श्रीराम जन्मभूमि मंदिर का निर्माण पूर्ण, अब तक 1700 करोड़ रुपये खर्च

अयोध्या। श्रीराम जन्मभूमि पर बने भव्य राम मंदिर का निर्माण कार्य अब पूर्ण हो चुका है। 25 नवंबर को मंदिर के शिखर पर ध्वजारोहण के साथ ही मंदिर की संरचना पूरी होने की घोषणा कर दी गई। हालांकि, अभी भी परिसर में कुछ अन्य प्रकल्पों का निर्माण जारी है। राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सूत्रों के अनुसार, निर्माण कार्य में सबसे अधिक व्यय वर्ष 2024 और 2025 के दौरान हुआ, जब मंदिर का मुख्य ढांचा, गर्भगृह, शिखर और मंडप जैसे प्रमुख हिस्से तेजी से पूरे किए गए।
निर्माण का इतिहास और चरण
राम मंदिर निर्माण का मार्ग 9 नवंबर 2019 को सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के बाद प्रशस्त हुआ। फरवरी 2020 में राम मंदिर ट्रस्ट का गठन किया गया और 5 अगस्त 2020 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंदिर के लिए भूमिपूजन किया। निर्माण के दौरान कई चुनौतियों के बावजूद कार्य लगातार चलता रहा। 22 जनवरी 2024 को रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के साथ मंदिर श्रद्धालुओं के लिए खोला गया।
मंदिर की शिल्पकला पारंपरिक नागर शैली के साथ आधुनिक तकनीक का उत्कृष्ट मिश्रण है। निर्माण में देशभर के कारीगरों, शिल्पियों और इंजीनियरों ने योगदान दिया।
निर्माण पर खर्च
ट्रस्ट के अनुसार, मंदिर निर्माण पर अब तक कुल लगभग 1700 करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं। वर्षवार खर्च इस प्रकार रहा:
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2020-21: 17.93 करोड़
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2021-22: 165.77 करोड़
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2022-23: 330.01 करोड़
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2023-24: 540.38 करोड़
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2024-25: 455.07 करोड़
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अप्रैल से नवंबर 2025 तक: 186 करोड़
इस राशि में निर्माण सामग्री, शिल्प कार्य, संरचनात्मक सुरक्षा, परिसर विकास और तकनीकी व्यवस्थाएं शामिल हैं।
मंदिर की विशेषताएं
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लंबाई: 308 फीट, चौड़ाई: 250 फीट, ऊंचाई: 161 फीट
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तीन तल, प्रत्येक की ऊंचाई 20 फीट
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कुल 392 स्तंभ और 44 द्वार
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पांच मंडप: नृत्य मंडप, रंग मंडप, सभा मंडप, प्रार्थना मंडप और कीर्तन मंडप
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स्तंभों और दीवारों में देवी-देवता तथा वीरांगनाओं की मूर्तियां
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दिव्यांगजन और वृद्धों के लिए रैंप और लिफ्ट की सुविधा
राम मंदिर के पूर्ण होने के साथ ही अयोध्या में श्रद्धालुओं की संख्या में लगातार वृद्धि देखी जा रही है। यह धार्मिक और सांस्कृतिक केंद्र के रूप में नई पहचान स्थापित कर रहा है।
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