बंगाल के सरकारी कर्मचारियों के लिए बड़ा अपडेट, सातवें वेतन आयोग की शर्तें और कार्यक्षेत्र तय

HIGHLIGHTS
- आयोग केंद्रीय कर्मचारियों के समान वेतन स्तर पर भी विचार करेगा।
- वार्षिक वेतनवृद्धि को 3% से बढ़ाकर कम से कम 5% करने का प्रस्ताव शामिल है।
- 1 जनवरी 2026 से संशोधित वेतन ढांचे को लागू करने पर भी विचार होगा।
कोलकाता: बंगाल सरकार ने राज्य के सरकारी कर्मचारियों के लिए गठित सातवें राज्य वेतन आयोग के कामकाज से जुड़ी विस्तृत नियम-शर्तें और कार्यक्षेत्र तय करते हुए अधिसूचना जारी कर दी है।
अधिसूचना में वेतन संरचना, सालाना वेतनवृद्धि, केंद्रीय वेतनमान के अनुरूप वेतन स्तर, महंगाई भत्ता, आवास भत्ता, सेवानिवृत्ति लाभ और अन्य भत्तों की समीक्षा का प्रावधान किया गया है।
सातवें वेतन आयोग में शामिल किए गए नए प्रावधान
बंगाल के सातवें वेतन आयोग के नियमों और कार्यक्षेत्र में केंद्रीय कर्मचारियों के साथ वेतन में समानता, 11 साल बाद परिवर्तित पेंशन की बहाली और वार्षिक वेतन वृद्धि को तीन प्रतिशत से बढ़ाकर कम से कम पांच प्रतिशत करने जैसे मुद्दे शामिल किए गए हैं।
इसका मतलब है कि अभी मिलने वाली तीन प्रतिशत सालाना वेतनवृद्धि की जगह आयोग कम से कम पांच प्रतिशत वार्षिक वृद्धि के प्रस्ताव पर विचार करेगा।
वेतन मैट्रिक्स और भत्तों की होगी समीक्षा
महंगाई और मौजूदा आर्थिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए नए वेतन मैट्रिक्स की भी समीक्षा की जाएगी। हाल में गठित आयोग राज्य कर्मचारियों के वेतन, भत्तों और सेवा शर्तों में व्यापक बदलाव के साथ करियर प्रगति, सेवानिवृत्ति और स्वास्थ्य सुविधाओं से जुड़े लाभों में संशोधन के प्रस्तावों पर भी विचार करेगा।
राज्य की नई भाजपा सरकार ने आयोग को मौजूदा वेतन ढांचे, भत्तों, पेंशन, ग्रेच्युटी और अन्य सेवानिवृत्ति लाभों की समीक्षा करने की जिम्मेदारी दी है। आयोग को इन व्यवस्थाओं को वर्तमान आर्थिक परिस्थितियों और महंगाई के अनुरूप तर्कसंगत बनाने के साथ अपनी सिफारिश देने को कहा गया है।
मौजूदा व्यवस्था की विसंगतियां दूर करने पर जोर
राज्य सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, इन प्रस्तावों का उद्देश्य सेवा शर्तों से जुड़े सभी प्रमुख पहलुओं को शामिल करते हुए मौजूदा व्यवस्था की विसंगतियों को दूर करना है।
सातवें वेतन आयोग के कार्यक्षेत्र में राज्य सरकार के कर्मचारियों और केंद्रीय वेतन आयोग के दायरे में आने वाले कर्मचारियों के वेतन स्तर के बीच समानता स्थापित करना भी शामिल है। इसका लक्ष्य पूरे देश में समान स्तर हासिल करना और वेतन ढांचे में अंतर के चलते होने वाले कानूनी विवादों को कम करना है।
प्रस्तावित नियमों में औद्योगिक श्रमिकों के लिए उपभोक्ता मूल्य सूचकांक के आधार पर महंगाई भत्ता निर्धारित करने की व्यवस्था शुरू करने और इसके भुगतान के लिए स्थायी आदेश की सिफारिश करने का भी प्रावधान है।
आयोग से यह भी कहा गया है कि वह एक जनवरी 2026 से संशोधित वेतन ढांचे को केवल कागजों तक सीमित रखने के बजाय वास्तविक रूप से लागू करने के विकल्प पर विचार करे।
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