मानसून सत्र: आज पेश होंगे चार विधेयक, परिसीमन पर DMK के रुख का इंतजार

HIGHLIGHTS
- लोकसभा में विधेयक पारित कराने के लिए दो-तिहाई समर्थन जुटाना जरूरी है।
- राजग के पास फिलहाल करीब 326 सांसदों का समर्थन बताया गया है।
- विपक्षी खेमे की संख्या सहयोगी दलों और निर्दलीयों को मिलाकर करीब 189 तक पहुंचती है।
नई दिल्ली। संसद के मानसून सत्र के बचे हुए चार दिनों में परिसीमन विधेयक को फिर से आगे बढ़ाने के लिए राजग संख्या बल जुटाने की कोशिश में लगा है। ऐसे में फिलहाल तटस्थ रुख अपनाए हुए द्रमुक के 22 लोकसभा सांसदों की भूमिका बेहद अहम हो गई है।
तृणमूल कांग्रेस और शिवसेना (यूबीटी) में हुई टूट के बाद लोकसभा में राजग और विपक्षी गठबंधन आइएनडीआइए के मौजूदा आंकड़ों को देखें तो परिसीमन विधेयक को पारित कराने की राह में द्रमुक की भूमिका निर्णायक नजर आ रही है। वहीं विपक्ष के लिए शरद पवार की एनसीपी-एसपी का आइएनडीआइए के साथ बने रहना भी महत्वपूर्ण है।
राजग सरकार की ओर से द्रमुक और एनसीपी-एसपी को लेकर लगातार संपर्क साधने की कोशिशों के बीच मानसून सत्र के शेष दिन विपक्ष के लिए एकजुटता बनाए रखने की दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण हो गए हैं। परिसीमन विधेयक को लेकर पर्दे के पीछे राजनीतिक गतिविधियां जारी हैं, लेकिन द्रमुक ने अभी तक अपने रुख को लेकर कोई स्पष्ट संकेत नहीं दिया है।
इसी कारण सरकार ने फिलहाल परिसीमन विधेयक को सोमवार की लोकसभा या राज्यसभा की कार्यसूची में शामिल नहीं किया है। हालांकि संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू महिला आरक्षण लागू करने का हवाला देते हुए परिसीमन के मुद्दे पर लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी सहित विपक्षी दलों पर लगातार दबाव बनाने की कोशिश कर रहे हैं।
सरकार के लिए विपक्षी खेमे में सेंध लगाए बिना परिसीमन विधेयक को आगे बढ़ाना आसान नहीं होगा। यही वजह है कि द्रमुक पर उसकी नजर बनी हुई है। कांग्रेस से गठबंधन खत्म होने के बाद एमके स्टालिन का ध्यान राष्ट्रीय राजनीति के बजाय तमिलनाडु में पार्टी के भविष्य पर अधिक है और राजग इसी स्थिति में अपने लिए संभावना देख रहा है।
लोकसभा में राजग के पास करीब 326 सांसद
लोकसभा में मौजूदा संख्या बल को देखते हुए परिसीमन विधेयक पर मुकाबला काफी महत्वपूर्ण हो गया है। राजग के पास पहले 293 सांसद थे। तृणमूल कांग्रेस से टूटकर एनसीपीआई के रूप में जुड़े 20 सांसद और शिवसेना (यूबीटी) से अलग होकर एकनाथ शिंदे की शिवसेना में शामिल हुए छह सांसदों को जोड़ने के बाद यह संख्या 319 हो गई है।
जगन मोहन रेड्डी की वाईएसआर कांग्रेस के चार सांसदों और कुछ निर्दलीय सदस्यों को मिलाने पर राजग समर्थक संख्या 326 से अधिक हो जाती है। इसमें अकाली दल का एक सांसद भी शामिल है, जिसने दो दिन पहले परिसीमन के मुद्दे पर राजग को समर्थन देने की घोषणा की थी। वाईएसआर कांग्रेस ने अप्रैल में भी लोकसभा में परिसीमन विधेयक पर राजग का समर्थन किया था।
विधेयक पारित कराने के लिए 350-360 सांसदों की जरूरत
परिसीमन से संबंधित संविधान संशोधन विधेयक पर पिछली बार सरकार को 298 सांसदों का समर्थन मिला था, जो जरूरी दो-तिहाई बहुमत से काफी कम था। वर्तमान में लोकसभा में 540 सदस्य हैं और असम की नौगांव, बंगाल की बशीरहाट तथा मेघालय की शिलॉन्ग सीट खाली है।
विधेयक को पारित कराने के लिए सदन में मौजूद सांसदों के दो-तिहाई समर्थन की जरूरत होगी। ऐसे में सरकार के लिए 350 से 360 के बीच का संख्या बल जुटाना जरूरी माना जा रहा है। इस लिहाज से द्रमुक के 22 सांसदों का समर्थन बेहद महत्वपूर्ण हो जाता है। द्रमुक के समर्थन से अलग रहने की स्थिति में सत्ता पक्ष के लिए बाकी चार-छह सांसदों का प्रबंध करना कठिन हो सकता है।
विपक्ष के पास करीब 189 सांसद
तृणमूल कांग्रेस और शिवसेना (यूबीटी) में टूट के बाद विपक्षी गठबंधन के सामने 18वीं लोकसभा में अब तक की कठिन राजनीतिक चुनौती है। द्रमुक के आइएनडीआइए से अलग होने के बाद विपक्ष की स्थिति और कमजोर हुई है।
अप्रैल में परिसीमन विधेयक के खिलाफ लोकसभा में आइएनडीआइए के साथ 230 सांसद खड़े हुए थे, लेकिन अब गठबंधन के पास करीब 179 सांसद रह गए हैं। आम आदमी पार्टी के तीन, एआईएमआईएम, बीटीपी और आजाद समाज पार्टी के एक-एक सांसद तथा चार निर्दलीयों को जोड़ने पर यह संख्या करीब 189 हो जाती है।
इन सभी ने पिछली बार परिसीमन विधेयक के खिलाफ विपक्ष का समर्थन किया था। द्रमुक की अहमियत को देखते हुए सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों की ओर से एमके स्टालिन को अपने पक्ष में करने की कोशिशें जारी हैं। इसी बीच राज्यसभा में कांग्रेस के मुख्य सचेतक जयराम रमेश ने रविवार को कहा कि विपक्षी सांसदों को बड़ी संख्या में निलंबित कर विधेयक पारित कराने जैसी स्थिति दोबारा नहीं दोहराई जानी चाहिए।
सोमवार को ये विधेयक होंगे पेश
लोकसभा में सोमवार को कई विधेयक पेश किए जाएंगे। इनमें न्यायाधिकरण सुधार विधेयक-2026 अर्जुन राम मेघवाल, खान एवं खनिज (विकास और विनियमन) संशोधन विधेयक-2026 जी. किशन रेड्डी तथा केरल (नाम में बदलाव) विधेयक-2026 और राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (संशोधन) विधेयक-2026 अमित शाह पेश करेंगे।
राज्यसभा में बैंकर्स बुक्स एविडेंस बिल-2026 पर चर्चा होगी, जिसे वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण पेश करेंगी। उच्च सदन में कराधान एवं अन्य कानून (संशोधन) विधेयक-2026 पर भी विचार किया जाएगा।
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