जम्मू-कश्मीर की सियासत में बड़ा उलटफेर, आगा रुहुल्ला मेहदी का इस्तीफा मंजूर

HIGHLIGHTS
- आगा सैयद रुहुल्ला मेहदी का लोकसभा से इस्तीफा स्वीकार कर लिया गया है।
- लोकसभा अध्यक्ष ने 3 नवंबर 2026 से उनका त्यागपत्र मंजूर किया।
- लोकसभा सचिवालय ने इस संबंध में अधिसूचना जारी की है।
श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर की राजनीति में इन दिनों हलचल तेज है। सांसद आगा सैयद रुहुल्ला मेहदी ने नेशनल कॉन्फ्रेंस (नेका) से इस्तीफा देने के बाद लोकसभा की सदस्यता भी छोड़ दी थी। अब लोकसभा अध्यक्ष ने उनका त्यागपत्र 3 नवंबर 2026 से स्वीकार कर लिया है। इस संबंध में लोकसभा सचिवालय ने अधिसूचना जारी कर दी है। उनके इस्तीफे के बाद लोकसभा की यह सीट रिक्त हो गई है।
उमर अब्दुल्ला की कार्यशैली पर उठाए थे सवाल
नेशनल कॉन्फ्रेंस छोड़ने के दौरान रुहुल्ला ने मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला पर तीखा हमला बोला था। उन्होंने कहा था कि जिस पद पर उमर अब्दुल्ला बैठे हैं, वह उनके साथ-साथ आम लोगों के लिए भी परेशानी का कारण बन गया है।
उन्होंने तल्ख अंदाज में कहा था कि उमर को अपनी टोपी और सम्मान दूसरों के कदमों में रखने की जरूरत नहीं थी। रुहुल्ला ने यह भी कहा था कि वह खुदा से दुआ करते हैं कि उन्हें कभी सत्ता के लिए इतनी मजबूरी का सामना न करना पड़े कि अपनी टोपी तक उतारनी पड़े। उन्होंने चुनौती देते हुए कहा था कि अगर किसी को असली सम्मान और स्वाभिमान देखना है तो वह बडगाम आकर देख सकता है।
फारूक अब्दुल्ला पर भी साधा था निशाना
रुहुल्ला मेहदी ने मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला को 'ना-अहल' यानी अक्षम बताते हुए नेशनल कॉन्फ्रेंस के प्रमुख डॉ. फारूक अब्दुल्ला पर भी निशाना साधा था।
उन्होंने कहा था कि डॉ. फारूक अब्दुल्ला को अपने बेटे को कुरान की शिक्षा देनी चाहिए। रुहुल्ला का आरोप था कि उमर अब्दुल्ला ने विधानसभा चुनाव के तुरंत बाद भारतीय जनता पार्टी के डर से अनुच्छेद 370 पर अपने रुख में बदलाव कर लिया था।
वहीं, रुहुल्ला मेहदी के अचानक लिए गए फैसले और लगाए गए गंभीर आरोपों को लेकर जब डॉ. फारूक अब्दुल्ला से सवाल किया गया था, तो उन्होंने इस मामले पर फिलहाल कुछ भी कहने से इनकार कर दिया था।
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