राम मंदिर से सोमनाथ तक: पीएम मोदी ने बताई राजनीतिक मानसिकता की कहानी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को कहा कि देश में कुछ राजनीतिक ताकतें राष्ट्रीय हित और आत्मसम्मान से ऊपर तुष्टीकरण की राजनीति को प्राथमिकता देती रही हैं। उन्होंने अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के दौरान सामने आए विरोध का उदाहरण देते हुए ऐसी सोच पर सवाल उठाए।
गुजरात में एक जनसभा को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि सरदार वल्लभभाई पटेल और देश के पहले राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण के लिए लगातार प्रयास किए थे, लेकिन उस समय की राजनीतिक परिस्थितियों में उन्हें विरोध का सामना करना पड़ा।
“भारत को कोई झुका नहीं सकता” — पीएम मोदी
प्रधानमंत्री ने कहा कि दुनिया की कोई भी शक्ति भारत को दबाव में झुका नहीं सकती। उन्होंने यह बात सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण की 75वीं वर्षगांठ पर आयोजित ‘सोमनाथ अमृत महोत्सव’ के दौरान कही, जिसमें वे शामिल हुए।
उन्होंने कहा कि 11 मई का दिन ऐतिहासिक महत्व रखता है क्योंकि इसी तारीख को 1998 में भारत ने परमाणु परीक्षण कर अपनी वैज्ञानिक क्षमता का प्रदर्शन किया था।
“विरासत को नष्ट किया गया, फिर भी पुनर्निर्माण हुआ”
पीएम मोदी ने कहा कि इतिहास में कई बार विदेशी आक्रमणों के दौरान भारत की सांस्कृतिक धरोहरों को नुकसान पहुंचाया गया, लेकिन जब भी अवसर मिला, देश ने अपनी विरासत को फिर से खड़ा किया।
उन्होंने कहा कि “सोमनाथ मंदिर इसका सबसे बड़ा उदाहरण है, जहां बार-बार पुनर्निर्माण के जरिए हमारी सांस्कृतिक पहचान को जीवित रखा गया।”
“तुष्टीकरण की राजनीति आज भी सक्रिय” — पीएम मोदी
प्रधानमंत्री ने कहा कि देश में आज भी कुछ ताकतें ऐसी हैं जो तुष्टीकरण की राजनीति को बढ़ावा देती हैं। उन्होंने कहा कि राम मंदिर निर्माण के दौरान भी इसी तरह का विरोध देखने को मिला था, जिसे देश ने अनुभव किया है।
उन्होंने आगे कहा कि विकास के साथ-साथ सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण भी जरूरी है। यदि हम अपने ऐतिहासिक और धार्मिक केंद्रों की उपेक्षा करेंगे तो यह देश की प्रगति में बाधा बन सकता है।
इससे पहले प्रधानमंत्री मोदी ने सोमनाथ अमृत महोत्सव के तहत सोमनाथ मंदिर में विशेष महा पूजा और अन्य धार्मिक अनुष्ठानों में हिस्सा लिया।
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