बागपत से एम्स तक: डॉ. स्वाति तोमर का सफर और महिलाओं के स्वास्थ्य में योगदान

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर डॉ. स्वाति तोमर की कहानी एक प्रेरणा का स्रोत बनकर उभरती है। उत्तर प्रदेश के बागपत जिले की रहने वाली डॉ. तोमर अपने परिवार की पहली डॉक्टर हैं, और यह उपलब्धि उनकी मेहनत, लगन और सालों के संघर्ष का परिणाम है।
प्रारंभिक शिक्षा और मेहनत
डॉ. स्वाति ने अपनी शुरुआती पढ़ाई दिल्ली के विवेकानंद स्कूल, आनंद विहार से पूरी की। यहां से उनके उज्ज्वल भविष्य की मजबूत नींव रखी गई। मेडिकल शिक्षा के दौरान उन्होंने लगातार उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। एमबीबीएस में उन्हें एनाटॉमी विषय में डिस्टिंक्शन मिला, जबकि प्रसूति एवं स्त्री रोग में उनके उत्कृष्ट प्रदर्शन को देखते हुए उन्हें प्रतिष्ठित डॉ. एस. पोनम्मल गोल्ड मेडल से सम्मानित किया गया।
पहली ही कोशिश में उन्होंने देश की सबसे कठिन परीक्षाओं में से एक AIIMS पोस्ट-ग्रेजुएट प्रवेश परीक्षा पास की और महिलाओं के स्वास्थ्य क्षेत्र में विशेषज्ञता हासिल करने का फैसला किया।
अकादमिक उपलब्धियां और सम्मान
AIIMS, नई दिल्ली में पोस्ट-ग्रेजुएशन के दौरान उन्हें टोरेंट यंग स्कॉलर अवॉर्ड (नॉर्थ ज़ोन) से सम्मानित किया गया और वे राष्ट्रीय स्तर पर सेकंड रनर-अप रहीं। इसके बाद उन्होंने AIIMS में सीनियर रेजिडेंसी पूरी की। मरीजों के प्रति उनके समर्पण और ईमानदार सेवा को देखते हुए उन्हें AIIMS के मेडिकल सुपरिंटेंडेंट द्वारा प्रशंसा-पत्र भी प्रदान किया गया।
डॉ. तोमर ने एम.सी.एच. गायनेकोलॉजिक ऑन्कोलॉजी में प्रवेश परीक्षा में भी टॉप किया। हालांकि, उन्होंने बाद में फैकल्टी के रूप में चिकित्सा शिक्षा और महिलाओं के स्वास्थ्य क्षेत्र में योगदान जारी रखने का निर्णय लिया।
महिलाओं के लिए प्रेरणा
आज डॉ. स्वाति तोमर महिलाओं के स्वास्थ्य, शोध और मेडिकल शिक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं। उनकी कहानी छोटे शहरों की उन बेटियों के लिए प्रेरणा है, जो बड़े सपने देखती हैं और उन्हें पूरा करने का साहस रखती हैं। बागपत से AIIMS तक की उनकी यह यात्रा दर्शाती है कि मेहनत, समर्पण और दृढ़ निश्चय के साथ किसी भी बाधा को पार किया जा सकता है।
प्रस्तुति: यशवर्धन वर्मा (कार्यकारी संपादक 'देहात')
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