मद्रास हाई कोर्ट ने कहा: क्रिप्टोकरेंसी भारतीय कानून के तहत संपत्ति मानी जाएगी

नई दिल्ली। मद्रास हाई कोर्ट ने शनिवार को स्पष्ट किया कि क्रिप्टोकरेंसी को भारतीय कानून के तहत प्रॉपर्टी माना जा सकता है, जिसका मालिकाना हक रखा जा सकता है और जिसे ट्रस्ट में रखा जा सकता है। यह निर्णय रुतिकुमारी बनाम जनमाई लैब्स प्राइवेट लिमिटेड मामले में सुनाया गया।
जस्टिस आनंद वेंकटेश ने कहा कि भले ही क्रिप्टोकरेंसी एक अमूर्त (intangible) वस्तु है और कानूनी मुद्रा (legal tender) नहीं है, फिर भी इसमें संपत्ति की आवश्यक विशेषताएं मौजूद हैं।
मामला क्या था
इस फैसला का आधार एक निवेशक द्वारा दायर याचिका है, जिसके WazirX प्लेटफॉर्म पर रखे XRP होल्डिंग्स को 2024 में हुए साइबर हमले के बाद फ्रीज कर दिया गया था।
याचिकाकर्ता ने जनवरी 2024 में जानमाई लैब्स द्वारा संचालित WazirX एक्सचेंज पर ₹1,98,516 निवेश कर 3,532.30 XRP खरीदे थे। उसे एक पोर्टफोलियो अकाउंट दिया गया था, जो उसके मोबाइल नंबर और ईमेल से रजिस्टर्ड था।
क्रिप्टोकरेंसी अब टैक्सेबल एसेट
कोर्ट ने कहा कि भारतीय कानून के अनुसार क्रिप्टोकरेंसी को एक वर्चुअल डिजिटल एसेट माना जाएगा, और इसे केवल स्पेक्यूलेटिव निवेश नहीं माना जाएगा। निवेशक द्वारा की गई राशि क्रिप्टोकरेंसी में बदल जाती है, जिसे स्टोर, ट्रेड और बेचा जा सकता है।
यह इनकम टैक्स एक्ट, 1961 के सेक्शन 2(47A) के तहत आता है।
इस निर्णय से निवेशकों को लाभ हो सकता है, क्योंकि इससे क्रिप्टोकरेंसी में भरोसा बढ़ेगा।
साइबर हमला कब हुआ
18 जुलाई 2024 को WazirX ने घोषणा की थी कि उसके कोल्ड वॉलेट पर साइबर हमला हुआ, जिससे एथेरियम और एथेरियम-बेस्ड टोकन (ERC-20) का नुकसान हुआ। एक्सचेंज ने लगभग 2020 करोड़ रुपये का नुकसान बताया और सभी यूजर अकाउंट्स फ्रीज कर दिए, जिससे याचिकाकर्ता अपने XRP होल्डिंग्स तक नहीं पहुंच सकी।
याचिका और विरोध
याचिकाकर्ता ने कहा कि उसकी संपत्ति चोरी हुए एथेरियम टोकन से अलग थी और WazirX ने इसे कस्टोडियन के रूप में ट्रस्ट में रखा था। उसने पोर्टफोलियो को दोबारा वितरित या री-एलोकेट करने के लिए आर्बिट्रेशन एंड कॉन्सिलिएशन एक्ट, 1996 की धारा 9 के तहत रोक लगाने की मांग की।
इसके खिलाफ जानमाई लैब्स और उसके डायरेक्टर्स ने दलील दी कि एक्सचेंज की सिंगापुर स्थित पेरेंट कंपनी जेट्टाई प्राइवेट लिमिटेड ने साइबर हमले के बाद रीस्ट्रक्चरिंग की प्रक्रिया शुरू की थी और सिंगापुर हाई कोर्ट के अनुमोदन से सभी यूजर्स को नुकसान प्रो-राटा बेसिस पर बांटना होगा।
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