दिल्ली लक्ष्मी योजना पर हाईकोर्ट सख्त, सांसद-विधायक की सिफारिश अनिवार्य करने पर मांगा जवाब

HIGHLIGHTS
- दिल्ली सरकार को 10 दिनों में संक्षिप्त हलफनामा दाखिल करने का निर्देश
- मामले की अगली सुनवाई 17 अक्टूबर को होगी
- याचिका में अनुशंसा की शर्त पर असीमित विवेकाधिकार का आरोप
नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट ने सोमवार को भाजपा के नेतृत्व वाली दिल्ली सरकार से ‘दिल्ली लक्ष्मी योजना’ के तहत महिलाओं को 2,500 रुपये मासिक सहायता देने के लिए स्थानीय सांसद या विधायक की अनुशंसा अनिवार्य किए जाने के पीछे का कारण स्पष्ट करने को कहा है। अदालत ने सरकार से पूछा कि इस अनिवार्य शर्त के जरिए वह क्या उद्देश्य हासिल करना चाहती है।
मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस कारिया की खंडपीठ ने कहा कि यदि यह शर्त आवेदकों के लिए उपलब्ध विकल्पों में से एक होती, तो कोई समस्या नहीं थी, लेकिन यहां यह एकमात्र विकल्प है। पीठ ने कहा कि बिना किसी तर्क के कोई नीति या योजना मनमानी है।
अदालत ने पूर्व कांग्रेस पार्षद अभिषेक दत्त और वर्तमान पार्षद वेदपाल सिंह चौधरी की जनहित याचिका (PIL) पर दिल्ली सरकार को 10 दिनों के भीतर संक्षिप्त हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई 17 अक्टूबर को होगी।
राज्य के जनहितकारी अधिकार को राजनीतिक संरक्षण का साधन बनाने का आरोप
याचिका में कहा गया है कि योजना के तहत स्थानीय सांसद या विधायक की अनिवार्य अनुशंसा निर्वाचित प्रतिनिधियों को असीमित विवेकाधिकार देती है। याचिका के अनुसार, इससे राज्य के कल्याणकारी अधिकार को राजनीतिक संरक्षण के साधन में बदला जा रहा है।
याचिका में यह भी कहा गया कि अनुशंसा जारी करने के लिए कोई समय-सीमा तय नहीं है और अनुशंसा नहीं मिलने की स्थिति में शिकायत निवारण की कोई व्यवस्था भी नहीं है।
इससे पहले पीठ ने कहा था कि पात्रता का निर्धारण आय प्रमाण पत्र और निवास प्रमाण जैसे दस्तावेजों के आधार पर किया जा सकता है।
याचिकाकर्ता बोले- शोषण का कारण बनेगी यह शर्त
याचिकाकर्ता और आयानगर से पार्षद वेद पाल शीतल चौधरी ने कहा कि दिल्ली में पहले भी राशन कार्ड के नाम पर शोषण और वसूली जैसी घटनाएं सामने आ चुकी हैं। ऐसे में यह शर्त राजनीतिक दलों के नेताओं और कार्यकर्ताओं के जरिए महिलाओं के सम्मान को प्रभावित कर सकती है।
उन्होंने कहा कि राज्य की किसी लोक कल्याणकारी योजना को राजनीतिक दलों के संरक्षण की जरूरत नहीं होनी चाहिए। उनके अनुसार, अदालत ने भी उनकी बात को स्वीकार करते हुए कहा है कि इस शर्त को इस रूप में स्वीकार नहीं किया जा सकता।
यह है योजना की पात्रता
‘दिल्ली लक्ष्मी योजना’ के तहत 21 से 60 वर्ष की आयु वाली वे महिलाएं पात्र हैं, जिनके परिवार की वार्षिक आय 2.5 लाख रुपये तक है।
योजना के तहत सरकारी कर्मचारी, आयकरदाता, चार पहिया वाहन के मालिक, तीन से अधिक जीवित बच्चों वाले परिवार और ऐसे परिवार, जिनका कोई सदस्य सरकारी सेवा में है, पात्र नहीं होंगे।
Comments0
Leave a comment
Join the conversation — your email will not be published.

Reader comments
No comments yet
Be the first to share your perspective on this story.