'स्ट्रांग रूम पूरी तरह सुरक्षित', वायरल वीडियो पर चुनाव आयोग ने दिया जवाब

चुनाव आयोग (ईसीआई) के अधिकारियों ने सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक वीडियो को लेकर स्थिति स्पष्ट की है। आयोग ने कहा कि कगुड़ीराम अनुशीलन केंद्र में कुल सात एयर-कंडीशंड स्ट्रांग रूम बनाए गए हैं, जहां ईवीएम और मतदान सामग्री पूरी सुरक्षा के साथ रखी गई है।
स्ट्रांग रूम को लेकर क्या कहा आयोग ने
अधिकारियों के मुताबिक, मतदान प्रक्रिया समाप्त होने के बाद सभी स्ट्रांग रूम को उम्मीदवारों, उनके प्रतिनिधियों और सामान्य पर्यवेक्षकों की मौजूदगी में विधिवत रूप से बंद और सील किया गया था। उन्होंने बताया कि अंतिम स्ट्रांग रूम को सुबह लगभग सवा पांच बजे सील किया गया।
आयोग ने स्पष्ट किया कि जहां ईवीएम रखी गई हैं, वे सभी स्ट्रांग रूम पूरी तरह सुरक्षित और सील हैं। परिसर में एक अलग कक्ष में मतपत्रों को सुरक्षित रखा गया है, जिसमें मतदान कर्मियों के दस्तावेज और ईटीबीपीएस (इलेक्ट्रॉनिक ट्रांसमिटेड पोस्टल बैलेट सिस्टम) के माध्यम से प्राप्त मतपत्र शामिल हैं।
सभी पक्षों को दी गई जानकारी
चुनाव आयोग ने बताया कि पूरी प्रक्रिया की जानकारी सभी पर्यवेक्षकों और निर्वाचन अधिकारियों को पहले ही दी जा चुकी थी, जिन्होंने इसे उम्मीदवारों और उनके एजेंटों तक पहुंचाया। इसके अलावा राजनीतिक दलों को ईमेल के माध्यम से भी सूचना भेजी गई थी।
अधिकारियों ने यह भी बताया कि मतपत्रों की छंटाई शाम चार बजे से स्ट्रांग रूम के कॉरिडोर क्षेत्र में की जा रही थी, जबकि मुख्य स्ट्रांग रूम पूरी तरह सुरक्षित और बंद स्थिति में था। पूरी व्यवस्था को विभिन्न राजनीतिक प्रतिनिधियों को भी दिखाया गया था।
क्या था विवाद
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के बाद कोलकाता स्थित नेताजी इंडोर स्टेडियम के बाहर उस समय तनाव की स्थिति बन गई, जब टीएमसी नेता शशि पांजा और कुणाल घोष स्ट्रांग रूम के बाहर धरने पर बैठ गए। इस दौरान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भी मौके पर पहुंचीं। टीएमसी नेताओं ने आरोप लगाया कि उनकी मौजूदगी के बिना स्ट्रांग रूम खोलने की कोशिश की जा रही थी।
धरना खत्म होने के बाद क्या बोले कुणाल घोष
धरना समाप्त होने के बाद टीएमसी नेता कुणाल घोष ने कहा कि आयोग को प्रक्रिया में अधिक पारदर्शिता रखनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि बिना पूर्व सूचना के कुछ गतिविधियां हुईं, जिनका उन्होंने विरोध किया।
उन्होंने कहा कि आगे से पूरी निगरानी और अतिरिक्त सीसीटीवी कैमरों की व्यवस्था पर सहमति बनी है। साथ ही उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका विरोध किसी अवैध कार्य के लिए नहीं था, बल्कि पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए था।
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