मुजफ्फरनगर: मातृत्व सेवाओं का राज्य स्तरीय मूल्यांकन शुरू, अस्पतालों की जांच जारी

HIGHLIGHTS
- मुजफ्फरनगर में गर्भवती महिलाओं और नवजात शिशुओं के लिए उपलब्ध स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता को लेकर राज्य स्तर पर विस्तृत आकलन किया जा रहा है।
- इसके तहत उत्तर प्रदेश शासन द्वारा गठित एक विशेष टीम जिले के विभिन्न सरकारी एवं निजी अस्पतालों का लगातार निरीक्षण कर रही है।
- मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ.
- सुनील तेवतिया ने बताया कि यह मूल्यांकन अभियान प्रदेश सरकार के स्टेट ट्रांसफॉर्मेशन कमीशन के अंतर्गत संचालित किया जा रहा है।
- इसका उद्देश्य मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं की वास्तविक स्थिति का आकलन कर उनमें स…
मुजफ्फरनगर में गर्भवती महिलाओं और नवजात शिशुओं के लिए उपलब्ध स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता को लेकर राज्य स्तर पर विस्तृत आकलन किया जा रहा है। इसके तहत उत्तर प्रदेश शासन द्वारा गठित एक विशेष टीम जिले के विभिन्न सरकारी एवं निजी अस्पतालों का लगातार निरीक्षण कर रही है।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. सुनील तेवतिया ने बताया कि यह मूल्यांकन अभियान प्रदेश सरकार के स्टेट ट्रांसफॉर्मेशन कमीशन के अंतर्गत संचालित किया जा रहा है। इसका उद्देश्य मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं की वास्तविक स्थिति का आकलन कर उनमें सुधार की संभावनाओं को तलाशना है।
राज्य स्तर से आए असिस्टेंट स्टैटिस्टिकल ऑफिसर विशेष कुमार के नेतृत्व में टीम जिले की स्वास्थ्य इकाइयों का निरीक्षण कर रही है। इस दौरान यह देखा जा रहा है कि सरकारी अस्पतालों में प्रसव सेवाएं कितनी प्रभावी हैं, गर्भवती महिलाओं को समय पर उपचार और जांच सुविधाएं मिल रही हैं या नहीं, और नवजात शिशुओं की देखभाल की व्यवस्था कितनी मजबूत है।

निरीक्षण के दौरान अस्पतालों में विशेषज्ञ चिकित्सकों की उपलब्धता, डिलीवरी रूम की स्थिति, जच्चा-बच्चा सुरक्षा व्यवस्था, मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी लाने के प्रयास तथा उपलब्ध संसाधनों का विस्तृत मूल्यांकन किया जा रहा है।
अब तक सदर, मोरना और जानसठ ब्लॉकों के कई प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (PHC) और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (CHC) का निरीक्षण किया जा चुका है। इसके अलावा जिला महिला चिकित्सालय, जिला पुरुष चिकित्सालय, शहरी क्षेत्रों के अर्बन PHC और बुढ़ाना क्षेत्र की स्वास्थ्य इकाइयों का भी जायजा लिया गया है।
इस बार निरीक्षण का दायरा केवल सरकारी अस्पतालों तक सीमित नहीं रखा गया है। जिले के लगभग 10 से 15 प्रमुख निजी अस्पतालों का भी मूल्यांकन किया जाएगा। इनमें उपलब्ध चिकित्सा सुविधाओं, आधुनिक उपकरणों, प्रसव सेवाओं, विशेषज्ञ डॉक्टरों और मरीजों को दी जा रही सुविधाओं की गुणवत्ता की जांच शामिल है।
सीएमओ डॉ. सुनील तेवतिया के अनुसार, इस पूरे अध्ययन का मकसद यह समझना है कि निजी अस्पतालों में मौजूद बेहतर तकनीक और व्यवस्थाओं को किस तरह सरकारी स्वास्थ्य प्रणाली में भी अपनाया जा सकता है, ताकि आम जनता को अधिक प्रभावी स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जा सकें।
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