया है। प्रशासन ने जरूरत पड़ने पर और लोगों को स्थानांतरित करने की तैयारी की है।
प्रारंभिक रिपोर्ट के अनुसार, राज्य में 17 मकान पूरी तरह क्षतिग्रस्त हुए हैं, जबकि 127 घरों को आंशिक नुकसान पहुंचा है। कोट्टायम के पाला में एक पोल्ट्री फार्म में पानी भरने से करीब 2,500 मुर्गियों की मौत हो गई।
सरकार ने आपदा में जान गंवाने वाले लोगों के परिवारों, घर गंवाने वाले परिवारों और प्रभावित किसानों व व्यापारियों को आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है। घायलों के इलाज के लिए भी मुफ्त और बेहतर चिकित्सा व्यवस्था सुनिश्चित की गई है।
मंत्रियों को जिलों में कैंप करने के निर्देश
मुख्यमंत्री ने आपदा की स्थिति से निपटने के लिए मंत्रियों को सीधे मैदान में उतरने के निर्देश दिए हैं। उन्हें अपने-अपने प्रभार वाले जिलों में रहकर राहत कार्यों की निगरानी करने को कहा गया है।
- सीपी जॉन- तिरुवनंतपुरम
- पीसी विष्णुनाथ- पथानमथिट्टा
- मॉन्स जोसेफ- कोट्टायम
- अनूप जैकब- इडुक्की
इसके अलावा राजस्व मंत्री राज्य स्तर पर राहत और आपदा प्रबंधन कार्यों की निगरानी कर रहे हैं। तिरुवनंतपुरम के मुथलापोषी में दो लोगों के लापता होने के बाद भारतीय तटरक्षक बल और मरीन एन्फोर्समेंट टीम समुद्र में तलाश अभियान चला रही है।
कई बांधों के गेट खोले गए, मौसम विभाग ने जारी किया रेड अलर्ट
बढ़ते जलस्तर को देखते हुए तिरुवनंतपुरम, पथानमथिट्टा, इडुक्की, एर्नाकुलम, त्रिशूर और कन्नूर जिलों के कई बांधों के गेट एहतियात के तौर पर खोल दिए गए हैं। अलप्पुझा में थोट्टापल्ली स्पिलवे के गेट भी खोले गए हैं।
एर्नाकुलम, अलप्पुझा, कोझिकोड, कन्नूर और कासरगोड के तटीय इलाकों में समुद्र की लहरों के तटों की ओर बढ़ने की सूचना मिली है।
भारत मौसम विज्ञान विभाग ने पथानमथिट्टा, कोट्टायम, इडुक्की, मलप्पुरम, कोझिकोड, वायनाड, कन्नूर और कासरगोड जिलों के लिए रेड अलर्ट जारी किया है। रेड अलर्ट का मतलब है कि 24 घंटों में 204 मिलीमीटर से अधिक अत्यधिक भारी बारिश हो सकती है।
वहीं, एर्नाकुलम, त्रिशूर और पलक्कड़ जिलों के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। एहतियात के तौर पर कई जिलों में शिक्षण संस्थानों में अवकाश घोषित किया गया है।
राज्य सरकार ने लोगों से सतर्क रहने और प्रशासन व आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के निर्देशों का पालन करने की अपील की है।
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