हिन्दुओं का पलायन कराने का गुनहगार जहन्नुम रसीद

HIGHLIGHTS
- 5 अगस्त को पुलिस मुठभेड़ में फुरकान ढेर
- कैराना, झिंझाना और शामली पुलिस की संयुक्त कार्रवाई
लोग सन 2014 में मुस्लिम बहुल कस्बे में हिन्दुओं के पलायन को भूले नहीं हैं। राजनीतिक संरक्षण प्राप्त दुर्दान्त बदमाश फुरकान गिरोह बना कर डरा धमका कर रंगदारी वसूलता था। उसने कैराना व्यापार मण्डल के कोषाध्यक्ष विनोद सिंघल को मोटी रकम देने का सन्देश भेजा किन्तु उन्होंने फुरकान को रंगदारी नहीं दी। फुरकान ने दुकान पर बैठे विनोद सिंघल को गोली मार दी। उनकी दिनदहाड़े हुई हत्या से कैराना के कारोबारियों तथा हिन्दू समाज में दहशत फैल गई। बेखौफ फुरकान गैंग ने अन्य हिन्दू व्यापारियों को रंगदारी देने की धमकी दी। हिन्दू समाज कैराना में खुद को असुरक्षित महसूस कर रहा था। आतंक और भय के कारण हिन्दुओं ने कैराना छोड़ने में ही अपनी खैर समझी और बड़ी संख्या में अपने मकान-दुकान बंद कर कैराना से अन्य स्थानों पर पलायन कर गये।
पूर्व मंत्री बाबू हुकुम सिंह ने आतंकित हिन्दू समाज के पलायन का मुद्दा जोर-शोर से उठाया किन्तु हिन्दुओं की दहशत खत्म करने या बदमाश फुरकान का खात्मा करने का प्रयास नहीं किया गया। फुरकान कैराना से बाहर रह कर अपराध करता रहा।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ खुले आम कहते हैं कि माफिया या गुंडे की जगह या तो जेल है, या जहन्नुम। 5 अगस्त को कैराना, झिंझाना, शामली की पुलिस ने खूंखार फुरकान को जहन्नुम पहुंचा दिया। शामली के पुलिस अधीक्षक एन. पी. सिंह ने मीडिया को बताया कि फुरकान ग्राम रंगाना व खानपुर के बीच बने पोल्ट्री फार्म में छिपा है। स्वाट टीम के प्रभारी राहुल सिसौदिया, झिंझाना थाना प्रभारी वीरेंद्र कसाना, बाबरी थानाध्यक्ष कुलदीप सिंह ने टीमों के साथ पोल्ट्री फार्म को घेर लिया। पुलिस से घिरा देख फुरकान ने फायरिंग शुरू कर दी जवाब में पुलिस की गोली से वह घायल हो गया। उसे ऊन के स्वास्थ्य केंद्र पर लाया गया जहां डाक्टरों ने फुरकान को मृत घोषित कर दिया।
फुरकान के आतंक के कारण कैराना के हजारों हिन्दुओं ने पलायन किया था। उसके मारे जाने से उन्हें जरूर संतोष हुआ होगा
गोविंद वर्मा
संपादक 'देहात'
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