पाकिस्तान से अगली आतंकी घटना पर भारत का जवाब और सख्त होगा: राजनाथ सिंह

HIGHLIGHTS
- भारत की आतंकवाद विरोधी रणनीति में बड़ा बदलाव।
- रक्षा उत्पादन 1.78 लाख करोड़ रुपये के पार।
- रक्षा निर्यात बढ़कर 39,000 करोड़ रुपये पहुंचा।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने गुरुवार को पाकिस्तान से होने वाले सीमा पार आतंकवाद पर भारत का रुख स्पष्ट करते हुए कहा कि भविष्य में पाकिस्तान की ओर से कोई आतंकी घटना होती है, तो उसका जवाब पहले से भी ज्यादा सख्त होगा। उन्होंने कहा कि भारत की सांस्कृतिक परंपरा संवाद, सह-अस्तित्व और विवादों को शांतिपूर्ण तरीके से सुलझाने में विश्वास रखती है, लेकिन शांति के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को कमजोरी नहीं समझा जाना चाहिए।
नई दिल्ली में टाइम्स नेटवर्क डिफेंस कॉन्क्लेव को संबोधित करते हुए राजनाथ सिंह ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर, बालाकोट हवाई हमला और सर्जिकल स्ट्राइक महज सैन्य कार्रवाई नहीं थे, बल्कि आतंकवाद के खिलाफ भारत की रणनीति में बड़े बदलाव के प्रतीक थे। उन्होंने कहा कि भारत अब केवल कूटनीतिक स्तर पर विरोध दर्ज कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि आतंकवाद के स्रोत तक पहुंचकर उसे खत्म करने के लिए भी कदम उठाता है।
शांति बनाए रखने के लिए ताकत और तैयारी जरूरी
रक्षा मंत्री ने कहा कि 2014 के बाद से अधिकांश आतंकियों की सक्रियता की अवधि घटकर एक साल से भी कम रह गई है। उनके मुताबिक, भारत के खिलाफ हथियार उठाने वाले आतंकियों को सुरक्षा बल एक साल के भीतर मार गिरा रहे हैं।
राजनाथ सिंह ने कहा कि शांति कायम रखने के लिए पर्याप्त ताकत और क्षमता होना जरूरी है। भारत शांति चाहता है, लेकिन देश की सुरक्षा के लिए जरूरत पड़ने पर युद्ध का सामना करने के लिए भी तैयार है।
उन्होंने कहा, "शांति के प्रति हमारी प्रतिबद्धता अटूट है, लेकिन हम किसी भी चुनौती का सामना करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। हमारा लक्ष्य ऐसा भारत बनाना है, जो शांति की वकालत करे, लेकिन सुरक्षा के मामले में सतर्क रहे और अपनी संप्रभुता, अखंडता तथा राष्ट्रीय हितों की रक्षा करने में पूरी तरह सक्षम हो।"
डिजिटल युग में सुरक्षा के नए खतरे
बदलते सुरक्षा हालात पर चर्चा करते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि हाइब्रिड, हाईटेक और बेहद तेज गति से होने वाले युद्ध के दौर में सतर्कता और तैयारी बढ़ाना जरूरी है। उन्होंने डिजिटल युग में सुरक्षा से जुड़ी चुनौतियों के लगातार जटिल होने का भी उल्लेख किया।
राजनाथ सिंह ने सुरक्षा के सामने मौजूद पांच तरह के खतरों की चर्चा की। इनमें गलत सूचना फैलाना, अस्थिरता पैदा करना, कामकाज में बाधा डालना, धोखा देना और विनाश करना शामिल हैं। उन्होंने इनके लिए अंग्रेजी में डिसइन्फॉर्मेशन, डेस्टेबिलाइजेशन, डिसरप्शन, डिसेप्शन और डिस्ट्रक्शन शब्दों का इस्तेमाल किया।
उन्होंने कहा कि आतंकवाद अब केवल संगठित समूहों तक सीमित नहीं रह गया है। अकेले हमला करने वाले कट्टरपंथियों और तथाकथित 'व्हाइट कॉलर आतंकवाद' से भी खतरा बढ़ रहा है। ऐसे मामलों में सुरक्षा एजेंसियों के लिए कट्टरपंथ की ओर बढ़ रहे लोगों की पहचान करना और संभावित हमलों को रोकना अधिक मुश्किल हो जाता है।
सह-पायलट से जुड़ी घटना का किया उल्लेख
रक्षा मंत्री ने उस हालिया घटना का भी जिक्र किया, जिसमें एक सह-पायलट पर यात्री विमान को दुर्घटनाग्रस्त करने की कोशिश करने का आरोप है। उन्होंने कैप्टन स्मित माछर का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने अपनी जान जोखिम में डालकर एक बड़े आतंकी हमले को टालने में भूमिका निभाई।
राजनाथ सिंह के मुताबिक, यह घटना अकेले हमला करने वाले लोगों से उत्पन्न खतरे को उजागर करती है। साथ ही, इससे पता चलता है कि किसी व्यक्ति की सतर्कता और साहस नफरत से प्रेरित लोगों की साजिश को विफल कर सकता है। उन्होंने आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में सुरक्षा एजेंसियों के साथ जागरूक और जिम्मेदार नागरिकों की भूमिका को भी अहम बताया।
आधुनिक रक्षा रणनीति में 'स्मार्ट पावर' पर जोर
राजनाथ सिंह ने कहा कि आज की रक्षा रणनीति में सैन्य ताकत के साथ कूटनीतिक और अन्य प्रभावी क्षमताओं का इस्तेमाल भी जरूरी है। उन्होंने पारंपरिक हार्ड पावर और सॉफ्ट पावर के बेहतर तालमेल से 'स्मार्ट पावर' की दिशा में आगे बढ़ने पर जोर दिया।
उन्होंने कहा कि आधुनिक रक्षा व्यवस्था में सटीक निशाना लगाने वाले हथियारों और लंबे समय तक लक्ष्य के ऊपर मंडराने वाले हथियारों के साथ किफायती हथियारों को भी जगह मिलनी चाहिए। इसी तरह, मानवीय खुफिया जानकारी के साथ कृत्रिम बुद्धिमत्ता और उन्नत प्रणालियों के अलावा कम लागत वाली तथा लचीली तकनीकों का इस्तेमाल भी जरूरी है।
रक्षा उत्पादन बढ़कर 1.78 लाख करोड़ रुपये के पार
रक्षा मंत्रालय के बयान के अनुसार, राजनाथ सिंह ने बताया कि सरकार के प्रयासों से भारत का रक्षा उत्पादन 2014 में 40,000 करोड़ रुपये से बढ़कर रिकॉर्ड 1.78 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गया है। वहीं, रक्षा निर्यात 2013-14 में 686 करोड़ रुपये से बढ़कर रिकॉर्ड 39,000 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। भारत के रक्षा उत्पाद करीब 100 देशों में निर्यात किए जा रहे हैं।
रक्षा मंत्री ने विश्वास जताया कि भारत इस साल दो लाख करोड़ रुपये के रक्षा उत्पादन का लक्ष्य हासिल कर लेगा। इसके अलावा, 2029 तक रक्षा उत्पादन को तीन लाख करोड़ रुपये और रक्षा निर्यात को 50,000 करोड़ रुपये तक पहुंचाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
रक्षा निर्यात बढ़ाने के लिए प्रक्रियाओं में सुधार
राजनाथ सिंह ने रक्षा निर्यात में वृद्धि का श्रेय प्रक्रियाओं को आसान बनाने के लिए किए गए सुधारों को दिया। इनमें डिफेंस ईएक्सआईएम पोर्टल, ऑनलाइन मंजूरी, ओपन जनरल एक्सपोर्ट लाइसेंस, गुणवत्ता प्रमाणन प्रक्रिया को सरल बनाना और ग्रीन चैनल नीति शामिल हैं।
उनके अनुसार, इन सुधारों से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारतीय रक्षा क्षेत्र की विश्वसनीयता बढ़ी है। साथ ही, घरेलू कंपनियों को वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धा करने में मदद मिली है।
स्टार्टअप और एमएसएमई को बढ़ावा
रक्षा मंत्री ने बताया कि रक्षा मंत्रालय ने स्टार्टअप और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) से 2,400 करोड़ रुपये से अधिक के सामान और सेवाओं की खरीद को मंजूरी दी है। नई तकनीकों के विकास के लिए 1,500 करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाओं को भी स्वीकृति दी गई है।
उन्होंने कहा कि मार्च 2026 तक इनोवेशन फॉर डिफेंस एक्सीलेंस (आईडीईएक्स) के तहत 676 स्टार्टअप और नवोन्मेषक जुड़ चुके थे, जबकि 551 अनुबंधों पर हस्ताक्षर किए गए थे। वर्ष 2018 में कुछ दर्जन रक्षा स्टार्टअप से शुरू हुआ यह क्षेत्र अब 2,000 से अधिक स्टार्टअप तक पहुंच गया है। ये स्टार्टअप ड्रोन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, क्वांटम तकनीक, साइबर सुरक्षा और रोबोटिक्स जैसे क्षेत्रों में काम कर रहे हैं।
90 प्रतिशत से अधिक गोला-बारूद का उत्पादन देश में
राजनाथ सिंह ने बताया कि रक्षा बलों द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले 175 प्रकार के गोला-बारूद में से 159 का निर्माण अब देश में ही किया जा रहा है। इससे इस क्षेत्र में 90 प्रतिशत से अधिक आत्मनिर्भरता हासिल हुई है।
उन्होंने यह भी कहा कि भारत 100 से अधिक देशों को बुलेटप्रूफ जैकेट का निर्यात कर रहा है। उनके मुताबिक, भारत दुनिया का चौथा ऐसा देश है, जिसने अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप बुलेटप्रूफ जैकेट के लिए राष्ट्रीय मानक विकसित किया है।
रक्षा मंत्री ने वन रैंक वन पेंशन योजना लागू करने और चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ का पद सृजित करने को भी देश के रक्षा ढांचे को मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।
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