रेड लाइट थेरेपी: सेहत के लिए नई उम्मीद, तेजी से बढ़ रही लोकप्रियता

नई दिल्ली। आधुनिक जीवनशैली में लोग ज्यादातर समय घरों और दफ्तरों के भीतर बिताते हैं, जिससे प्राकृतिक धूप से दूरी बढ़ती जा रही है। लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि एक विशेष प्रकार की रोशनी शरीर के लिए बेहद फायदेमंद साबित हो सकती है। यही वजह है कि रेड लाइट थेरेपी इन दिनों चिकित्सा जगत में तेजी से चर्चा में आ रही है।
स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों के अनुसार, आने वाले वर्षों में इस तकनीक का उपयोग और तेजी से बढ़ सकता है। अनुमान है कि वर्ष 2030 तक रेड लाइट थेरेपी का वैश्विक बाजार 9 हजार करोड़ रुपये से अधिक तक पहुंच सकता है।
एक घटना जिसने बढ़ाया भरोसा
इस थेरेपी को लेकर लोगों की दिलचस्पी बढ़ने के पीछे कई अनुभव सामने आए हैं। साल 2021 में प्रसिद्ध त्वचा रोग विशेषज्ञ डॉ. डेविड ओजोग के 18 वर्षीय बेटे को स्ट्रोक हुआ था। उस समय उनके एक सहयोगी ने सुझाव दिया कि बेटे के सिर पर रेड और नियर-इंफ्रारेड लाइट का इस्तेमाल किया जाए।
शुरुआत में यह सलाह उन्हें असामान्य लगी, लेकिन उपचार के बाद बेटे की सेहत में सुधार ने सभी को हैरान कर दिया। धीरे-धीरे वह फिर से सामान्य गतिविधियों में लौट सका और अपनी पढ़ाई भी दोबारा शुरू कर दी।
क्या होती है रेड लाइट थेरेपी
वैज्ञानिक तौर पर इस तकनीक को फोटोबायोमॉड्यूलेशन कहा जाता है। इसमें 600 से 1100 नैनोमीटर वेवलेंथ वाली लाल और नियर-इंफ्रारेड रोशनी का उपयोग किया जाता है, जो प्राकृतिक सूर्य प्रकाश का ही एक हिस्सा मानी जाती है।
इस थेरेपी में एलईडी पैनल, विशेष मास्क या लेजर उपकरणों के माध्यम से शरीर के प्रभावित हिस्सों पर रोशनी डाली जाती है। विशेषज्ञों के मुताबिक यह तकनीक कोशिकाओं की ऊर्जा बढ़ाने और शरीर की रिकवरी प्रक्रिया को तेज करने में मदद कर सकती है।
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