राम मंदिर चढ़ावा घोटाला: टिन्नू यादव के घर से करोड़ों का सोना जब्त

अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि मंदिर से जुड़े चढ़ावे और खजाने में कथित तौर पर करोड़ों रुपये के गबन के मामले ने बड़ा रूप ले लिया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर गठित विशेष जांच दल (SIT) 15 जून 2026 को अयोध्या पहुंची और जांच को तेज कर दिया है। टीम ने श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय से लगभग छह घंटे तक पूछताछ की तथा कई डिजिटल दस्तावेजों की जांच की।
जांच एजेंसियों ने कार्रवाई से पहले पांच संदिग्धों से करीब दो करोड़ रुपये नकद, एक लग्जरी वाहन और तीन मोबाइल फोन जब्त किए हैं। इस पूरे मामले में ट्रस्ट से जुड़े कुछ लोगों के करीबी सहयोगियों पर भी संदेह गहराता जा रहा है।
सूत्रों के अनुसार, महासचिव चंपत राय के सहयोगी माने जाने वाले रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू की भूमिका की भी जांच की जा रही है। 13 जून को उसके पैतृक आवास पर हुई छापेमारी में बड़ी मात्रा में सोना बरामद किया गया था। प्रारंभिक आकलन के मुताबिक, इसकी कीमत अंतरराष्ट्रीय बाजार में करोड़ों रुपये तक हो सकती है। जांच में यह भी सामने आया है कि टिन्नू के नाम पर अयोध्या और लखनऊ में लगभग 50 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्तियों का संदेह है। बताया जा रहा है कि वह पहले ऑटो चालक रह चुका है। उसके एक बड़े छात्रावास की भी जांच की संभावना जताई जा रही है।
इसके अलावा, जांच एजेंसियों की नजर सोमेश आनंद पर भी है, जो मंदिर निर्माण से जुड़े एक वरिष्ठ अधिकारी का करीबी रिश्तेदार बताया जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक, सोमेश ने पिछले एक वर्ष में विभिन्न राज्यों की कई संदिग्ध यात्राएं की हैं। वह अयोध्या से भारी सामान लेकर ट्रेन के माध्यम से दक्षिण भारत जाता था और लौटते समय हवाई यात्रा करता था। फिलहाल उसके बैंक लेनदेन और यात्रा रिकॉर्ड की जांच की जा रही है।
इस मामले में केडी तिवारी का नाम भी सामने आया है, जिन पर आभूषणों के रखरखाव और प्रशासनिक जिम्मेदारी की बात कही जा रही है। उनके आवास पर भी जांच एजेंसियों ने छापेमारी की थी। हाल ही में उनकी ओर से खरीदी गई लगभग डेढ़ करोड़ रुपये की जमीन के सौदे को भी जांच के दायरे में रखा गया है।
वहीं केडी तिवारी ने आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनकी भूमिका केवल श्रद्धालुओं द्वारा दिए गए आभूषणों को प्राप्त कर रसीद जारी करने तक सीमित थी। उनके अनुसार, आगे की प्रक्रिया ट्रस्ट के वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा संभाली जाती थी और गहनों के उपयोग या संचालन से उनका कोई संबंध नहीं है।
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