सरकारी काम में बाधा डालने के मामले में सांसद उमेश पटेल को दो साल की सजा

HIGHLIGHTS
- 2011 के सरकारी काम में बाधा डालने के मामले में अदालत ने सांसद उमेश पटेल और सुरेश पटेल को दोषी ठहराया।
- दोनों आरोपियों को दो-दो साल की साधारण जेल और 5-5 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई गई।
- अदालत ने अपील का मौका देते हुए सजा पर एक महीने के लिए रोक लगा दी है।
दमन और दीव से निर्दलीय लोकसभा सांसद उमेश पटेल और उनके सह-आरोपी, पूर्व जिला पंचायत सदस्य सुरेश पटेल को वर्ष 2011 के एक मामले में अदालत ने दोषी ठहराते हुए दो-दो साल के साधारण कारावास की सजा सुनाई है। दोनों पर सरकारी अधिकारियों के कामकाज में बाधा डालने का आरोप था।
अदालत ने क्या फैसला सुनाया?
केंद्र शासित प्रदेश दमन, दीव और दादरा एवं नगर हवेली के दमन स्थित मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रणिता भारसकड़े-वाघ की अदालत ने शनिवार को उमेश पटेल और सुरेश पटेल को दोषी करार दिया। अदालत ने दोनों को दो-दो साल के साधारण कारावास की सजा सुनाई। इसके अलावा दोनों पर 5-5 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया।
हालांकि, अदालत ने दोनों को ऊपरी अदालत में अपील दाखिल करने का मौका देने के लिए सजा पर एक महीने तक रोक लगा दी है।
किन धाराओं के तहत ठहराया गया दोषी?
अदालत ने दोनों आरोपियों को भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 186 के तहत दोषी माना, जो लोक सेवक को उसके कर्तव्य के निर्वहन से रोकने से जुड़ी है। इसके अलावा उन्हें आईपीसी की धारा 353 के तहत भी दोषी ठहराया गया, जो लोक सेवक के खिलाफ आपराधिक बल के इस्तेमाल से संबंधित है।
वहीं, अदालत ने दोनों को आईपीसी की धारा 332 (लोक सेवक को चोट पहुंचाना), धारा 452 (अनधिकृत प्रवेश) और धारा 504 (जानबूझकर अपमान करना) के आरोपों से बरी कर दिया।
क्या था पूरा मामला?
अभियोजन पक्ष के अनुसार, मामला 12 मार्च 2011 का है। उस समय मोती दमन स्थित फुटबॉल मैदान में आबकारी उपनिरीक्षक (एक्साइज सब-इंस्पेक्टर) पद के लिए भर्ती प्रक्रिया चल रही थी।
आरोप है कि उमेश पटेल और सुरेश पटेल भर्ती स्थल में जबरन दाखिल हो गए थे और वहां ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों को धक्का दिया था। इसके बाद दोनों उस जगह तक पहुंच गए, जहां उपनिरीक्षकों के साक्षात्कार चल रहे थे। आरोप के मुताबिक, वहां मौजूद अधिकारियों के साथ अभद्र व्यवहार किया गया, जिससे सरकारी कार्य में बाधा पहुंची।
किसने दर्ज कराई थी शिकायत?
इस मामले में तत्कालीन अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक जगमोहेन्द्र सिंह ने शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि भर्ती प्रक्रिया के दौरान दोनों आरोपियों ने पुलिसकर्मियों और अधिकारियों के साथ धक्का-मुक्की और अभद्र व्यवहार किया, जिससे लोक सेवकों के आधिकारिक कार्य में व्यवधान पैदा हुआ।
सुनवाई के बाद अदालत ने क्या कहा?
मामले की सुनवाई पूरी होने के बाद अदालत ने शनिवार को दोनों आरोपियों को दोषी करार देते हुए दो-दो साल के साधारण कारावास की सजा सुनाई। इसके साथ ही दोनों पर 5-5 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया।
क्या जा सकती है उमेश पटेल की सांसदी?
उमेश पटेल ने 2024 के लोकसभा चुनाव में दमन और दीव सीट से निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर जीत हासिल की थी। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के तीन बार के सांसद रहे लालू पटेल को हराकर यह सीट जीती थी।
भारतीय कानून के अनुसार, अगर किसी सांसद या विधायक को दो साल या उससे अधिक की सजा होती है तो उसकी सदस्यता रद्द हो सकती है। ऐसे में उमेश पटेल की लोकसभा सदस्यता पर भी खतरा मंडरा सकता है।
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