पहले ‘जय श्रीराम’ बोलने पर लाठी पड़ती थी, अब ‘जी राम जी’ योजना: सीएम योगी

अयोध्या में साल का आखिरी दिन राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा की दूसरी वर्षगांठ के उत्सव के रूप में मनाया जा रहा है। इस अवसर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी अयोध्या पहुंचे और उन्होंने राम मंदिर आंदोलन की याद दिलाते हुए विपक्ष पर तीखा हमला किया।
जनसभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि अयोध्या का नाम ही शांति और साहस का प्रतीक है और यहां कभी किसी दुश्मन ने टिककर नहीं मुकाबला किया। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोगों ने अपने निजी स्वार्थ, धार्मिक जुनून और सत्ता के तुष्टिकरण की वजह से अयोध्या को संघर्ष और उपद्रव का केंद्र बना दिया।
सीएम योगी ने पिछली सरकारों पर भी निशाना साधा और कहा कि उन्होंने अयोध्या को लहूलुहान किया। उन्होंने याद दिलाया कि जिस अयोध्या में कभी कोई लड़ाई नहीं होती थी, वहां उनके शासन में आतंकवाद और हिंसा जैसी घटनाएं होती थीं। उन्होंने यह भी कहा कि जहां प्रभु राम और बजरंगबली की रक्षा है, वहां किसी की कोई चुनौती कामयाब नहीं हो सकती।
राम मंदिर के निर्माण और अयोध्या के विकास का जिक्र करते हुए योगी आदित्यनाथ ने कहा कि पिछले पांच सालों में अयोध्या में 45 करोड़ से अधिक श्रद्धालु आए हैं, जबकि इससे पहले ये संख्या केवल लाखों में थी। उन्होंने कहा कि 2017 से पहले अयोध्या में न तो पर्याप्त सफाई थी, न बिजली, न कनेक्टिविटी और न ही सुरक्षा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पहले किसी को ‘जय श्रीराम’ बोलने पर तकलीफ़ उठानी पड़ती थी और गिरफ्तारियां होती थीं, लेकिन अब यह कोई विवाद का विषय नहीं है। उन्होंने हाल ही में संसद से पास हुए ‘जी राम जी’ बिल का जिक्र करते हुए कहा कि इस योजना से रोजगार के बड़े अवसर खुलेंगे।
इतिहास की झलक देते हुए सीएम ने कहा कि हमारी पीढ़ी सौभाग्यशाली है जिसने रामलला का भव्य मंदिर देखा। उन्होंने 1528 से सुप्रीम कोर्ट के फैसले तक के संघर्ष का स्मरण कराया और कहा कि रामभक्तों ने कभी झुकाव नहीं दिखाया, सत्ता के दमन या गोलियों-लाठियों की परवाह नहीं की। यही संघर्ष आज भव्य राम मंदिर के रूप में परिणित हुआ।
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