हवाई किराए पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, केंद्र सरकार को लगाई फटकार

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को हवाई किराए और अतिरिक्त शुल्कों में अचानक होने वाले उतार-चढ़ाव को नियंत्रित करने से जुड़ी याचिका पर जवाब दाखिल नहीं करने को लेकर केंद्र सरकार पर सख्त नाराजगी जताई।
कोर्ट की सख्त टिप्पणी
जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ इस मामले की सुनवाई कर रही थी। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने केंद्र सरकार से पूछा कि अब तक हलफनामा दाखिल क्यों नहीं किया गया और बार-बार समय क्यों लिया जा रहा है।
कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि सरकार को एक विस्तृत आवेदन के साथ हलफनामा दाखिल करना होगा और देरी के कारण भी बताने होंगे।
सरकार ने मांगा अतिरिक्त समय
सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार के वकील ने कहा कि संबंधित नियमों पर विचार चल रहा है और इसके लिए अतिरिक्त समय की आवश्यकता है। हालांकि कोर्ट ने यह दलील स्वीकार नहीं की और कहा कि मामले में पहले ही कई बार समय दिया जा चुका है।
सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया कि सरकार को एक सप्ताह के भीतर हलफनामा दाखिल करना होगा।
सुप्रीम कोर्ट का निर्देश
कोर्ट ने कहा कि केंद्र सरकार को 8 मई तक हर हाल में जवाब दाखिल करना होगा। इसके साथ ही अदालत ने स्पष्ट किया कि 17 नवंबर को नोटिस जारी होने के बावजूद अब तक जवाब दाखिल न होना गंभीर लापरवाही है।
अगली सुनवाई 11 मई को निर्धारित की गई है।
मामले की पृष्ठभूमि
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि विमानन क्षेत्र में किराए और शुल्कों में पारदर्शिता नहीं है और यात्रियों का शोषण हो रहा है। याचिका में कहा गया कि त्योहारी सीजन में किराए में भारी वृद्धि देखने को मिलती है, जिस पर कोई प्रभावी नियंत्रण नहीं है।
सुप्रीम कोर्ट पहले भी इस मुद्दे पर चिंता जता चुका है और इसे यात्रियों के साथ “शोषण” जैसा व्यवहार बताया था।
याचिका में उठाए गए प्रमुख मुद्दे
याचिका में आरोप लगाया गया है कि निजी एयरलाइंस ने बिना उचित कारण के मुफ्त चेक-इन बैगेज सीमा को कम कर दिया है और अतिरिक्त शुल्क वसूला जा रहा है। साथ ही यह भी कहा गया है कि किराए और चार्ज को नियंत्रित करने के लिए कोई मजबूत नियामक व्यवस्था मौजूद नहीं है, जिससे मनमानी बढ़ रही है।
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