AIMPLB ने केंद्र को दी चेतावनी, कहा– वंदे मातरम् आदेश असंवैधानिक, कोर्ट जायेंगे

नई दिल्ली: ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) ने केंद्र सरकार द्वारा राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम के सभी छह छंदों को सरकारी समारोहों में पहले गाने के निर्देश को असंवैधानिक करार दिया है। बोर्ड ने चेतावनी दी है कि यदि यह आदेश तुरंत वापस नहीं लिया गया, तो वह कानूनी कार्रवाई करने के लिए अदालत का दरवाजा खटखटा सकता है।
यह प्रतिक्रिया केंद्रीय गृह मंत्रालय के 28 जनवरी के आदेश के बाद आई है, जिसमें कहा गया था कि राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम और राष्ट्रगान जन गण मन के दौरान वंदे मातरम के सभी छह छंद पहले गाए जाएँ। आदेश में राष्ट्रीय समारोहों जैसे राष्ट्रपति आगमन, तिरंगा फहराने और राज्यपालों के भाषणों के दौरान यह प्रोटोकॉल लागू करने का निर्देश दिया गया था। इन छंदों की कुल अवधि लगभग 3 मिनट 10 सेकंड है।
धार्मिक और कानूनी आधार पर विरोध
AIMPLB के महासचिव मौलाना मोहम्मद फजलुर रहीम मुजद्दिदी ने कहा कि यह निर्णय मुसलमानों के लिए स्वीकार्य नहीं है। उनका तर्क है कि रवींद्रनाथ टैगोर की सलाह और संविधान सभा की बहसों के अनुसार, केवल वंदे मातरम के पहले दो छंद ही सार्वजनिक और आधिकारिक कार्यक्रमों में गाए जाने चाहिए।
मुजद्दिदी ने आगे कहा कि एक धर्मनिरपेक्ष सरकार किसी धर्म की मान्यताओं को जबरन अन्य धर्म के अनुयायियों पर लागू नहीं कर सकती। उन्होंने बताया कि यह गीत बंगाल के सांस्कृतिक संदर्भ में लिखा गया है और इसमें दुर्गा व अन्य देवताओं की पूजा का उल्लेख है, जो मुसलमानों के धार्मिक विश्वासों के खिलाफ है। उन्होंने यह भी कहा कि भारतीय अदालतों ने अन्य छंदों को धर्मनिरपेक्ष मूल्यों के विपरीत माना है और उनके सार्वजनिक गायन पर रोक लगाई गई है।
आदेश तुरंत वापस लेने की मांग
बोर्ड ने केंद्र सरकार से आग्रह किया है कि वह इस निर्देश को तुरंत रद्द करे। AIMPLB का मानना है कि यदि आदेश बरकरार रहता है, तो यह धार्मिक स्वतंत्रता और देश के धर्मनिरपेक्ष सिद्धांतों के खिलाफ होगा।
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