लखनऊ: विवादित ढांचे पर धार्मिक गतिविधियों पर रोक, भारी पुलिस बल तैनाती

HIGHLIGHTS
- लखनऊ के मलिहाबाद क्षेत्र के कसमंडी गांव में स्थित एक विवादित ढांचे को लेकर तनावपूर्ण स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने फिलहाल सभी प्रकार की धार्मिक गतिविधियों पर रोक लगा दी है।
- प्रशासन ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए स्थल के आसपास भारी पुलिस बल और पीएसी तैनात कर दी है।
- जानकारी के अनुसार, शुक्रवार को एक पक्ष ने इस ढांचे को मकबरा बताते हुए वहां नमाज अदा की थी, जिसके बाद दूसरे पक्ष ने भी वहां हनुमान चालीसा पाठ करने की अनुमति की मांग शुरू कर दी।
- इससे इलाके में तनाव की स्थिति बन गई।
- स्थिति को गंभीर…
लखनऊ के मलिहाबाद क्षेत्र के कसमंडी गांव में स्थित एक विवादित ढांचे को लेकर तनावपूर्ण स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने फिलहाल सभी प्रकार की धार्मिक गतिविधियों पर रोक लगा दी है। प्रशासन ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए स्थल के आसपास भारी पुलिस बल और पीएसी तैनात कर दी है।
जानकारी के अनुसार, शुक्रवार को एक पक्ष ने इस ढांचे को मकबरा बताते हुए वहां नमाज अदा की थी, जिसके बाद दूसरे पक्ष ने भी वहां हनुमान चालीसा पाठ करने की अनुमति की मांग शुरू कर दी। इससे इलाके में तनाव की स्थिति बन गई।
स्थिति को गंभीर देखते हुए जिला प्रशासन और पुलिस अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर हालात की समीक्षा की। डीएम विशाख जी और संयुक्त पुलिस आयुक्त (कानून-व्यवस्था) बबलू कुमार ने स्थानीय प्रशासन को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि किसी भी स्थिति में शांति व्यवस्था प्रभावित नहीं होनी चाहिए।
संयुक्त पुलिस आयुक्त ने कहा कि फिलहाल स्थल पर यथास्थिति बनाए रखने के आदेश दिए गए हैं और किसी भी पक्ष को वहां धार्मिक गतिविधि की अनुमति नहीं दी जाएगी। मलिहाबाद पुलिस ने भी मौके पर सुरक्षा बढ़ा दी है और लगातार निगरानी रखी जा रही है।
विवादित स्थल को लेकर दोनों पक्ष अलग-अलग दावे कर रहे हैं। एक पक्ष का कहना है कि यह प्राचीन शिव मंदिर और राजा कंस से जुड़ा ऐतिहासिक स्थल है, जिसे बाद में बदल दिया गया, जबकि दूसरा पक्ष इसे मकबरा और मस्जिद बताते हुए वर्षों से वहां नमाज अदा करने का दावा कर रहा है।
स्थानीय लोगों की राय भी विभाजित नजर आ रही है। कुछ ग्रामीणों का कहना है कि पहले यह क्षेत्र घने जंगलों से घिरा हुआ था और बाद में धीरे-धीरे लोगों का आना-जाना बढ़ा। वहीं कुछ लोगों के अनुसार यहां ऐतिहासिक धार्मिक संरचना मौजूद थी।
पुरातत्व विभाग ने स्पष्ट किया है कि यह स्थल अभी तक संरक्षित स्मारक घोषित नहीं किया गया है और इस संबंध में उन्हें कोई आधिकारिक पत्राचार प्राप्त नहीं हुआ है। विभाग ने कहा है कि यदि प्रशासन की ओर से अनुरोध मिलता है तो स्थल का सर्वे और जांच की जाएगी।
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