बिहार में असिस्टेंट प्रोफेसर अभ्यर्थियों का लोकभवन मार्च, पुलिस से झड़प के बाद बैरिकेडिंग तोड़ी
By Hitesh — August 22, 2026

HIGHLIGHTS
- अभ्यर्थी पिछले 19 दिनों से अनिश्चितकालीन आमरण अनशन पर हैं।
- लोकभवन मार्च को देखते हुए पुलिस ने कई जगह बैरिकेडिंग की थी।
- बेली रोड पर प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़प हुई।
Author: — Dainik Dehat
‘ऑल Ph.D. होल्डर एंड रिसर्च स्कॉलर एसोसिएशन ऑफ बिहार’ के बैनर तले अभ्यर्थियों का अनिश्चितकालीन आमरण अनशन शनिवार को 19वें दिन भी जारी रहा। अभ्यर्थियों ने शनिवार को लोकभवन मार्च का ऐलान किया था। इसे देखते हुए पुलिस ने उन्हें रोकने के लिए जगह-जगह बैरिकेडिंग की थी। पुलिस की इस व्यवस्था के बीच बेली रोड पर अभ्यर्थियों और पुलिस के बीच झड़प हो गई। प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेडिंग तोड़ दी।
सैकड़ों अभ्यर्थी गर्दनीबाग से लोकभवन की ओर बढ़ रहे हैं। इस दौरान असिस्टेंट प्रोफेसर अभ्यर्थी सरकार के खिलाफ नारेबाजी कर रहे हैं। आंदोलन का नेतृत्व कर रहे डॉ. कुंदन कुमार ने कहा कि ‘ऑल Ph.D. होल्डर एंड रिसर्च स्कॉलर एसोसिएशन ऑफ बिहार’ के बैनर तले अभ्यर्थी पिछले 19 दिनों से आमरण अनशन पर बैठे हैं। उन्होंने बताया कि तीन में से दो शोधार्थियों की तबीयत बिगड़ गई है और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है। उनका कहना है कि इसके बावजूद सरकार उनकी चिंता नहीं कर रही है।
नई नियमावली को लेकर अभ्यर्थियों का विरोध
‘ऑल Ph.D. होल्डर एंड रिसर्च स्कॉलर एसोसिएशन ऑफ बिहार’ के डॉ. कुंदन कुमार ने कहा कि अभ्यर्थी बिहार सरकार की नई सहायक प्राध्यापक नियुक्ति नियमावली 2026 का विरोध कर रहे हैं। उनके अनुसार, नई नियमावली बिहार के छात्रों और शोधार्थियों के हित में नहीं है और इससे उच्च शिक्षा व्यवस्था प्रभावित होगी।
अभ्यर्थियों का कहना है कि बिहार के विश्वविद्यालयों में करीब 30 वर्षों के दौरान केवल तीन बार सहायक प्राध्यापकों की बहाली हुई है। ऐसे में स्थायी नियुक्ति के बजाय दोबारा संविदा आधारित नियुक्ति का प्रावधान उचित नहीं है। उन्होंने UGC के टेबल 3A के आधार पर स्थायी शिक्षकों की नियुक्ति की मांग की।
अभ्यर्थियों ने कहा कि नई नियमावली में अधिकतम उम्र सीमा 55 वर्ष से घटाकर 40 वर्ष कर दी गई है। इससे लंबे समय से अतिथि शिक्षक के तौर पर काम कर रहे अभ्यर्थियों के सामने अवसर खत्म होने का खतरा है। उन्होंने उम्र सीमा 55 वर्ष रखने की मांग की।
इसके अलावा, रिसर्च पब्लिकेशन के अंक हटाए जाने पर भी अभ्यर्थियों ने आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि पिछली बहाली में UGC टेबल 3A के तहत रिसर्च पब्लिकेशन के लिए 10 अंक निर्धारित थे। संगठन ने नियमावली में संशोधन कर बिहार के अभ्यर्थियों के हितों की रक्षा करने की मांग की है।
सांसद पप्पू यादव ने दिया समर्थन
सांसद पप्पू यादव ने असिस्टेंट प्रोफेसर अभ्यर्थियों के आंदोलन को समर्थन दिया है। उन्होंने कहा कि वह एक बार फिर All Ph.D. Holders & Research Scholars Association of Bihar की ओर से मुख्यालय, गर्दनीबाग, पटना में आयोजित अनिश्चितकालीन आमरण अनशन सह महाधरना में शामिल हुए और शोधार्थियों की न्यायोचित मांगों का समर्थन किया।
उन्होंने कहा कि शोधार्थी शिक्षा और ज्ञान की रीढ़ हैं। उनके सम्मान, अधिकार, रोजगार और भविष्य से जुड़े सवालों को संघर्ष या विरोध के रूप में देखने के बजाय सरकार को संवेदनशीलता के साथ उनकी समस्याएं सुननी चाहिए और तत्काल बातचीत कर समाधान का रास्ता निकालना चाहिए।
पप्पू यादव ने कहा कि शोधार्थियों की आवाज को दबाने के बजाय उसे सुनना और सम्मान देना सरकार की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि उनके अधिकार और न्याय की लड़ाई में वह मजबूती से उनके साथ खड़े हैं और शिक्षा, शोध तथा शोधार्थियों के सम्मान के लिए यह संघर्ष जारी रहेगा।
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