किन्नर समाज में बदलती परंपराएं: पंचायतों में ‘राम-राम’, 10 हजार ने छोड़ी इस्लामी रीति

किन्नर अखाड़े की महामंडलेश्वर कल्याणीनंद गिरि का कहना है कि किन्नर समाज में बीते कुछ वर्षों के दौरान धार्मिक और सामाजिक स्तर पर उल्लेखनीय बदलाव सामने आए हैं। उनके अनुसार, पहले किन्नर समाज की कई परंपराओं और व्यवस्थाओं पर इस्लामी प्रभाव देखा जाता था, लेकिन किन्नर अखाड़े के अस्तित्व में आने के बाद धीरे-धीरे इसमें परिवर्तन शुरू हुआ है।
अब किन्नर सम्मेलनों, बैठकों और पंचायतों में अभिवादन के तौर पर ‘सलाम’ की जगह ‘राम-राम’ का प्रयोग किया जाने लगा है। महामंडलेश्वर कल्याणीनंद गिरि ने बताया कि आचार्य महामंडलेश्वर लक्ष्मीनारायण त्रिपाठी के मार्गदर्शन में महाकुंभ-2025 के बाद देश के विभिन्न हिस्सों में ऐसे किन्नरों को सनातन परंपरा से जोड़ा गया है, जो पहले स्वयं को अल्पसंख्यक समुदाय से जोड़ने लगे थे।
उनका दावा है कि अब तक करीब 10 हजार किन्नर इस्लामी रीति-रिवाजों को छोड़कर हिंदू धर्म अपना चुके हैं। उन्होंने अपने व्यक्तिगत जीवन का उल्लेख करते हुए बताया कि प्रयागराज के कटरा इलाके में एक हिंदू परिवार में जन्म होने के बावजूद आजीविका के लिए दिल्ली जाने पर वर्ष 2011 में उन्हें मुस्लिम परंपराओं का पालन करना पड़ा। बाद में वर्ष 2020 के हरिद्वार कुंभ में लक्ष्मीनारायण त्रिपाठी से संपर्क के बाद किन्नर अखाड़े से जुड़ने का अवसर मिला, जिसने धर्म, शिक्षा, संस्कृति और सामाजिक एकता की दिशा में कार्य शुरू किया।
अब बदली अभिवादन की परंपरा
महामंडलेश्वर ने बताया कि पहले किन्नर समाज के आयोजनों में सलाम की परंपरा प्रचलित थी, लेकिन अब राम-राम कहा जाने लगा है। उन्होंने कहा कि पहले कई किन्नर बधाई जैसे सामाजिक कार्यों से भी दूरी बनाए रखते थे, जबकि अब छठ पूजा जैसी हिंदू परंपराओं का पालन भी करने लगे हैं। गुजरात, महाराष्ट्र, ओडिशा, झारखंड, बिहार, केरल, राजस्थान और मध्य प्रदेश समेत कई राज्यों में किन्नर समाज के लोग सनातन परंपराओं से जुड़ रहे हैं।
उन्होंने यह भी बताया कि बड़ी संख्या में किन्नर अब रुद्राक्ष की माला धारण कर रहे हैं, तिलक लगाकर धार्मिक आयोजनों में भाग ले रहे हैं। वैष्णो देवी दर्शन के दौरान भी कई किन्नरों ने उनसे संपर्क कर माघ मेले में आने और सनातन धर्म अपनाने की इच्छा जताई।
किन्नरों के शोषण का मुद्दा भी उठाया
महामंडलेश्वर कल्याणीनंद गिरि ने किन्नर समाज के साथ होने वाले सामाजिक और शारीरिक शोषण पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि कई बार शादी का झांसा देकर किन्नरों को ठगा जाता है। उनके अनुसार, ईश्वर ने किन्नर समाज को नृत्य और शृंगार की विशेष कला प्रदान की है, जिसके माध्यम से वे अपनी आजीविका चलाते हैं।
उन्होंने दावा किया कि देश में किन्नर समाज की संख्या कई अन्य समुदायों से भी अधिक है। महामंडलेश्वर ने कहा कि किन्नर अखाड़ा आने वाली पीढ़ियों के लिए सनातन मूल्यों की रक्षा और किन्नर समाज को सम्मानजनक पहचान दिलाने के उद्देश्य से लगातार काम कर रहा है।
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