रायबरेली में पीएनबी अधिकारियों पर धोखाधड़ी और जातीय उत्पीड़न का मामला दर्ज

रायबरेली में पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) के मंडल कार्यालय से जुड़े एक गंभीर मामले में अदालत के आदेश के बाद चार बैंक अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। विशेष अपर सत्र न्यायाधीश (एससी/एसटी कोर्ट) के निर्देश पर सदर कोतवाली पुलिस ने यह कार्रवाई की है। आरोपियों पर धोखाधड़ी, जाली दस्तावेज तैयार करने और जातिगत उत्पीड़न जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं।
मामला रायबरेली शहर के बालापुर निवासी देवनाथ से जुड़ा है, जिन्होंने अदालत में दाखिल याचिका में बताया कि उन्हें 17 सितंबर 2022 को पीएनबी के फिरोज गांधी नगर स्थित मंडल कार्यालय से सेवा से बर्खास्त कर दिया गया था। आरोप है कि बर्खास्तगी के बाद बैंक अधिकारियों ने उनकी ग्रेच्युटी राशि बिना जानकारी के एक लोन खाते में समायोजित कर दी।
इसके अलावा, पीड़ित का दावा है कि पहले से बंद हो चुके गृह ऋण खाते को बिना उनकी अनुमति और हस्ताक्षर के आधार पर जाली दस्तावेजों के जरिए दोबारा सक्रिय कर एक नया सार्वजनिक गृह ऋण खाता खोल दिया गया। इस पूरी प्रक्रिया को उन्होंने जातिगत भेदभाव से प्रेरित बताया है।
देवनाथ का यह भी आरोप है कि गृह ऋण बंद होने के बावजूद उनकी टाइटल डीड उन्हें वापस नहीं की गई। सूचना के अधिकार के तहत प्राप्त दस्तावेजों में भी कई विसंगतियां सामने आईं, जिनमें दोनों खातों को एक जैसा दर्शाया गया, जबकि वे अलग होने चाहिए थे। बैंक की आंतरिक जांच में भी एक अधिकारी द्वारा इस ऋण को अवैध बताया गया है।
पीड़ित का कहना है कि इस कथित फर्जीवाड़े के कारण उन्हें और उनके परिवार को आर्थिक और सामाजिक नुकसान झेलना पड़ा। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि वर्ष 2024 में उनके खातों में अनियमित तरीके से बदलाव किए गए, जिसके बाद उन्होंने पुलिस और वरिष्ठ अधिकारियों से शिकायत की, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।
अदालत के आदेश के बाद अब सदर कोतवाली पुलिस ने पीएनबी के मंडल प्रमुख रक्तिमावा दान, सीनियर मैनेजर अल्पना त्रिवेदी, ज्ञानेंद्र प्रकाश वर्मा और चीफ मैनेजर प्रवीण कुमार के खिलाफ धोखाधड़ी और एससी/एसटी एक्ट के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस का कहना है कि साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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