यूपी में महिला कर्मचारियों को बड़ी राहत, मातृत्व अवकाश के लिए 2 साल के अंतर की अनिवार्यता खत्म

HIGHLIGHTS
- मातृत्व अवकाश के लिए बच्चों के बीच दो साल का अंतर अनिवार्य नहीं रहेगा।
- कैबिनेट बाई सर्कुलेशन के जरिए वित्त विभाग के प्रस्ताव को मंजूरी मिली।
- प्रदेश के 3.50 लाख रसोइयों को सितंबर से 3000 रुपये मासिक मानदेय मिलेगा।
लखनऊ: राज्य सरकार ने महिला कर्मचारियों को मातृत्व अवकाश देने के नियम में बदलाव किया है। अब मातृत्व अवकाश के लिए दो बच्चों की उम्र के बीच दो साल का अंतर होना जरूरी नहीं होगा। कैबिनेट बाई सर्कुलेशन शनिवार को वित्त विभाग के इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई।
अब तक दूसरे बच्चे के लिए मातृत्व अवकाश का लाभ लेने के लिए दोनों बच्चों की उम्र में कम से कम दो साल का अंतर अनिवार्य था। इसके चलते कई मामलों में महिला कर्मचारियों को मातृत्व अवकाश नहीं मिल पा रहा था। इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने हाल ही में ऐसे ही एक मामले में दो बच्चों के बीच दो साल से कम उम्र का अंतर होने के आधार पर मातृत्व अवकाश से इनकार को गलत माना था। अदालत ने महिला कर्मचारी को मातृत्व अवकाश देने के साथ उससे जुड़े सभी परिणामी लाभ देने का आदेश दिया था।
अदालत के इस फैसले के बाद राज्य सरकार ने मातृत्व अवकाश के नियम में मौजूद दो साल के अंतर की अनिवार्यता खत्म करने का फैसला किया है। अब दो बच्चों के बीच उम्र का अंतर दो साल से कम होने पर भी पात्र महिला कर्मचारी के लिए मातृत्व अवकाश मिलने का रास्ता साफ हो गया है। इससे मातृत्व अवकाश से जुड़े मामलों में अनावश्यक विवाद भी कम होने की उम्मीद है।
प्रदेश के 3.50 लाख रसोइयों का बढ़ा मानदेय
प्रदेश के परिषदीय विद्यालयों में बच्चों के लिए भोजन तैयार करने वाले करीब 3.50 लाख रसोइयों के मानदेय में 1000 रुपये की बढ़ोतरी की गई है। कैबिनेट बाई सर्कुलेशन मानदेय बढ़ाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई है। अब उन्हें सितंबर से हर महीने 3000 रुपये मानदेय मिलेगा। यह भुगतान साल में 10 महीने किया जाएगा।
उत्तर प्रदेश में 1.32 लाख परिषदीय विद्यालयों के 1.46 करोड़ विद्यार्थियों को मिड-डे-मील दिया जा रहा है। रसोइयों को पहले 1000 रुपये मासिक मानदेय मिलता था। वर्ष 2019 में इसे बढ़ाकर 1500 रुपये और 2022 में 2000 रुपये किया गया था।
रसोइयों को 200 रुपये मासिक मानदेय के अलावा 500 रुपये यूनिफॉर्म और 400 रुपये ग्लव्स के लिए भी दिए जाते हैं। सरकार ने चुनाव से पहले रसोइयों की लंबे समय से चली आ रही मांग पूरी की है। इसी क्रम में रविवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ रसोइयों को कैशलेस चिकित्सा कार्ड भी वितरित करेंगे।
नवाबगंज और जहांगीराबाद में नए बस स्टेशन बनाने का रास्ता साफ
बरेली के नवाबगंज और बुलंदशहर के जहांगीराबाद में नए बस स्टेशन बनाने का रास्ता साफ हो गया है। दोनों स्थानों पर बस स्टेशन के लिए राजस्व विभाग की जमीन परिवहन विभाग को निशुल्क उपलब्ध कराने के प्रस्ताव को कैबिनेट बाई सर्कुलेशन से मंजूरी मिल गई है।
नवाबगंज में जमीन परिवहन निगम को निशुल्क पट्टे पर दी जाएगी, जबकि जहांगीराबाद में राजस्व विभाग की जमीन परिवहन विभाग को निशुल्क हस्तांतरित की जाएगी।
नवाबगंज में लंबे समय से नए बस स्टेशन की जरूरत थी। पुराने बस अड्डे की जमीन अनुपयोगी होने के बाद नए स्थान पर बस स्टेशन बनाने की कवायद चल रही थी। वहीं, जहांगीराबाद में भी बस स्टेशन के लिए जमीन उपलब्ध कराने की प्रक्रिया लंबे समय से चल रही थी। वर्ष 2019 में भी यहां बस अड्डे के निर्माण का प्रस्ताव तैयार होने और जमीन उपलब्ध नहीं होने की बात सामने आई थी।
दोनों जगह जमीन मिलने के बाद बस स्टेशन निर्माण की प्रक्रिया आगे बढ़ सकेगी। इससे स्थानीय यात्रियों को व्यवस्थित बस सुविधा मिलने के साथ परिवहन सेवाओं का विस्तार भी होगा। प्रदेश में बस स्टेशनों के लिए सरकारी विभागों की जमीन निशुल्क उपलब्ध कराने की नीति के तहत ऐसे प्रस्तावों को मंजूरी दी जा रही है। अप्रैल 2026 में भी कई बस स्टेशनों के लिए विभिन्न विभागों की जमीन परिवहन विभाग को उपलब्ध कराने के फैसले लिए गए थे।
पंचकोसी परिक्रमा मार्ग को चार लेन करने की मंजूरी
प्रदेश सरकार ने अयोध्या धाम में श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए पंचकोसी परिक्रमा मार्ग के सुदृढ़ीकरण और विस्तार की दिशा में फैसला लिया है। मंत्रिपरिषद ने अयोध्या में पंचकोसी परिक्रमा मार्ग के चैनेज 0.00 से 10.775 के बीच 9.025 किलोमीटर लंबे मार्ग को चार लेन में चौड़ीकरण और विस्तारीकरण के लिए पुनरीक्षित लागत की प्रशासनिक एवं वित्तीय स्वीकृति के प्रस्ताव को मंजूरी दी है।
अयोध्या धाम में हर वर्ष कार्तिक मास में पंचकोसी परिक्रमा का आयोजन होता है। इसमें देश के अलग-अलग हिस्सों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। वर्ष 2024 में भगवान श्रीराम मंदिर का निर्माण पूरा होने के बाद अयोध्या आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में बढ़ोतरी हुई है। इस वर्ष करीब 35 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने पंचकोसी परिक्रमा में हिस्सा लिया।
श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए मौजूदा परिक्रमा मार्ग की क्षमता बढ़ाना जरूरी हो गया है। वर्तमान में मार्ग के कैरिजवे की अधिकतम चौड़ाई करीब 7 मीटर है, जो बढ़ते यातायात और श्रद्धालुओं की संख्या के लिहाज से पर्याप्त नहीं है। श्रद्धालुओं की सुविधा, सुगम आवागमन और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए मार्ग के चौड़ीकरण और विस्तार का निर्णय लिया गया है।
मंत्रिपरिषद से मंजूर प्रस्ताव के तहत मार्ग के चौड़ीकरण और विस्तार के साथ जरूरी अन्य कार्य भी कराए जाएंगे। परियोजना की पुनरीक्षित लागत 46,645.62 लाख रुपये निर्धारित की गई है। परियोजना पूरी होने के बाद पंचकोसी परिक्रमा मार्ग पर श्रद्धालुओं और स्थानीय नागरिकों को बेहतर आवागमन सुविधा मिलेगी। साथ ही परिक्रमा के दौरान भीड़ के कारण होने वाली दुर्घटनाओं की संभावना कम करने में भी मदद मिलेगी।
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