लद्दाख में शराब नीति के खिलाफ महिलाओं का आंदोलन स्थगित, प्रशासन ने मानीं मांगें

HIGHLIGHTS
- संगठनों ने शराब नीति पूरी तरह वापस लेने और लद्दाख को शराबमुक्त घोषित करने की मांग रखी थी।
- प्रशासन के गृह विभाग ने 29 अक्तूबर को मांगों को सैद्धांतिक मंजूरी देने संबंधी पत्र जारी किया।
- विशेष सचिव ताशी डोलमा ने एक सप्ताह में समझौते को अंतिम रूप देने की बात कही।
लद्दाख में प्रशासन की नई शराब नीति के विरोध में चल रहा महिलाओं का आंदोलन फिलहाल रोक दिया गया है। जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने बताया कि केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन ने महिला संगठनों की सभी मांगों को स्वीकार करने पर सहमति जताई है। समझौते को अंतिम रूप देने के लिए प्रशासन ने एक सप्ताह का समय मांगा है। इसके बाद प्रशासन से लिखित आश्वासन मिलने पर चार महिला संगठनों ने 29 अक्तूबर से 5 नवंबर तक प्रस्तावित धरने को स्थगित करने का फैसला किया है।
वांगचुक ने सोशल मीडिया के माध्यम से इसकी जानकारी दी। उन्होंने उम्मीद जताई कि प्रशासन महिलाओं के भरोसे और विश्वास को बनाए रखेगा। उनके मुताबिक, प्रशासन ने सभी मांगों को मानने की सहमति दी है और समझौते को अंतिम रूप देने के लिए एक सप्ताह का वक्त मांगा है।
लद्दाख में नई शराब नीति के खिलाफ महिलाएं पिछले सप्ताह से विरोध प्रदर्शन कर रही थीं। महिला संगठनों की प्रमुख मांग थी कि शराब नीति को पूरी तरह वापस लिया जाए और लद्दाख को पूर्ण रूप से शराबमुक्त केंद्र शासित प्रदेश घोषित किया जाए।
इस आंदोलन में लद्दाख बौद्ध एसोसिएशन महिला विंग, अंजुमन-ए-इमामिया महिला विंग, अंजुमन मोइन-उल-इस्लाम महिला विंग और ईसाई समुदाय महिला विंग शामिल थे।
शराब की बढ़ती उपलब्धता पर जताई थी चिंता
महिला संगठनों ने शराब की उपलब्धता बढ़ाने, हाल ही में बार लाइसेंस जारी करने और नई वाइन शॉप खोलने पर आपत्ति जताई थी। उनका मानना था कि शराब की बढ़ती उपलब्धता युवाओं के भविष्य को प्रभावित कर सकती है। साथ ही इससे लद्दाख की सामाजिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पहचान को भी नुकसान पहुंचने की आशंका है।
गृह विभाग ने पत्र जारी कर दी जानकारी
प्रशासन के गृह विभाग की ओर से 29 अक्तूबर को जारी पत्र में विशेष सचिव ताशी डोलमा ने बताया कि महिला संगठनों की ओर से रखे गए सुझावों और मांगों को सैद्धांतिक रूप से स्वीकार कर लिया गया है। प्रशासन ने आपसी बातचीत और सहयोग के जरिए एक सप्ताह के भीतर समझौते को अंतिम रूप देने के लिए समय मांगा है।
महिला संगठनों ने कहा कि प्रशासन के आश्वासन पर भरोसा करते हुए उन्होंने धरना अस्थायी रूप से स्थगित किया है। इसका उद्देश्य प्रशासन को अपने वादे पूरे करने और सहमति वाले बिंदुओं को लिखित रूप देने का अवसर देना है।
संगठनों ने आंदोलन को समर्थन देने के लिए लद्दाख के लोगों का आभार भी जताया। उन्होंने कहा कि स्वस्थ और नशामुक्त लद्दाख बनाने का उनका संकल्प पहले की तरह कायम है।
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