राहुल के खुलासे पर पड़ताल: दादरी का परिवार 30 साल से रह रहा असली मकान में

चरखी दादरी। कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने बुधवार को हरियाणा में वोट चोरी के आरोपों को लेकर पत्रकारों से बातचीत की और कई महत्वपूर्ण खुलासे किए। इस दौरान उन्होंने दादरी शहर की मतदाता सूची दिखाते हुए नरेंद्र नामक युवक के घर का फोटो प्रस्तुत किया।
राहुल गांधी ने कहा कि मतदाता सूची में नरेंद्र का मकान नंबर शून्य दिखाया गया है, जबकि उसके पास वास्तविक घर मौजूद है। उन्होंने बताया कि चुनाव आयोग की इस तरह की सूची मतदाता की पहचान और उनके पते की जाँच को जटिल बनाती है।
हालांकि, मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार पहले कह चुके हैं कि मकान नंबर शून्य केवल उन लोगों के लिए दिखाया जाता है, जिनके पास घर नहीं होता और जो फुटपाथ या पुल के नीचे रहते हैं।
पड़ताल में सामने आया कि राहुल गांधी द्वारा बताए गए नरेंद्र पुत्र शायर दादरी में पिछले 30 वर्षों से रह रहे हैं। परिवार मूल रूप से राजस्थान का निवासी है और करीब तीन दशक पहले दादरी में बस गया। वर्तमान में नरेंद्र अपने परिवार के साथ वार्ड 4 में स्थित अपने मकान में रहते हैं। परिवार लेडीज सूट बेचने का व्यवसाय करता है।
केस विवरण:
नरेंद्र के पिता शायर ने वर्ष 2020 में वार्ड 8 (अब वार्ड 4) में अपना पुराना घर बेच दिया और किराये के मकान में रहने लगे। 2023 में उन्होंने पुराने घर से आधा किलोमीटर दूर वार्ड 4 में नया मकान खरीदा और दो वर्षों से वहीं रह रहे हैं।
नरेंद्र, उनकी पत्नी ज्योति, पिता शायर, माता संतरा, भाई सोनू और भाभी पूजा के मतदाता पहचान-पत्र में मकान नंबर शून्य दर्ज है। आधार कार्ड में भी यही स्थिति है। शायर ने बताया कि सरकारी दस्तावेजों में मकान नंबर शून्य क्यों दिखाया गया, इसकी उन्हें जानकारी नहीं है।
नरेंद्र का मतदाता पहचान पत्र 7 जनवरी 2013 को बनाया गया था और तब से अब तक इसमें मकान नंबर शून्य ही दर्ज है। उनके माता-पिता के वोटर कार्ड भी 2013 में बने थे और सभी में मकान संख्या शून्य है।
दादरी नगर परिषद के वाइस चेयरमैन और वार्ड 4 के पार्षद संदीप फोगाट ने पुष्टि की कि नरेंद्र का परिवार पिछले करीब 30 वर्षों से दादरी में रह रहा है। उनके मकान और पहचान पत्र में मकान नंबर शून्य दिखाया गया है, जबकि परिवार सभी चुनावों में सक्रिय रूप से मतदान करता रहा है और फर्जी नहीं है।
राहुल गांधी के इस खुलासे से चुनाव प्रक्रिया और मतदाता सूची में सुधार की आवश्यकता पर गंभीर सवाल उठ गए हैं।
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