मालदा में बवाल पर भाजपा आक्रामक: सुप्रीम कोर्ट की फटकार के बाद ममता सरकार को घेरा

पश्चिम बंगाल से एक गंभीर खबर सामने आई है, जिसने देश की न्यायपालिका और कानून-व्यवस्था पर चर्चा छेड़ दी है। मालदा जिले में सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर मतदाता सूची सुधार के लिए काम कर रहे सात न्यायिक अधिकारियों को उग्र भीड़ ने करीब 9 घंटे तक बंधक बना रखा। इस दौरान तीन महिलाएं भी शामिल थीं।
राजनीतिक प्रतिक्रिया तेज
भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता गौरव भाटिया ने ममता बनर्जी सरकार पर हमला बोला और कहा कि स्वतंत्र भारत के इतिहास में शायद ही कभी ऐसा हुआ हो कि सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के बाद कानूनी प्रक्रिया को इस तरह रोका जाए।
भाजपा नेता स्मृति ईरानी ने कहा कि पश्चिम बंगाल में भ्रष्टाचार और हिंसा टीएमसी के पर्याय बन गए हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि महिलाओं की सुरक्षा और कानून व्यवस्था के लिए भाजपा की सरकार बनना आवश्यक है।
सांसद रवि किशन ने भी कहा कि पिछले चुनावों में भाजपा कार्यकर्ताओं को पर्याप्त सुरक्षा नहीं मिली और सैकड़ों की हत्याएं हुई हैं।
घटना का विवरण
सुप्रीम कोर्ट ने राज्य में 'स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन' (एसआईआर) के तहत वोटर लिस्ट की जांच और सुधार का आदेश दिया था। न्यायिक अधिकारियों ने 1 अप्रैल को मालदा जिले के कालियाचक-II ब्लॉक में काम शुरू किया।
दोपहर 2-3 बजे के बीच भीड़ ने दफ्तर घेर लिया और अधिकारियों को बंधक बना लिया। उन्हें पानी और खाना तक नहीं दिया गया। उपद्रवियों ने नेशनल हाईवे-12 भी जाम कर दिया। रात करीब 1 बजे भारी पुलिस बलों ने अधिकारियों को सुरक्षित निकाला। इस दौरान अधिकारियों की गाड़ियों पर पथराव की भी खबरें आईं।
सुप्रीम कोर्ट का कड़ा रुख
शीर्ष अदालत ने इस घटना को न्यायिक अधिकारियों को डराने और अदालती प्रक्रिया को रोकने का सोच-समझा प्रयास बताया। कोर्ट ने राज्य के मुख्य सचिव और डीजीपी को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। साथ ही जांच सीबीआई या एनआईए को सौंपने की बात कही गई है।
ममता सरकार और भाजपा आमने-सामने
इस घटना ने बंगाल की राजनीति में भूचाल ला दिया। बीजेपी आरोप लगाती है कि ममता सरकार में ‘जंगलराज’ है और कोर्ट के आदेशों की अनदेखी हो रही है। वहीं टीएमसी का कहना है कि मतदाता सूची से जानबूझकर विशेष वर्ग के लोगों के नाम हटाए जा रहे हैं।
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