“मुझे मीठे का शौक नहीं”: जयंत चौधरी ने टिकैत के तंज का दिया करारा जवाब

नई दिल्ली। राष्ट्रीय लोक दल (रालोद) के प्रमुख जयंत चौधरी ने हाल ही में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व ट्विटर) पर एक पोस्ट किया, जिसमें उन्होंने कहा, “जो हलवाई और ततैये का किस्सा सुना रहे हैं, उन्हें बता दूँ कि मुझे मीठे का कोई शौक नहीं।” इस बयान ने उत्तर प्रदेश की राजनीति में चर्चा का नया दौर शुरू कर दिया है।
क्या था पूरा मामला
बागपत में भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) के अध्यक्ष नरेश टिकैत ने केंद्रीय राज्यमंत्री जयंत सिंह का जिक्र करते हुए हलवाई और ततैया का उदाहरण दिया था। टिकैत ने कहा कि जैसे हलवाई की दुकान पर बैठा ततैया मिठाई को नुकसान नहीं पहुंचाता, बल्कि हलवाई उसे हटाता रहता है, वैसे ही जयंत सिंह भी सरकार के खिलाफ खुलकर कुछ नहीं कह सकते।
टिकैत के बयान के बाद जयंत सिंह ने सोशल मीडिया पर पलटवार करते हुए कहा कि उन्हें इस तरह की तुलना में कोई दिलचस्पी नहीं है और उनका मीठे से कोई शौक नहीं।
सोशल मीडिया पर बहस
जयंत सिंह के इस बयान के बाद दोनों नेताओं के समर्थकों के बीच सोशल मीडिया पर बहस शुरू हो गई। एक तरफ टिकैत समर्थक उनके तंज का समर्थन कर रहे हैं, वहीं जयंत सिंह के समर्थक इसे करारा जवाब मान रहे हैं।
राजनीतिक मायनेजो हलवाई और ततैया का किस्सा सुना रहे हैं
— Jayant Singh (@jayantrld) February 18, 2026
उन्हें बता दूँ,
मुझे मीठे का कोई शौक नहीं!
विश्लेषकों का मानना है कि जयंत चौधरी का यह बयान सत्ता और राजनीतिक लाभ की दौड़ से दूरी बनाए रखने का संकेत है। हलवाई-ततैया की कहानी को आमतौर पर सत्ता और उसके इर्द-गिर्द मंडराने वाले लोगों के उदाहरण के रूप में देखा जाता है। ऐसे में जयंत चौधरी का “मीठे का शौक नहीं” वाला बयान उनकी स्वतंत्र राजनीतिक पहचान और सिद्धांत आधारित राजनीति का संदेश माना जा रहा है।
गठबंधन और चुनावी रणनीति से जुड़ा नजरिया
आने वाले उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को ध्यान में रखते हुए राजनीतिक पर्यवेक्षक इसे गठबंधन और चुनावी रणनीति से जोड़कर भी देख रहे हैं। यह बयान जयंत चौधरी की राजनीतिक सोच और उनकी स्वतंत्रता को दर्शाने वाला कदम माना जा रहा है।
निष्कर्ष
जयंत चौधरी के इस सोशल मीडिया पोस्ट ने न सिर्फ उनके समर्थकों और विरोधियों के बीच चर्चा को तेज किया है, बल्कि यूपी की राजनीति में नई बहस को भी जन्म दिया है।
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