RSS प्रमुख मोहन भागवत का न्यूयॉर्क में स्वागत, मैडिसन स्क्वायर गार्डन में करेंगे संबोधित

HIGHLIGHTS
- भागवत का दौरा 25 अगस्त 2026 से शुरू हुआ
- न्यूयॉर्क पहुंचने पर पारंपरिक तरीके से स्वागत किया गया
- भारतीय समुदाय और स्थानीय संगठनों के प्रतिनिधियों से संवाद करेंगे
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख मोहन भागवत मंगलवार को न्यूयॉर्क पहुंचे। अमेरिका, कनाडा और यूनाइटेड किंगडम के उनके तीन देशों के ग्लोबल आउटरीच दौरे की शुरुआत अमेरिका से हुई है। RSS के शताब्दी वर्ष समारोह के तहत स्थानीय संगठनों के निमंत्रण पर हो रहे इस दौरे में भागवत भारतीय समुदाय के लोगों के साथ-साथ स्थानीय संगठनों के प्रतिनिधियों से संवाद करेंगे। न्यूयॉर्क पहुंचने पर उनका तिलक लगाकर पारंपरिक तरीके से स्वागत किया गया।
मैडिसन स्क्वायर गार्डन में होगा बड़ा आयोजन
मोहन भागवत शनिवार को न्यूयॉर्क शहर के प्रसिद्ध मैडिसन स्क्वायर गार्डन में ‘यूनिवर्सल वननेस सेलिब्रेशन्स’ यानी ‘सार्वभौमिक एकता समारोह’ को संबोधित करेंगे। यह कार्यक्रम ‘अमेरिकन हिंदूज फॉर एंगेजमेंट एंड डायलॉग’ (AHEAD) फोरम की ओर से आयोजित किया जा रहा है, जिसमें विविध समुदायों की भागीदारी होगी।
भागवत के संबोधन को लेकर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रुचि देखी जा रही है। कार्यक्रम में एकता, नागरिक कर्तव्य और वैश्विक सद्भाव जैसे विचारों के साथ हिंदू त्योहार रक्षाबंधन की पारंपरिक भावना को जोड़ा जाएगा।
सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ विभिन्न धर्मों के प्रतिनिधि भी होंगे शामिल
आयोजकों के मुताबिक, कार्यक्रम की थीम के अनुरूप विभिन्न सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी होंगी। इसके अलावा अलग-अलग धर्मों के प्रमुख वक्ता समारोह में शामिल होंगे और एकता व वैश्विक सद्भाव का संदेश देंगे।
25 अगस्त से शुरू हुआ तीन देशों का दौरा
RSS के प्रचार प्रमुख सुनील अंबेडकर ने इससे पहले सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर बताया था कि मोहन भागवत 25 अगस्त 2026 से अमेरिका, कनाडा और यूनाइटेड किंगडम के दौरे पर रहेंगे। यह यात्रा इन देशों में सक्रिय स्थानीय संघ इकाइयों और विभिन्न संगठनों के निमंत्रण पर आयोजित की जा रही है।
उन्होंने पोस्ट में लिखा था कि RSS के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत 25 अगस्त 2026 से अमेरिका, कनाडा और यूनाइटेड किंगडम का दौरा करेंगे। यह दौरा स्थानीय संघों और संगठनों के निमंत्रण पर हो रहा है और RSS के शताब्दी वर्ष के अवसर पर आयोजित किया जा रहा है।
USCIRF की टिप्पणियों पर भारत का कड़ा पलटवार
मोहन भागवत के अमेरिका पहुंचने से पहले RSS को लेकर अमेरिकी संस्था ‘यूनाइटेड स्टेट्स कमीशन ऑन इंटरनेशनल रिलीजियस फ्रीडम’ (USCIRF) की हालिया टिप्पणियों पर भारत के विदेश मंत्रालय (MEA) ने कड़ी प्रतिक्रिया दी।
विदेश मंत्रालय ने USCIRF को पक्षपाती संस्था बताते हुए उसकी विश्वसनीयता पर सवाल उठाए। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने शुक्रवार को मीडिया ब्रीफिंग में कहा कि USCIRF पिछले कई वर्षों से भारत को लेकर बार-बार गलत और भड़काऊ बयान देता रहा है।
जायसवाल ने कहा कि ऐसी संस्थाओं के बयानों को नजरअंदाज किया जाना चाहिए, क्योंकि उनके अपने एजेंडे होते हैं और उनकी कोई विश्वसनीयता नहीं है।
RSS पर प्रतिबंध और नेताओं से दूरी बनाने की USCIRF की मांग
विदेश मंत्रालय की यह प्रतिक्रिया USCIRF के अधिकारियों की RSS को लेकर की गई टिप्पणियों के बाद आई। USCIRF ने अमेरिकी सरकार से RSS पर प्रतिबंध लगाने की मांग की थी। इसके साथ ही उसने अमेरिकी सरकार से RSS नेताओं को उच्च-स्तरीय राजनयिक सम्मान नहीं देने और उनके साथ बैठकें करने से बचने का आग्रह भी किया था।
मार्च की रिपोर्ट में भारत पर लगाए गए थे आरोप
USCIRF की हालिया टिप्पणियां मार्च में जारी उसकी वार्षिक रिपोर्ट के बाद सामने आईं, जिसमें कथित धार्मिक स्वतंत्रता के उल्लंघन को लेकर भारत की आलोचना की गई थी।
आयोग ने RSS और रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (RAW) समेत कुछ व्यक्तियों और संस्थाओं के खिलाफ लक्षित प्रतिबंधों का समर्थन किया था। भारत ने USCIRF की रिपोर्ट को पहले ही खारिज कर दिया था। सरकार ने रिपोर्ट को “संदिग्ध स्रोतों और वैचारिक नैरेटिव” पर आधारित बताते हुए कहा था कि इसमें भारत की “विकृत और चुनिंदा” तस्वीर पेश की गई है।
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