मई में थोक महंगाई ने पकड़ी रफ्तार, 9.68% पर पहुंचा आंकड़ा

मई 2026 में भारत की थोक महंगाई दर में तेज उछाल दर्ज किया गया है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, वॉल्यूम प्राइस इंडेक्स (WPI) आधारित महंगाई बढ़कर 9.68 प्रतिशत पर पहुंच गई, जो बाजार के अनुमान (9.1 प्रतिशत) और अप्रैल के 8.3 प्रतिशत के मुकाबले काफी अधिक है। यह लगातार दूसरे महीने बढ़ती महंगाई का संकेत माना जा रहा है।
महंगाई में इस बढ़ोतरी का मुख्य कारण ईंधन, बिजली और खाद्य वस्तुओं की कीमतों में आई तेजी है, जिसने थोक बाजार पर दबाव बढ़ा दिया है।
ईंधन और बिजली की कीमतों में बड़ा उछाल
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अनुसार, मई में ईंधन और बिजली श्रेणी में थोक महंगाई 30.33 प्रतिशत तक पहुंच गई, जबकि अप्रैल में यह 24.89 प्रतिशत थी। कच्चे पेट्रोलियम की महंगाई 61.51 प्रतिशत दर्ज की गई, जो वैश्विक सप्लाई दबाव और पश्चिम एशिया संकट का असर दर्शाती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव और आपूर्ति बाधाओं के कारण कच्चे तेल की कीमतों पर सीधा असर पड़ा है।
खाद्य और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में भी बढ़ोतरी
खाद्य वस्तुओं की महंगाई अप्रैल के 2.43 प्रतिशत से बढ़कर मई में 3.60 प्रतिशत हो गई। वहीं मैन्युफैक्चर्ड प्रोडक्ट्स की महंगाई भी 6.68 प्रतिशत से बढ़कर 7.48 प्रतिशत तक पहुंच गई।
इसी दौरान खुदरा महंगाई (CPI) भी बढ़कर 3.93 प्रतिशत दर्ज की गई, जो अप्रैल के 3.48 प्रतिशत से अधिक है।
महंगाई बढ़ने के पीछे मुख्य कारण
विश्लेषकों के अनुसार, कच्चे माल, ईंधन, ऊर्जा और औद्योगिक उत्पादों की लागत में बढ़ोतरी ने थोक महंगाई को ऊपर धकेला है। इसका असर आने वाले महीनों में उत्पादन लागत और खुदरा कीमतों पर भी दिख सकता है।
सरकार ने WPI गणना में बदलाव पर दी सफाई
सरकार ने बताया कि नए आधार वर्ष (2022-23) के साथ WPI गणना प्रणाली को अपडेट किया गया है। कुछ वस्तुओं को सूची में शामिल या बाहर किए जाने से सूचकांक में बदलाव देखा गया है। सरकार ने स्पष्ट किया कि आंकड़ों की व्याख्या सावधानी से की जानी चाहिए।
आरबीआई का अनुमान और आगे की स्थिति
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने वित्त वर्ष 2024-25 के लिए महंगाई अनुमान को 4.6 प्रतिशत से बढ़ाकर 5.1 प्रतिशत कर दिया है। पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी से इनपुट कॉस्ट में इजाफा हुआ है, जिसका असर महंगाई पर पड़ा है।
विशेषज्ञों की राय
अर्थशास्त्रियों का कहना है कि भू-राजनीतिक तनाव, तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और खाद्य आपूर्ति में अस्थिरता आने वाले समय में महंगाई पर दबाव बनाए रख सकती है। हालांकि कुछ विशेषज्ञ इसे अभी नियंत्रण में मान रहे हैं, लेकिन जोखिम पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है।
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