'संविधान हाथ में लेकर घूमने से कुछ नहीं होता, आचरण भी संवैधानिक होना चाहिए', अमित शाह का राहुल गांधी पर हमला

HIGHLIGHTS
- केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने छत्तीसगढ़ राज्योत्सव के अलंकरण समारोह में कांग्रेस और राहुल गांधी पर निशाना साधा।
- शाह ने आरोप लगाया कि कांग्रेस और विपक्षी दल माओवादियों का समर्थन करते रहे हैं।
- उन्होंने दावा किया कि 90 प्रतिशत माओवादी मुख्यधारा में लौटे, जबकि 10 प्रतिशत मारे गए।
रायपुर। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मंगलवार को नवा रायपुर में आयोजित छत्तीसगढ़ राज्योत्सव के अलंकरण समारोह में कांग्रेस और राहुल गांधी पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस और विपक्षी दल संविधान विरोधी गतिविधियों तथा माओवादियों का समर्थन करते रहे हैं।
शाह ने कहा कि राहुल गांधी संसद में माओवाद का समर्थन करते रहे हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि गैर-संवैधानिक सरकारों का समर्थन करने वाले लोगों ने नकली संसद बनाकर देश की संसद का मजाक उड़ाया।
केंद्रीय गृह मंत्री ने वर्ष 2010 में पी. चिदंबरम के उस बयान का जिक्र किया, जिसमें उन्होंने माओवादियों से हथियार डालने की अपेक्षा करने के बजाय बातचीत करने की बात कही थी। शाह ने कहा कि उनकी सरकार ने माओवादियों से हथियार छोड़कर आत्मसमर्पण करने की अपील की और उन्हें मुख्यधारा में शामिल करने का भरोसा दिया।
शाह के मुताबिक, केवल 10 प्रतिशत माओवादी मारे गए, जबकि 90 प्रतिशत मुख्यधारा में लौटे और देश माओवादी हिंसा से मुक्त हुआ।
मानवाधिकार के मुद्दे पर भी रखी बात
मानवाधिकार के सवाल पर शाह ने कहा कि बंदूक के दम पर विकास को रोकना मानवाधिकार नहीं है। गरीब आदिवासियों के अधिकारों की चिंता करना भी जरूरी है। उन्होंने कहा कि जहां सांस्कृतिक गलियारा बनना चाहिए था, वहां रेड कॉरिडोर तैयार हो गया। जंगलों में बारूदी सुरंगें बिछाई गईं, बच्चों को स्कूलों से अगवा कर उनके हाथों में बंदूकें थमाई गईं। इसके अलावा स्कूलों और सड़कों को भी विस्फोट से उड़ाया गया।
एसआईआर पर विपक्ष को बहस की चुनौती
एसआईआर के मुद्दे पर चर्चा के लिए विशेष सत्र बुलाने की बात करते हुए अमित शाह ने राहुल गांधी को संसद में बहस करने की चुनौती दी। उन्होंने कहा कि केवल संविधान हाथ में लेकर घूमने से उसके प्रति समर्थन साबित नहीं होता, बल्कि व्यक्ति के आचरण में भी संवैधानिक मूल्यों का पालन दिखना चाहिए।
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