होर्मुज संकट में कांग्रेस नेता आनंद शर्मा ने सरकार की कूटनीति का खुलकर समर्थन किया

होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ते तनाव के बीच कांग्रेस के भीतर एक और बयान सामने आया है, जिसने पार्टी की राजनीतिक दिशा पर नई बहस छेड़ दी है। शशि थरूर और मनीष तिवारी के बाद अब वरिष्ठ कांग्रेस नेता आनंद शर्मा ने भारत सरकार की कूटनीतिक नीति का खुलकर समर्थन किया।
शर्मा ने कहा कि इस संकट के समय भारतीय राजनयिक, दूतावास और अधिकारी मेहनत से काम कर रहे हैं और उनकी कोशिशों को राजनीतिक नजर से नहीं देखना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि ऐसे संवेदनशील मुद्दों पर दलगत राजनीति करना देशहित के खिलाफ होगा।
भारत का संतुलित और सुरक्षित रुख
आनंद शर्मा ने कहा कि भारत ने होर्मुज संकट को संतुलित और समझदारी से संभाला है। उनके अनुसार भारत उन गिने-चुने देशों में शामिल है, जहां सबसे अधिक जहाज सुरक्षित निकल पाए हैं या भारत की ओर मोड़ दिए गए हैं। उन्होंने यह भी बताया कि अब तक भारतीय प्रवासी पूरी तरह सुरक्षित हैं। शर्मा ने जोर देकर कहा कि इस समय देश के भीतर राष्ट्रीय सहमति और एकजुटता बहुत जरूरी है।
सरकार की कूटनीति की सराहना
शर्मा ने कहा कि भारत के राजनयिक तिरंगे को ऊंचा रखकर देश की सेवा कर रहे हैं और उनका हौसला बढ़ाया जाना चाहिए। उन्होंने बताया कि भारत न किसी पक्ष के दबाव में है और न ही किसी के प्रभाव में। यही वजह है कि देश अब तक अपने लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित कर पाया है।
पार्टी लाइन और अलग राय
कांग्रेस के भीतर इस बयान को लेकर सवाल उठे कि क्या आनंद शर्मा का रुख पार्टी लाइन से अलग है। शर्मा ने कहा कि किसी एक व्यक्ति के बयान को पूरी पार्टी की राय नहीं माना जा सकता। उन्होंने सुझाव दिया कि कांग्रेस वर्किंग कमेटी की बैठक में इस पर चर्चा कर आधिकारिक रुख तय किया जाए। उनके बयान से स्पष्ट हुआ कि विदेश नीति और होर्मुज जैसे अंतरराष्ट्रीय मामलों पर पार्टी के भीतर अलग सोच मौजूद है।
सरकार और विपक्ष के बीच संवाद जरूरी
आनंद शर्मा ने कहा कि सरकार ने ऑल पार्टी मीटिंग की है, लेकिन इसे मजबूत बनाना चाहिए। उनका मानना है कि राष्ट्रीय हित में सरकार और विपक्ष के बीच भरोसे का माहौल जरूरी है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि विदेशों में भारतीय अधिकारियों के पास ज्यादा जानकारी होती है और उन्हें इस संकट में फैसले लेने की जिम्मेदारी निभानी चाहिए।
प्राथमिकता सिर्फ नागरिकों की सुरक्षा
शर्मा ने कहा कि होर्मुज संकट में भारत की सबसे बड़ी प्राथमिकता अपने नागरिकों, प्रवासियों और समुद्री हितों की सुरक्षा है। उन्होंने जोर दिया कि भारत का संतुलित रुख इसलिए जरूरी है, क्योंकि उसे किसी खेमे में खड़े होने की बजाय राष्ट्रीय हित को ध्यान में रखना है। आनंद शर्मा का यह बयान यह भी दिखाता है कि कांग्रेस के भीतर ऐसे नेता मौजूद हैं जो विदेश नीति में सरकार के सकारात्मक कदमों को स्वीकार करने में पीछे नहीं हैं।
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