हिमाचल में स्वास्थ्य सेवाओं में क्रांति, अब ड्रोन से पहुंचेंगे मरीजों के सैंपल

हिमाचल प्रदेश सरकार राज्य की स्वास्थ्य सेवाओं को तकनीक से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करने जा रही है। इसके तहत अब दूरस्थ और दुर्गम क्षेत्रों से मरीजों के सैंपल ड्रोन के माध्यम से सीधे मेडिकल कॉलेजों और जोनल अस्पतालों की प्रयोगशालाओं तक पहुंचाए जाएंगे। जांच पूरी होने के बाद रिपोर्ट डिजिटल माध्यम से संबंधित स्वास्थ्य केंद्रों को भेजी जाएगी। सरकार ने स्वास्थ्य विभाग को इस ड्रोन आधारित व्यवस्था को लागू करने के निर्देश दिए हैं।
यह योजना खास तौर पर जनजातीय और कठिन भौगोलिक क्षेत्रों जैसे बड़ा भंगाल, किन्नौर, लाहौल-स्पीति और चंबा व मंडी के दुर्गम इलाकों को ध्यान में रखकर तैयार की गई है। राज्य में ड्रोन ट्रायल पहले ही सफल हो चुका है, जिसके बाद अब इसे औपचारिक रूप से लागू करने की तैयारी है।
दुर्गम क्षेत्रों को मिलेगी बड़ी राहत
अब तक इन क्षेत्रों के मरीजों के ब्लड, यूरिन और अन्य मेडिकल सैंपल जांच के लिए कई दिनों तक यात्रा करके जोनल अस्पतालों तक भेजे जाते थे। कई बार रिपोर्ट आने में तीन से चार दिन तक का समय लग जाता था, जिससे इलाज में देरी होती थी।
नई व्यवस्था के तहत सैंपल ड्रोन के जरिए उसी दिन संबंधित लैब तक पहुंच जाएंगे और रिपोर्ट भी जल्द ऑनलाइन उपलब्ध कराई जाएगी। इससे डॉक्टरों को तुरंत इलाज शुरू करने में मदद मिलेगी और मरीजों को अनावश्यक यात्रा से राहत मिलेगी।
स्वास्थ्य सेवाओं में तेज़ी और सुधार की उम्मीद
अधिकारियों के अनुसार, यह तकनीक न केवल समय बचाएगी बल्कि आपातकालीन स्थितियों में भी बेहद उपयोगी साबित होगी। बरसात और बर्फबारी के दौरान जब सड़क मार्ग बाधित होते हैं, तब भी सैंपल ट्रांसपोर्ट आसान हो जाएगा। इससे ग्रामीण और दुर्गम क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बेहतर होगी।
अधिकारियों और स्थानीय लोगों की प्रतिक्रिया
आईटी विभाग के निदेशक निपुण जिंदल और एनएचएम निदेशक प्रदीप कुमार ने बताया कि ड्रोन पॉलिसी तैयार है और इसे जल्द लागू किया जाएगा। उनके अनुसार इस पहल से मरीजों को समय पर रिपोर्ट मिलने में बड़ी मदद मिलेगी और इलाज की प्रक्रिया तेज होगी।
वहीं चंबा के पांगी, भरमौर और अन्य दुर्गम क्षेत्रों के स्थानीय लोगों ने भी इस पहल का स्वागत किया है। उनका कहना है कि अभी सैंपल रिपोर्ट आने में कई दिन लग जाते हैं, लेकिन ड्रोन सेवा शुरू होने के बाद यह समय घटकर कुछ घंटों तक सीमित हो जाएगा, जिससे इलाज में तेजी आएगी।
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