बीमारी के इलाज से लेकर शादी तक का लालच देने का आरोप, लखनऊ धर्मांतरण केस में 7 पर चार्जशीट

HIGHLIGHTS
- मोहनलालगंज धर्मांतरण मामले में पुलिस ने सात आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की।
- जांच में बीमारी के इलाज, आर्थिक मदद और अन्य लाभों का लालच देने के आरोप सामने आए।
- 23 जुलाई को भरसवां गांव में हंगामे के बाद पुलिस ने सात लोगों को गिरफ्तार किया था।
राजधानी लखनऊ के मोहनलालगंज में हिंदुओं का धर्मांतरण कर उन्हें ईसाई बनाने के आरोपों से जुड़े मामले में पुलिस ने सात लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर दी है। पुलिस की विवेचना में सामने आया कि गिरोह पर बीमारी का इलाज कराने, संतान सुख, आर्थिक मदद, प्रॉपर्टी, बच्चों की शिक्षा और विवाह का लालच देकर धर्म परिवर्तन कराने का आरोप है। हालांकि, पुलिस ने सात आरोपियों के अलावा किसी अन्य व्यक्ति को विवेचना में शामिल नहीं किया है।
गिरोह के पकड़े जाने के बाद पुलिस ने मोहनलालगंज के गौरा, ज्योतिनगर, भदेसुवा, फुलवरिया और भरसवां समेत आसपास के कई इलाकों में लोगों से संपर्क किया और उनके बयान दर्ज किए। पड़ताल में सामने आया कि गिरोह के लोग कथित तौर पर रुपये देने का लालच देते थे। इसके बाद रात में बैठकें आयोजित की जाती थीं और लोगों को बरगलाकर क्रिप्टो क्रिश्चियन यानी गुप्त ईसाई बनाया जाता था।
जांच में यह बात भी सामने आई कि गिरोह के लोग लोगों से तत्काल नाम बदलने के लिए नहीं कहते थे। एक पीढ़ी के बाद दूसरी या तीसरी पीढ़ी तक पहुंचने पर लोग पूरी तरह ईसाई हो जाते थे और इसके बाद उनके नाम बदल दिए जाते थे।
23 जुलाई को पकड़ा गया था गिरोह
भरसवां गांव में 23 जुलाई की रात गिरोह के सदस्य चार पहिया वाहन से पहुंचे थे। आरोप है कि वे ग्रामीणों पर ईसाई धर्म अपनाने का दबाव बना रहे थे। इस पर गांव के अमित कुमार ने पुलिस से शिकायत की थी। इस दौरान मौके पर जमकर हंगामा भी हुआ था।
अमित कुमार की तहरीर पर मोहनलालगंज थाने में उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम और बीएनएस की अन्य धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई थी। इसके बाद पुलिस ने सात लोगों को गिरफ्तार किया था, जिनमें चार महिलाएं भी शामिल थीं।
पुलिस ने चंद्रभान, उसकी पत्नी आरती, सीमा, गिरोह के सरगना डेनियल, उसकी पत्नी सुबला, शीला और अजय रावत के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है।
बाला सुब्रह्मण्यम से ऐसे बना डेनियल
पुलिस की छानबीन में सामने आया कि गिरोह का संचालन डेनियल करता था। उसका बचपन का नाम बाला सुब्रह्मण्यम था। बताया गया कि 16 वर्ष की उम्र में उसकी मुलाकात कन्याकुमारी की रहने वाली ईसाई लड़की सुबला से हुई थी।
बाला को सुबला से प्रेम हो गया और उसने उसके सामने शादी का प्रस्ताव रखा। सुबला ने शर्त रखी कि यदि बाला सुब्रह्मण्यम अपना धर्म बदल लेगा, तो वह उससे शादी कर लेगी। इसके बाद बाला सुब्रह्मण्यम ने ईसाई धर्म अपना लिया और अपना नाम डेनियल रख लिया।
आरोप है कि वर्ष 1998 में डेनियल, सुबला के साथ लखनऊ आया और ईसाई धर्म के प्रसार के साथ धर्मांतरण कराने वाला गिरोह चलाने लगा।
एफजीपीसी चर्च को बताया गया धर्मांतरण का केंद्र
पुलिस की जांच में सामने आया कि धर्मांतरण गिरोह का केंद्र कन्याकुमारी स्थित एफजीपीसी चर्च था। जांच के अनुसार, डेनियल को भी वहीं से निर्देश देकर भेजा गया था।
तमिलनाडु से लखनऊ आने के बाद डेनियल ने चर्च के फंड से मोहनलालगंज के रामादाई खेड़ा में जमीन खरीदी और वहां रहने लगा। सबसे पहले उसने गांव में कलीशा बनवाया और इसके बाद प्रार्थना सभा शुरू की। वर्तमान में बड़ी संख्या में हिंदुओं के ईसाई धर्म अपनाने की बात सामने आई है।
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