मुजफ्फरनगर: सरसों की फसल को लेकर हुआ था विवाद, 16 साल बाद अदालत ने चार आरोपियों को ठहराया दोषी

HIGHLIGHTS
- विवाद 28 मार्च 2010 को हंसावाला स्थित खेत में सरसों की फसल काटने के दौरान हुआ था।
- शिकायत के अनुसार, संघर्ष में विक्रम को गोली लगी थी और बृजेश व सविता पर भी हमला हुआ था।
- पुलिस ने 15 मई 2010 को मामले में आरोपपत्र दाखिल किया था।
मुजफ्फरनगर में सरसों की फसल काटने को लेकर हुए खूनी संघर्ष के करीब 16 साल पुराने मामले में अदालत ने सोमवार को चार आरोपियों को दोषी ठहराया। एससी-एसटी एक्ट की विशेष अदालत के पीठासीन अधिकारी डॉ. विजय कुमार ने रामराज थाना क्षेत्र के हुसैनपुर निवासी रामवतार, प्रदीप और कुंवरपाल के साथ बिजनौर के फैजीपुर निवासी जनेश्वर को दोषी करार दिया। अदालत ने चारों को न्यायिक हिरासत में लेकर जिला कारागार भेज दिया है। मामले में सजा पर फैसला 31 अक्टूबर 2026 को सुनाया जाएगा।
28 मार्च 2010 को हुआ था विवाद
यह मामला 28 मार्च 2010 का है। अभियोजन पक्ष के अनुसार, हुसैनपुर निवासी विक्रम ने हंसावाला स्थित जमीन पर सरसों की फसल बोई थी। जमीन और फसल को लेकर दोनों पक्षों के बीच विवाद चल रहा था। 27 मार्च 2010 को रामराज थाने में आयोजित थाना दिवस के दौरान विवाद सुलझाने का प्रयास किया गया था। शिकायत के मुताबिक, उस समय तय हुआ था कि सरसों की फसल विक्रम काटेगा।
आरोप है कि अगले दिन 28 मार्च को विक्रम परिवार की महिलाओं, मजदूरों और अन्य लोगों के साथ मशीन लेकर खेत पर पहुंचा। सुबह करीब 8 बजे वहां दूसरे पक्ष के लोगों के साथ विवाद हो गया। विजयपाल की शिकायत के अनुसार, रामवतार पक्ष के लोगों ने तमंचे, बंदूक, तलवार और लाठी-डंडों से हमला कर दिया।
गोली लगने और तलवार से वार करने का था आरोप
इस संघर्ष के दौरान विक्रम के पेट में गोली लग गई। वहीं, बृजेश पर तलवार से हमला करने और सविता के ऊपर ट्रैक्टर चढ़ाने का भी आरोप लगाया गया था। शिकायत में यह भी कहा गया था कि घटना में सविता के हाथ की हड्डी टूट गई थी।
घटना के बाद 28 मार्च 2010 को रामराज थाने में मुकदमा दर्ज कराया गया। पुलिस ने जांच पूरी करने के बाद 15 मई 2010 को आरोपपत्र दाखिल किया था।
अभियोजन पक्ष ने पेश किए आठ गवाह
मुकदमे की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से आठ गवाह पेश किए गए। मामले के एक अन्य आरोपी सूरजमल की मृत्यु हो चुकी है, इसलिए उसके खिलाफ कार्यवाही आगे नहीं बढ़ी।
अभियोजन पक्ष की ओर से सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता फौजदारी आशीष त्यागी ने पैरवी की। अदालत ने सुनवाई के बाद चारों आरोपियों को दोषी करार दिया। अब 31 अक्टूबर को सजा के प्रश्न पर सुनवाई होगी।
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