'जेल भेज दें या मार दें, फिर भी लौटूंगी', शेख हसीना का बांग्लादेश वापसी को लेकर बड़ा बयान

HIGHLIGHTS
- शेख हसीना ने हर हाल में बांग्लादेश लौटने का किया एलान
- दिसंबर 2026 में ढाका लौटने की इच्छा जताई
- 2024 की घटनाओं और आवामी लीग पर कार्रवाई को लेकर लगाए आरोप
नई दिल्ली। बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने बुधवार को स्पष्ट किया कि वह हर हाल में अपने देश लौटेंगी। उन्होंने कहा कि चाहे उन्हें जेल भेज दिया जाए या उनकी हत्या कर दी जाए, फिर भी वह बांग्लादेश वापसी करेंगी।
उन्होंने यह भी कहा कि उनकी इच्छा दिसंबर 2026 में ढाका लौटने की है, हालांकि इस संबंध में अभी अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है।
नई दिल्ली स्थित फॉरेन कॉरेसपोंडेंस क्लब ऑफ साउथ एशिया की ओर से आयोजित एक वर्चुअल प्रेस कॉन्फ्रेंस में शेख हसीना ने कहा, "मैं बांग्लादेश वापस आऊंगी। कब लौटूंगी, इसकी जानकारी उचित समय पर दूंगी।"
उन्होंने कहा कि उन्हें समाज के विभिन्न वर्गों का समर्थन प्राप्त है। उनके मुताबिक, पिछले दो वर्षों में बांग्लादेश के लोगों ने काफी कठिनाइयों का सामना किया है और अब वह इसे और नहीं देख सकतीं। उन्होंने कहा कि वह दिसंबर में लौटना चाहती हैं क्योंकि यह बांग्लादेश की विजय का महीना है।
'जेल में डाल दें या मार दें, फिर भी लौटूंगी'
संभावित सरकारी कार्रवाई के सवाल पर शेख हसीना ने कहा कि यदि उन्हें जेल भेजा जाता है या उनकी हत्या भी कर दी जाती है, तब भी वह अपने देश लौटेंगी। उन्होंने कहा कि उन्हें अपने भविष्य की नहीं, बल्कि बांग्लादेश की चिंता है। उनके अनुसार, उनकी वापसी सत्ता हासिल करने के लिए नहीं, बल्कि देश में प्रगति, स्थिरता और धर्मनिरपेक्षता की बहाली के उद्देश्य से होगी।
शेख हसीना को 5 अगस्त 2024 को हिंसक घटनाओं के बाद ढाका छोड़ना पड़ा था। तब से वह भारत में एक अज्ञात स्थान पर रह रही हैं।
इस दौरान बांग्लादेश में पहले मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व में अंतरिम सरकार बनी और बाद में हुए आम चुनाव में मौजूदा प्रधानमंत्री तारिक रहमान की बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) सत्ता में आई।
प्रेस कॉन्फ्रेंस की शुरुआत में हसीना ने खुद को बांग्लादेश के राष्ट्रपिता बंगबंधु शेख मुजीबुर्रहमान की पुत्री बताते हुए संबोधन शुरू किया।
भारत को बताया महान मित्र देश
अपनी वापसी की घोषणा के साथ शेख हसीना ने भारत को एक महान मित्र देश बताया और उम्मीद जताई कि आवश्यकता पड़ने पर भारत सरकार सहयोग करेगी।
उन्होंने जिस प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित किया, उसे लेकर तारिक रहमान सरकार पहले ही भारत के समक्ष अपनी चिंता जता चुकी थी। भारत सरकार पहले ही स्पष्ट कर चुकी है कि यह एक निजी कार्यक्रम है और इसका सरकार से कोई संबंध नहीं है।
बताया गया कि बांग्लादेश सरकार ने इस प्रेस कॉन्फ्रेंस के प्रसारण पर अपने देश में रोक लगाने की तैयारी भी की थी।
2024 की घटनाओं पर रखी अपनी बात
शेख हसीना ने पहली बार जुलाई-अगस्त 2024 की घटनाओं का विस्तार से उल्लेख किया। उन्होंने आरोप लगाया कि वह केवल छात्र आंदोलन नहीं था, बल्कि संगठित समूहों ने छात्रों के साथ मिलकर हिंसा फैलाई और सत्ता परिवर्तन कराया।
उन्होंने कहा कि वर्ष 2018 में उनकी सरकार ने कोटा प्रणाली समाप्त कर दी थी, लेकिन बाद में हाईकोर्ट ने उस फैसले पर रोक लगा दी। उनके अनुसार, सरकार छात्रों से बातचीत कर रही थी, लेकिन कुछ संगठित समूहों ने आंदोलन की आड़ में हिंसा को बढ़ावा दिया।
उन्होंने यह भी कहा कि मोहम्मद यूनुस ने भी कहा था कि इसकी तैयारी काफी सुनियोजित तरीके से की गई थी। उनके मुताबिक, यह केवल छात्र आंदोलन नहीं था, बल्कि बैलेट बॉक्स के बिना सत्ता परिवर्तन का प्रयास था।
हसीना ने आरोप लगाया कि उस दौरान लूटपाट, आगजनी और कई सरकारी संस्थानों पर हमले हुए। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश टेलीविजन, रेलवे स्टेशन, नेशनल डेटा सेंटर, होटल, विश्वविद्यालय, मेट्रो स्टेशन और जेलों सहित कई स्थानों को निशाना बनाया गया। साथ ही अपराधियों को छोड़ा गया तथा मीडिया संस्थानों, पत्रकारों, पुलिसकर्मियों और सरकारी अधिकारियों पर हमले हुए। उन्होंने दावा किया कि करीब 3,000 पुलिसकर्मियों पर हमला किया गया या उनकी हत्या हुई।
आवामी लीग के दमन का लगाया आरोप
पूर्व प्रधानमंत्री ने आरोप लगाया कि आवामी लीग और उसके कार्यकर्ताओं के खिलाफ कार्रवाई अब भी जारी है। उन्होंने दावा किया कि पार्टी के 10 हजार नेता और कार्यकर्ता मारे गए या लापता हो गए हैं।
उन्होंने कहा कि 3,500 मामले दर्ज किए गए हैं, 15 हजार कार्यकर्ताओं पर मुकदमे चल रहे हैं और उनके खिलाफ स्वयं 600 मामले दर्ज किए गए हैं।
बांग्लादेश की मौजूदा स्थिति पर भी जताई चिंता
शेख हसीना ने अपने कार्यकाल और वर्तमान हालात की तुलना करते हुए कहा कि पहले बांग्लादेश की आर्थिक और सामाजिक स्थिति बेहतर थी।
उन्होंने दावा किया कि देश की विकास दर 6.8 प्रतिशत से घटकर 2 प्रतिशत रह गई है। उनके अनुसार, 54 वर्षों में पहली बार औद्योगिक वृद्धि नकारात्मक हुई है।
उन्होंने कहा कि बैंकों में डिफॉल्ट लोन 13 प्रतिशत से बढ़कर 47 प्रतिशत तक पहुंच गया है। निवेश घटा है, बेरोजगारी बढ़ रही है और हर वर्ष करीब दो करोड़ लोग रोजगार के लिए तैयार हो रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कारोबारी या तो जेल में हैं या छिपे हुए हैं, सरकार कर्ज लेकर काम चला रही है और देश में आतंकवाद, दुष्कर्म तथा कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ी है।
उन्होंने कहा कि उनकी सरकार के दौरान बांग्लादेश को एशिया का 'राइजिंग टाइगर' कहा जाता था, लेकिन अब हालात पहले जैसे नहीं रहे।
निर्वासन और हमलों का भी किया जिक्र
शेख हसीना ने कहा कि वह पहले भी कई बार देश से बाहर रहीं और विपक्ष ने हर बार उनकी वापसी में बाधाएं खड़ी कीं।
उन्होंने बताया कि 1975 में उन्होंने अपना परिवार खो दिया था और इसके बाद छह वर्ष निर्वासन में रहीं। उन्होंने दावा किया कि उनके ऊपर 19 बार हत्या के प्रयास हुए, जिनमें अगस्त 2004 का ग्रेनेड हमला भी शामिल है।
उन्होंने कहा कि 1981, 1983, 1985, 1997 और 2007 में भी उन्हें बांग्लादेश लौटने से रोकने की कोशिश की गई, लेकिन वह हर बार वापस लौटीं।
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