लखीमपुर खीरी हिंसा केस में देरी पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, यूपी सरकार से मांगा जवाब

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने लखीमपुर खीरी हिंसा मामले की सुनवाई में हो रही लगातार देरी पर कड़ी नाराजगी जताई है। अदालत ने कहा कि पिछले करीब दो महीनों से किसी भी गवाह की गवाही दर्ज नहीं हो सकी है, जो एक गंभीर स्थिति है। शीर्ष अदालत ने उत्तर प्रदेश सरकार से इस मामले में स्पष्टीकरण मांगा है और ट्रायल कोर्ट को सुनवाई में तेजी लाने के निर्देश दिए हैं।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ इस मामले से जुड़ी याचिका पर सुनवाई कर रही थी। सुनवाई के दौरान अदालत ने राज्य सरकार की ओर से पेश की गई प्रगति रिपोर्ट पर असंतोष व्यक्त किया। अदालत ने कहा कि रिपोर्ट में यह स्पष्ट नहीं किया गया कि गवाह अदालत में पेश क्यों नहीं हो रहे हैं और सुनवाई में बार-बार रुकावट क्यों आ रही है।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इतने संवेदनशील मामले में ट्रायल में देरी न्याय प्रक्रिया को प्रभावित कर सकती है। अदालत ने ट्रायल कोर्ट के न्यायाधीश को निर्देश दिए कि गवाहों की उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए कानून के तहत आवश्यक कदम उठाए जाएं। साथ ही अदालत ने यह भी कहा कि मामले की सुनवाई तय समयसीमा के भीतर पूरी करने का प्रयास किया जाए और अगली प्रगति रिपोर्ट जल्द सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की जाए।
यह मामला 3 अक्टूबर 2021 को उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले के तिकुनिया क्षेत्र में हुई हिंसा से जुड़ा है। उस दिन किसान उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के दौरे का विरोध कर रहे थे। आरोप है कि प्रदर्शन कर रहे किसानों पर एक एसयूवी वाहन चढ़ा दिया गया था, जिससे चार किसानों की मौत हो गई थी।
घटना के बाद इलाके में हिंसा भड़क गई थी। आरोप है कि गुस्साए किसानों ने वाहन चालक और दो भाजपा कार्यकर्ताओं की पीट-पीटकर हत्या कर दी थी। इस हिंसा में एक पत्रकार की भी जान गई थी। पूरे घटनाक्रम में कुल आठ लोगों की मौत हुई थी।
मामले में पूर्व केंद्रीय मंत्री अजय मिश्रा के बेटे आशीष मिश्रा मुख्य आरोपी हैं। जांच पूरी होने के बाद दिसंबर 2023 में ट्रायल कोर्ट ने आशीष मिश्रा समेत 13 आरोपियों के खिलाफ हत्या, आपराधिक साजिश और अन्य गंभीर धाराओं के तहत आरोप तय किए थे। इसके बाद मामले की नियमित सुनवाई शुरू हुई थी, लेकिन अब सुनवाई की धीमी रफ्तार पर सुप्रीम कोर्ट ने चिंता जताई है।
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