अखिलेश यादव की आयोजकों से अपील, बोले- समाज में वैमनस्य फैलाने वाले कथाकारों को न बुलाएं

HIGHLIGHTS
- सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने विवादित बयान देने वाले कथाकारों को कार्यक्रमों में न बुलाने की अपील की।
- उन्होंने आयोजकों और प्रायोजकों से ऐसे कथावाचकों से दूरी बनाए रखने को कहा।
- अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि कुछ कथाकारों के लिए धन ही उनका धर्म है।
अखिलेश यादव ने बयान जारी कर कहा कि ‘दुष्मुखी’ लोगों के मामले में शासन-प्रशासन के साथ ही उनके कार्यक्रम आयोजित कराने वाले आयोजकों और प्रायोजकों से विनम्र आग्रह है कि वे ऐसे तथाकथित कथाकारों से दूरी बनाए रखें। उन्होंने कहा कि ऐसे एक-दो अन्य कथावाचक भी हैं, जो अपने बोलने और पहनावे से कथावाचक नजर आते हैं, लेकिन कथा और प्रवचन उनके लिए केवल व्यवसाय बनकर रह गए हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि ये लोग समय-समय पर अपनी भौतिक उपलब्धियों का भौंडा प्रदर्शन करते हैं और सस्ती लोकप्रियता हासिल करने के लिए अनर्गल बयान देते रहते हैं। इनके लिए धन ही धर्म है।
आयोजकों को जनता के आक्रोश का करना पड़ सकता है सामना
सपा अध्यक्ष ने कहा कि आयोजकों और प्रायोजकों को इस बात पर विचार करना चाहिए कि ऐसे लोग कुछ भी कहकर राजनीतिक संरक्षण के सहारे बच निकलेंगे, लेकिन कार्यक्रम आयोजित कराने वालों को उसी शहर में जनता के बीच रहना है। इनके गलत बयानों से पैदा होने वाली सामाजिक वैमनस्यता का सामना आयोजकों और प्रायोजकों को ही करना पड़ेगा।
उन्होंने कहा कि जब ऐसे कथाकार जनता के सामने नहीं होंगे तो लोग उन्हें आमंत्रित करने वाले आयोजकों को ही अपने गुस्से का निशाना बना सकते हैं। आस्थावान लोगों को लग सकता है कि भगवान के बारे में अपशब्द और गलत विचार व्यक्त करने वाले कथाकारों के विचारों से आयोजक और प्रायोजक भी सहमत हैं। ऐसे में स्थानीय स्तर पर श्रद्धालु और आस्थावान लोग आयोजकों के विरोध में खड़े हो सकते हैं।
राजनीतिक और सामाजिक नुकसान की दी चेतावनी
अखिलेश यादव ने कहा कि जो लोग ऐसे कथाकारों को बुलाकर स्थानीय स्तर पर अपना प्रभाव जमाना चाहते हैं, उन्हें सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। जनता की नजर में उनकी छवि धर्म और भगवान विरोधी बन सकती है। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजकों को लेने के देने पड़ जाएंगे और उनकी पूरी राजनीति प्रभावित हो सकती है।
उन्होंने आयोजकों और प्रायोजकों से दोबारा आग्रह किया कि समाज और सनातन के बीच खाई पैदा करने वाले लोगों को बढ़ावा न दें। ऐसे लोगों को मंच और समर्थन देकर उनकी गतिविधियों को आगे न बढ़ाएं और न ही ईशनिंदा में भागीदार बनें। उन्होंने चेतावनी दी कि ऐसे कथाकारों के मौखिक पापों की सजा आयोजकों और प्रायोजकों को भी भुगतनी पड़ सकती है।
सच्चे विचारकों और वक्ताओं को आमंत्रित करने की अपील
सपा अध्यक्ष ने कहा कि देश में ऐसे अनेक सच्चे विचारक और वक्ता मौजूद हैं, जिनके पास वैदिक और औपनिषदिक ज्ञान की गहरी समझ है। वे महाकाव्यों के संदेशों की ऊंचाइयों को भी समझते हैं।
उन्होंने आयोजकों और प्रायोजकों से ऐसे सहृदय, अच्छे वक्ताओं और विद्वानों को कार्यक्रमों में आमंत्रित करने की अपील की। अखिलेश यादव के मुताबिक, ऐसे लोगों को मंच देकर मानवीय जीवन को बेहतर बनाने की दिशा में सकारात्मक योगदान दिया जा सकता है।
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