मुजफ्फरनगर: 10 करोड़ की GST चोरी में फैक्टरी मालिक गिरफ्तार, पूर्व विधायक की तलाश तेज

मुजफ्फरनगर: करीब 10 करोड़ रुपये की जीएसटी चोरी के मामले में आर्थिक अपराध अनुसंधान संगठन (EOW) मेरठ की टीम ने बड़ी कार्रवाई करते हुए एक फैक्टरी संचालक को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपी की पहचान सिविल लाइन थाना क्षेत्र स्थित मॉडल टाउन निवासी जुनेद के रूप में हुई है। उसे अदालत में पेश करने के बाद न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया।

ईओडब्ल्यू के जांच अधिकारी एवं सीओ जितेंद्र सिंह कालरा के अनुसार, यह मामला वर्ष 2021 में मंसूरपुर थाने में दर्ज कराया गया था। तत्कालीन वाणिज्य कर विभाग के डिप्टी कमिश्नर एल.एस. शरण की शिकायत पर दर्ज मुकदमे की जांच के दौरान कई अहम तथ्य सामने आए हैं।
जांच में सामने आईं फर्जी खरीद-बिक्री की परतें
जांच एजेंसियों के मुताबिक, मेरठ रोड स्थित राज कमल ट्रेडर्स से जुड़े लेन-देन की पड़ताल में पाया गया कि जिन फर्मों से माल की खरीद दर्शाई गई थी, उनकी सप्लाई चेन संदिग्ध थी। कई मामलों में न तो वास्तविक माल की आपूर्ति के प्रमाण मिले और न ही संबंधित कर जमा कराया गया था।

प्राथमिक जांच में सामने आया है कि फर्जी दस्तावेजों और कागजी लेन-देन के जरिए करोड़ों रुपये की जीएसटी चोरी की गई। अधिकारियों का अनुमान है कि कर चोरी की रकम करीब 10 करोड़ रुपये तक पहुंच सकती है।
पूर्व विधायक शाहनवाज राना पर भी जांच की आंच
मामले की जांच के दौरान कुछ बैंक खातों के विश्लेषण में यह जानकारी भी सामने आई कि संबंधित फर्म के खातों से धनराशि पूर्व विधायक शाहनवाज राना तक पहुंची थी। इसी आधार पर जांच एजेंसी अब उनकी भूमिका की भी पड़ताल कर रही है और उनकी तलाश शुरू कर दी गई है।
सूत्रों के अनुसार, वर्ष 2019 और 2020 के दौरान एक ही परिसर से दो फर्मों का संचालन किया जा रहा था। आरोप है कि माल के परिवहन के लिए फर्जी बिल्टियों का इस्तेमाल किया गया, जिसके आधार पर कागजी लेन-देन को वैध दिखाने की कोशिश की गई।
विवादों से पुराना नाता
शाहनवाज राना का नाम इससे पहले भी एक अन्य मामले में सामने आ चुका है। दिसंबर 2023 में जीएसटी विभाग की टीम द्वारा की गई छापेमारी के दौरान अधिकारियों के साथ कथित अभद्रता और हमला करने के आरोप में उनके खिलाफ सिविल लाइन थाने में मुकदमा दर्ज किया गया था। उस मामले में उन्हें जेल भी जाना पड़ा था और बाद में हाईकोर्ट से जमानत मिलने पर रिहाई हुई थी।
लंबे समय बाद तेज हुई जांच
हालांकि जीएसटी चोरी का यह मामला वर्ष 2021 में दर्ज हुआ था, लेकिन जांच में हाल के महीनों में तेजी आई है। वर्तमान विवेचक को करीब तीन महीने पहले ही जांच सौंपी गई थी, जिसके बाद मामले में नई कार्रवाई शुरू हुई और पहली गिरफ्तारी की गई है। जांच एजेंसियों का कहना है कि मामले से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका भी खंगाली जा रही है।
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