आजम खां के परिवार तक पहुंचेगी ईडी की जांच? जौहर ट्रस्ट के सदस्यों पर बढ़ा शिकंजा

मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में सपा नेता आजम खां की गिरफ्तारी के बाद प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने अब जौहर ट्रस्ट से जुड़े अन्य सदस्यों की जानकारी जुटानी शुरू कर दी है। इस ट्रस्ट में आजम खां की पत्नी, दोनों बेटे और बहन भी शामिल रहे हैं। ऐसे में जांच का दायरा बढ़ने के साथ आजम परिवार की मुश्किलें भी बढ़ सकती हैं।
ईडी ने 13 अक्तूबर को अजीमनगर थाने में दर्ज कराई गई प्राथमिकी में जौहर ट्रस्ट को भी शामिल किया है। इसी ट्रस्ट के माध्यम से विश्वविद्यालय का निर्माण कराया गया था। आरोप है कि निजी विश्वविद्यालय के निर्माण में सरकारी धन का इस्तेमाल करने से लेकर फर्जी फर्मों के जरिये चंदा जुटाने तक का काम ट्रस्ट के माध्यम से हुआ। ऐसे में ट्रस्ट से जुड़े सभी सदस्यों पर कार्रवाई की आशंका बनी हुई है।
आजम खां ने वर्ष 1990 में मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट की स्थापना की थी। वह इसके संस्थापक अध्यक्ष बने थे। उनकी पत्नी तजीन फातिमा को सचिव, बहन निकहत अफलाक को कोषाध्यक्ष और दोनों बेटों अदीब व अब्दुल्ला को सदस्य बनाया गया था। इसके अलावा मुश्ताक अहमद सिद्दीकी को उपाध्यक्ष, चमरौवा के सपा विधायक नसीर अहमद खां को संयुक्त सचिव और सलीम कासिम को सदस्य की जिम्मेदारी दी गई थी।
ट्रस्ट में कुल नौ सदस्य थे, जिनमें पांच आजम खां के परिवार से संबंधित थे। ईडी का आरोप है कि बाकी चार सदस्यों को केवल नाम के लिए ट्रस्ट में शामिल किया गया था। आजम खां और उनके बेटे अब्दुल्ला कई मामलों में आरोपी बनाए जा चुके हैं। फिलहाल दोनों जमानत पर जेल से बाहर हैं। आजम परिवार में बड़े बेटे अदीब और बहन निकहत अफलाक ऐसे सदस्य हैं, जिन्हें अब तक किसी मामले में दोषी नहीं ठहराया गया है।
सजा के बाद ट्रस्ट की कार्यकारिणी में हुआ बदलाव
दो जन्म प्रमाणपत्र मामले में सजा मिलने के बाद आजम खां ने जौहर ट्रस्ट से अपना, पत्नी तजीन फातिमा और छोटे बेटे का नाम हटा दिया था। इसके बाद गठित नई कार्यकारिणी में उनकी बहन निकहत अफलाक को अध्यक्ष और बड़े बेटे अदीब को सचिव बनाया गया। इनके अलावा मुश्ताक अहमद सिद्दीकी, नसीर अहमद खां, जावेद उर रहमान खान, मुमताज बी और शहरेयार सलीम को भी कार्यकारिणी में शामिल किया गया।
सरकारी धन के दुरुपयोग के आरोप में दर्ज है प्राथमिकी
ईडी की ओर से दर्ज कराई गई प्राथमिकी में विश्वविद्यालय निर्माण के दौरान सरकारी धन के दुरुपयोग, कमीशनखोरी और बिना हिसाब के 400 करोड़ रुपये खर्च किए जाने के आरोप लगाए गए हैं। इन आरोपों से जुड़े दस्तावेजी साक्ष्य भी मौजूद होने की बात कही गई है। ऐसे में जौहर ट्रस्ट से जुड़े रहे आजम खां के बड़े बेटे अदीब, पत्नी तजीन फातिमा और बहन निकहत अफलाक पर भी कार्रवाई की आशंका जताई जा रही है। इस मामले में अजीमनगर थाने की पुलिस के साथ ईडी भी कार्रवाई कर सकती है।
विधायक समेत ट्रस्ट के कई सदस्यों से हो चुकी है पूछताछ
इस मामले की जांच के दौरान ईडी जौहर ट्रस्ट के सदस्य और चमरौवा से सपा विधायक नसीर अहमद खां से पूछताछ कर चुकी है। वहीं, ट्रस्ट के कुछ अन्य सदस्यों ने पूछताछ के दौरान आरोप लगाया था कि उन्हें ट्रस्ट की बैठकों में शामिल नहीं किया जाता था।
किसानों की जमीन पर कब्जे के आरोपों से शुरू हुई थी ईडी की जांच
जौहर विश्वविद्यालय के निर्माण के लिए किसानों की जमीन पर कथित कब्जे का मामला भी ईडी की जांच का प्रमुख हिस्सा रहा है। एजेंसी की ओर से जारी प्रेस वक्तव्य के अनुसार, जुलाई 2019 में रामपुर के अजीमनगर थाने में दर्ज 26 प्राथमिकी के आधार पर मनी लॉन्ड्रिंग की जांच शुरू की गई थी।
इन मामलों में आरोप लगाया गया था कि विश्वविद्यालय के निर्माण के लिए सिंगनखेड़ा गांव के किसानों की कृषि भूमि पर जबरन कब्जा किया गया। ईडी के मुताबिक, किसानों के साथ मारपीट करने, उन्हें गैरकानूनी तरीके से बंधक बनाने और धमकाकर जमीन के बैनामे कराने के आरोप भी लगाए गए थे।
जांच के दौरान एजेंसी को यह भी पता चला कि सार्वजनिक निर्माण कार्यों के लिए आवंटित धनराशि और निर्माण सामग्री का इस्तेमाल विश्वविद्यालय में किया गया। इसके अलावा सरकारी कार्यों को विश्वविद्यालय के निजी परिसर में कराए जाने की बात भी सामने आई।
आरोप है कि सरकारी ठेके हासिल करने वाले ठेकेदारों से धन लेकर उसे जौहर ट्रस्ट को चंदे के रूप में वापस कराया गया। इसके साथ ही 13 अक्तूबर 2026 को अजीमनगर थाने में दर्ज एक अन्य प्राथमिकी और रामपुर में लूट, वसूली, धोखाधड़ी तथा जालसाजी से जुड़े 28 अन्य मुकदमों को भी जांच के दायरे में शामिल किया गया है।
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