FCRA Bill पर सुप्रिया सुले ने उठाए सवाल, बोलीं- जल्दबाजी में न लें फैसला

HIGHLIGHTS
- सुप्रिया सुले ने विदेशी चंदे से जुड़े प्रस्तावित नियमों पर सरकार से जल्दबाजी न करने को कहा।
- उन्होंने शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक कार्यों के लिए मिलने वाली वैध विदेशी सहायता का समर्थन किया।
- लोकसभा ने विधेयक को 31 सदस्यीय संयुक्त समिति के पास भेजा है।
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) की लोकसभा सांसद सुप्रिया सुले ने शुक्रवार को विदेशी चंदे के प्रस्तावित नियमों को लेकर सरकार पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक संगठनों के लिए मिलने वाली वैध विदेशी सहायता में बाधा नहीं आनी चाहिए। सुले ने विदेशी अंशदान विनियमन संशोधन विधेयक, 2026 पर जल्दबाजी न करने और सभी राजनीतिक दलों को विश्वास में लेने की मांग की।
क्या वैध विदेशी मदद को भी शक की नजर से देखा जाएगा?
सुप्रिया सुले ने कहा कि यदि विदेशी पैसा अवैध है या ‘गंदा धन’ है तो सरकार को उस पर सख्त कार्रवाई करनी चाहिए। हालांकि, पोलियो टीकाकरण, स्वास्थ्य सेवाओं और शिक्षा के लिए मिलने वाली वैध सहायता पर संदेह नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने गरीब और कामकाजी परिवारों के कल्याण के लिए मिलने वाली सहायता को भी इसी दायरे में रखा।
विरोध के बीच लोकसभा ने विधेयक को 31 सदस्यीय संयुक्त समिति के पास भेज दिया है। विपक्षी दलों का आरोप है कि विधेयक अल्पसंख्यकों और गैर सरकारी संगठनों को निशाना बनाता है और उन्होंने इसे वापस लेने की मांग की है। वहीं, सरकार ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि विधेयक का उद्देश्य विदेशी चंदे को नियंत्रित करना है और इसका किसी धर्म से कोई संबंध नहीं है।
विधेयक में क्या प्रस्ताव है?
विदेशी अंशदान विनियमन विधेयक 25 मार्च को लोकसभा में पेश किया गया था। इसमें गैर सरकारी संगठनों और विदेशी फंडिंग पर सरकारी निगरानी बढ़ाने का प्रस्ताव है।
विधेयक में यह भी प्रस्ताव है कि यदि किसी संगठन का विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम का लाइसेंस रद्द होता है तो उसकी संपत्तियों के प्रबंधन और निपटारे के लिए एक नामित प्राधिकरण बनाया जाए।
मामले से जुड़ी बड़ी बातें
- संयुक्त समिति में 21 लोकसभा और 10 राज्यसभा सदस्य हैं।
- समिति को 2026 के शीतकालीन सत्र के पहले सप्ताह के अंतिम दिन तक रिपोर्ट देनी है।
- सुप्रिया सुले ने विधेयक पर जल्दबाजी न करने की मांग की।
- उन्होंने सभी राजनीतिक दलों को विश्वास में लेने की बात कही।
महाराष्ट्र के आश्रम स्कूलों में 584 मौतों पर क्यों उठे सवाल?
सुप्रिया सुले ने महाराष्ट्र के पुराने आश्रम स्कूलों की स्थिति पर भी चिंता जताई। उन्होंने पहले गठित समितियों की रिपोर्ट मंगाने और तत्काल बैठक बुलाकर स्थिति की समीक्षा करने की मांग की।
अधिकारियों के अनुसार, पिछले दो वर्षों में राज्य के आश्रम स्कूलों में औसतन करीब एक छात्र की रोज मौत हुई। इस अवधि में सरकारी और सरकार से सहायता प्राप्त आवासीय संस्थानों में कुल 584 छात्रों की मौत हुई।
इन मौतों के कारणों में सांप का काटना, सिकल सेल बीमारी, गंभीर बीमारियां, हादसे और आत्महत्या शामिल हैं।
सुले ने कहा कि जिला कलेक्टर स्कूलों की समीक्षा करें और एक महीने के भीतर रिपोर्ट दें। उन्होंने समीक्षा में राजनीतिक दलों से जुड़े जनप्रतिनिधियों को भी शामिल करने की बात कही। उनका कहना था कि बच्चों की शिक्षा और स्वास्थ्य को राजनीति से ऊपर रखा जाना चाहिए।
चाकण से 20 कंपनियां क्यों जा रही हैं?
सुप्रिया सुले ने पुणे के चाकण औद्योगिक क्षेत्र का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि यातायात जाम, प्रदूषण, पानी, बिजली और खराब सड़कों जैसी समस्याओं के कारण 20 कंपनियां क्षेत्र से बाहर जा रही हैं।
उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र औद्योगिक विकास निगम की स्थापना शरद पवार के कार्यकाल में हुई थी। सुले ने मौजूदा ‘डबल इंजन सरकार’ के दौरान क्षेत्र की स्थिति को चिंता का विषय बताया।
उन्होंने दावा किया कि गरीब परिवारों के लोगों की नौकरियां जा रही हैं। सुले ने सरकार से श्रमिकों और उद्योगों की समस्याओं को लेकर जवाब मांगा।
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