महंत नरेंद्र गिरि मौत मामला: सुप्रीम कोर्ट ने आरोपी को दी जमानत

दिल्ली। अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के पूर्व अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि की मौत से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम फैसला सुनाया है। शीर्ष अदालत ने मामले के आरोपी आद्या प्रसाद तिवारी को जमानत देने का आदेश दिया है। जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान कोर्ट ने माना कि मुकदमे की सुनवाई में अभी काफी समय लग सकता है, ऐसे में आरोपी को लंबे समय तक हिरासत में रखना आवश्यक नहीं है।
महंत नरेंद्र गिरि 20 सितंबर 2021 को प्रयागराज स्थित बाघंबरी मठ में फंदे से लटके पाए गए थे। इस घटना ने पूरे साधु समाज को झकझोर कर रख दिया था। मामले की जांच सीबीआई को सौंपी गई थी। एजेंसी ने नवंबर 2021 में दाखिल चार्जशीट में दावा किया था कि महंत नरेंद्र गिरि अपने पूर्व शिष्य आनंद गिरि, मठ के पुजारी आद्या प्रसाद तिवारी और उनके पुत्र संदीप तिवारी के कारण मानसिक दबाव में थे। जांच एजेंसी के अनुसार, बदनामी और सामाजिक अपमान के डर से उन्होंने आत्महत्या की।
सोमवार को न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति सतीश चंद्र शर्मा की पीठ ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के 14 अक्टूबर 2025 के उस आदेश को पलट दिया, जिसमें आद्या प्रसाद तिवारी को जमानत देने से इनकार किया गया था। सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि फिलहाल ट्रायल के जल्द पूरा होने की संभावना नहीं है और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर अपीलकर्ता को मुख्य आरोपी नहीं माना जा सकता। ऐसे में उसे आगे हिरासत में रखने की आवश्यकता नहीं है।
कोर्ट ने यह भी उल्लेख किया कि आद्या प्रसाद तिवारी 22 सितंबर 2021 से न्यायिक हिरासत में हैं। प्रारंभ में उनके खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने का मामला दर्ज किया गया था, लेकिन बाद में चार्जशीट में हत्या और आपराधिक साजिश की धाराएं भी जोड़ी गईं।
सुप्रीम कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट को यह अधिकार दिया है कि यदि जमानत की किसी भी शर्त का उल्लंघन होता है, तो जमानत रद्द की जा सकती है। इस मामले में आनंद गिरि, आद्या प्रसाद तिवारी और संदीप तिवारी के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने और आपराधिक साजिश के आरोप लगाए गए हैं।
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