ईरान से तेल कारोबार पर अमेरिका की बड़ी कार्रवाई, भारत की 4 कंपनियों पर लगाया प्रतिबंध

HIGHLIGHTS
- अमेरिकी विदेश विभाग ने ‘ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट’ के तहत कार्रवाई की।
- पोर्टईज पार्टनर्स एलएलपी को प्रतिबंधित कंपनियों की सूची में शामिल किया गया।
- सदाशिवा ओवरसीज पर करीब 6.9 करोड़ डॉलर के ईरानी पेट्रोलियम उत्पाद आयात का आरोप है।
अमेरिका ने ईरान से जुड़े पेट्रोलियम और पेट्रोकेमिकल कारोबार और खरीद नेटवर्क में कथित भूमिका को लेकर भारत की चार कंपनियों पर प्रतिबंध लगाया है। अमेरिकी विदेश विभाग के मुताबिक, यह कार्रवाई ईरान की सैन्य गतिविधियों, खरीद नेटवर्क और पेट्रोलियम-पेट्रोकेमिकल कारोबार को निशाना बनाने वाले ‘ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट’ के तहत की गई है।
अमेरिकी विदेश विभाग ने जिन भारतीय कंपनियों को कार्रवाई के दायरे में रखा है, उनमें पोर्टईज पार्टनर्स एलएलपी, सदाशिवा ओवरसीज लिमिटेड, पीपी सॉफ्टटेक प्राइवेट लिमिटेड और प्रकृतीज इंफ्रा इम्पेक्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड शामिल हैं। अमेरिका ने इन कंपनियों पर ईरानी मूल के पेट्रोलियम या पेट्रोकेमिकल उत्पादों के कारोबार में शामिल होने के आरोप लगाए हैं।
पोर्टईज पार्टनर्स पर क्या आरोप लगाया?
अमेरिकी विदेश विभाग का दावा है कि पोर्टईज पार्टनर्स एलएलपी ने ईरान से भारत में कई खेपों के जरिए पेट्रोकेमिकल उत्पादों के आयात में मदद की। विभाग ने इसके दो नामित साझेदारों के रूप में भारतीय नागरिक इंद्रिस्मिया अशरफमिया शेख और हरीश रामचंद्र रंगी का भी उल्लेख किया है।
सदाशिवा ओवरसीज पर कितने कारोबार का आरोप?
अमेरिका के अनुसार, सदाशिवा ओवरसीज लिमिटेड ने फरवरी 2024 से जून 2025 के बीच कई कंपनियों से करीब 6.9 करोड़ डॉलर मूल्य के ईरानी मूल के पेट्रोलियम उत्पाद आयात किए। इनमें अमेरिकी प्रतिबंधों के दायरे में आ चुकी कंपनी बोनजोर कमोडिटी एफजेडई भी शामिल बताई गई है।
अमेरिकी विदेश विभाग ने कहा कि कंपनी को ईरान से पेट्रोलियम या पेट्रोलियम उत्पादों की खरीद, अधिग्रहण, बिक्री, परिवहन या विपणन से जुड़े महत्वपूर्ण लेनदेन में कथित तौर पर जानबूझकर शामिल होने के आधार पर प्रतिबंधित किया गया है।
पीपी सॉफ्टटेक पर क्या कहा अमेरिका ने?
अमेरिकी विदेश विभाग ने पीपी सॉफ्टटेक प्राइवेट लिमिटेड पर भी ईरानी मूल के पेट्रोलियम उत्पादों के आयात का आरोप लगाया है। विभाग के अनुसार, कंपनी ने जनवरी 2024 से जून 2025 के बीच करीब 2.5 करोड़ डॉलर मूल्य के ऐसे उत्पाद आयात किए। जारी किए गए विवरण में कंपनी के निदेशक के तौर पर भारतीय नागरिक प्रशांत गर्ग का नाम भी शामिल है।
प्रकृतीज इंफ्रा पर भी लगा प्रतिबंध
अमेरिका ने प्रकृतीज इंफ्रा इम्पेक्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड को भी कार्रवाई के दायरे में रखा है। अमेरिकी विदेश विभाग का आरोप है कि कंपनी ने मई 2023 से फरवरी 2026 के बीच विभिन्न कंपनियों से करीब 2.5 करोड़ डॉलर मूल्य के ईरानी मूल के पेट्रोलियम उत्पाद आयात किए।
अमेरिकी कार्रवाई का व्यापक उद्देश्य ईरान के पेट्रोलियम राजस्व पर रोक लगाना और उन नेटवर्क को बाधित करना है, जिनके जरिए ईरान की सैन्य गतिविधियों और खरीद व्यवस्था को कथित तौर पर मदद मिलती है।
अमेरिकी विदेश विभाग के अनुसार, ‘ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट’ के तहत की गई यह कार्रवाई ईरान से जुड़े सैन्य, खरीद और ऊर्जा कारोबार पर दबाव बढ़ाने की व्यापक अमेरिकी रणनीति का हिस्सा है। फिलहाल, अमेरिकी घोषणा पर इन भारतीय कंपनियों की ओर से कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
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