अखिलेश यादव की ‘चवन्नी’ टिप्पणी पर जयंत चौधरी का पलटवार, बोले- अहंकार सिर्फ पतन लाता है

HIGHLIGHTS
- अखिलेश यादव की ‘चवन्नी’ टिप्पणी पर जयंत चौधरी ने जताई नाराजगी।
- रालोद ने बयान को चौधरी चरण सिंह की विरासत और किसान समुदाय से जोड़ा।
- रालोद नेता अनिल कुमार ने टिप्पणी को बताया अत्यधिक आपत्तिजनक।
समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव और केंद्रीय मंत्री व राष्ट्रीय लोक दल अध्यक्ष जयंत चौधरी के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है। कभी राजनीतिक सहयोगी रहे दोनों नेता अब एक-दूसरे के विरोध में खड़े हैं। अखिलेश यादव की हालिया ‘चवन्नी’ वाली टिप्पणी पर जयंत चौधरी ने तीखा जवाब दिया है।
पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीति में यह विवाद अखिलेश यादव के उस बयान से शुरू हुआ, जिसमें उन्होंने एक कार्यक्रम के दौरान कहा था, “जाने कहां-कहां से आ गए थे लोग गठबंधन बनाने।”
उन्होंने आगे कहा था, “हमने चवन्नी का रुपया बना दिया था, तब भी हमें छोड़कर चले गए वो।” अखिलेश यादव ने किसी व्यक्ति का नाम नहीं लिया था, लेकिन उनकी इस टिप्पणी को जयंत चौधरी से जोड़कर देखा गया। यह संदर्भ 2022 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव अभियान से जुड़ा है। उस समय जयंत चौधरी ने भाजपा की पेशकश को ठुकरा दिया था।
अखिलेश यादव ने यह भी कहा था कि कई लोग सपा छोड़कर चले गए हैं। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी जनता से जुड़ने के संकल्प के साथ आगे बढ़ रही है और सामाजिक न्याय स्थापित करने के साथ लोगों पर भरोसा करने के लिए प्रतिबद्ध है।
यह विवाद 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले सामने आया है। रालोद ने अखिलेश यादव की टिप्पणी को किसान नेता चौधरी चरण सिंह की विरासत और जाट समुदाय का अपमान बताया है।
जयंत चौधरी ने किया पलटवार
शुक्रवार को रालोद अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री जयंत चौधरी ने अखिलेश यादव के बयान पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि अगर उन्हें सस्ती राजनीतिक टिप्पणियां करनी थीं, तो कम से कम उनका नाम लेकर बात करनी चाहिए थी।
जयंत चौधरी ने एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा, “अगर आपको कुछ सस्ते शब्द इस्तेमाल करने थे, तो कम से कम मेरा नाम लेकर कहते।”
उन्होंने आगे जाट समुदाय को निशाना बनाने और “हमने ABCD सिखाई” कहने पर भी सवाल उठाया। जयंत चौधरी ने अखिलेश यादव का नाम लिए बिना कहा कि ऐसा अहंकार केवल पतन की ओर ले जाता है। उन्होंने कहा, “मैं इस अहंकार को देख चुका हूं करीब से और मानता हूं ऐसा आचरण सिर्फ़ पतन लाता है!”
2022 में सपा-रालोद ने साथ लड़ा था चुनाव
समाजवादी पार्टी और राष्ट्रीय लोक दल ने 2022 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में गठबंधन के तहत चुनाव लड़ा था। इस दौरान रालोद ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश की 33 सीटों पर चुनाव लड़ा और इनमें से आठ सीटों पर जीत दर्ज की थी। यह पार्टी के लिए बड़ी बढ़त थी।
इससे पहले 2017 के विधानसभा चुनाव में रालोद ने पूरे उत्तर प्रदेश में 277 सीटों पर चुनाव लड़ा था, लेकिन उसे केवल एक सीट पर जीत मिली थी।
अखिलेश यादव की टिप्पणी से संकेत मिला कि सपा के साथ गठबंधन से रालोद को पश्चिमी उत्तर प्रदेश में अपनी खोई राजनीतिक जमीन वापस हासिल करने में मदद मिली थी। हालांकि, 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले जयंत चौधरी भाजपा के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन में शामिल हो गए। वह वर्तमान में केंद्र सरकार में मंत्री हैं।
रालोद नेता ने भी जताई नाराजगी
उत्तर प्रदेश के मंत्री और रालोद नेता अनिल कुमार ने भी अखिलेश यादव के बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने इसे “अत्यधिक आपत्तिजनक और दुर्भाग्यपूर्ण” बताया।
अनिल कुमार ने आरोप लगाया कि यह टिप्पणी सिर्फ जयंत चौधरी का अपमान नहीं है, बल्कि चौधरी चरण सिंह की विचारधारा और पूरे किसान समुदाय का भी अपमान है।
उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी के नेताओं को चौधरी चरण सिंह परिवार के योगदान को नहीं भूलना चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि किसान समुदाय 2027 के विधानसभा चुनाव में इस कथित अपमान का लोकतांत्रिक जवाब देगा।
मायावती ने की माफी की मांग
सपा और रालोद के बीच चल रही इस जुबानी जंग में बसपा प्रमुख मायावती भी शामिल हो गई हैं। उन्होंने अखिलेश यादव से ‘चवन्नी’ वाली टिप्पणी पर माफी मांगने की मांग की।
मायावती ने एक्स पर पोस्ट कर कहा कि अखिलेश यादव को रालोद और उसके नेता के साथ-साथ पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह के परिवार का अपमान करने के लिए पूरे जाट समुदाय से भी माफी मांगनी चाहिए।
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