जंक फूड बना जानलेवा: आखिरी सांसों में अहाना ने कहा- बच्चों को फास्ट फूड से बचाऊंगी

अत्यधिक फास्ट फूड के सेवन से गंभीर रूप से बीमार होकर जान गंवाने वाली अहाना की आख़िरी इच्छा अब लोगों को झकझोर रही है। मौत से पहले उसने अपने मामा गुलजार खान उर्फ गुड्डू से कहा था कि वह आगे कभी फास्ट फूड नहीं खाएगी और ठीक होने के बाद स्कूलों में जाकर बच्चों को इसके नुकसान के बारे में बताएगी। अहाना चाहती थी कि उसकी बीमारी से दूसरे बच्चे सबक लें और अस्वस्थ खान-पान से दूरी बनाएं।
हाई स्कूल की परीक्षा में 69 प्रतिशत अंक लाने वाली अहाना का सपना डॉक्टर बनने का था। विडंबना यह रही कि जिस फास्ट फूड से डॉक्टर हमेशा बचने की सलाह देते हैं, वही उसकी जिंदगी का कारण बन गया।
मामा ने सुनाई अहाना की अंतिम इच्छा
मामा गुलजार खान ने बताया कि अहाना की सोच और उसका संदेश आज भी लोगों तक पहुंच रहा है। जब उसे यह पता चला कि फास्ट फूड के कारण उसकी आंतें बुरी तरह प्रभावित हुई हैं, तब उसने ठान लिया था कि वह बच्चों को जागरूक करेगी, ताकि कोई और बच्चा ऐसी गलती न दोहराए। आज उसके शब्द सोशल मीडिया और लोगों के बीच चर्चा का विषय बने हुए हैं।
अहाना मुरादाबाद के मोहल्ला अफगानान निवासी मंसूर खान की बेटी थी। परिवार के अनुसार उसे चाऊमीन, मैगी, पिज्जा और बर्गर जैसे फास्ट फूड खाने का शौक था। लगातार ऐसे भोजन के कारण उसकी आंतों में गंभीर संक्रमण हो गया और छेद तक पड़ गए। तीन दिसंबर की रात निजी अस्पताल में उसका ऑपरेशन हुआ था। कुछ दिन सुधार के बाद उसे छुट्टी दे दी गई, लेकिन तबीयत दोबारा बिगड़ने पर उसे दिल्ली एम्स में भर्ती कराया गया, जहां रविवार रात उसने दम तोड़ दिया।
पिता की भावुक अपील, स्कूलों में जागरूकता की मांग
बेटी को खोने के बाद अहाना के पिता मंसूर अहमद और मां सारा खान गहरे सदमे में हैं। पिता ने मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) को पत्र लिखकर मांग की है कि स्कूल और कॉलेजों में फास्ट फूड के दुष्प्रभाव को लेकर विशेष जागरूकता अभियान चलाया जाए। उन्होंने कहा कि अगर बच्चों को समय रहते सही जानकारी दी जाए, तो कई जिंदगियां बचाई जा सकती हैं।
शांत स्वभाव की थी अहाना
परिजनों के अनुसार अहाना बेहद सरल और शांत स्वभाव की थी। उसकी छोटी बहन इशा मारिया उससे बहुत जुड़ी हुई थी। जब अहाना अस्पताल में भर्ती रही, तब इशा हर दिन उसके साथ रही और उसके ठीक होकर घर लौटने का इंतजार करती रही। परिवार को उम्मीद थी कि अहाना स्वस्थ होकर लौटेगी, लेकिन किस्मत ने साथ नहीं दिया।
स्कूलों में चलेगा फास्ट फूड के खिलाफ अभियान
अहाना की मौत के बाद यह मामला केवल शहर ही नहीं, बल्कि पूरे देश में चर्चा का विषय बन गया है। प्रशासन ने भी इसे गंभीरता से लिया है। स्कूलों में अब बच्चों को फास्ट फूड की जगह पौष्टिक भोजन अपनाने के लिए प्रेरित किया जाएगा और इसके नुकसान के बारे में जानकारी दी जाएगी।
प्रशासन की तैयारी
सीडीओ अश्वनी कुमार मिश्रा ने बताया कि स्कूलों में विशेष कार्यक्रम आयोजित कर बच्चों को संतुलित आहार के प्रति जागरूक किया जाएगा। इसके साथ ही स्कूलों में स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से कैंटीन खोलने की योजना पर भी विचार किया जा रहा है, ताकि बच्चों को सुरक्षित और पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराया जा सके।
जिलाधिकारी निधि गुप्ता वत्स ने स्कूलों के आसपास बिकने वाले फास्ट फूड की गुणवत्ता जांचने और नियमित जागरूकता कार्यक्रम चलाने के निर्देश दिए हैं।
अभिभावकों की भूमिका भी जरूरी
डीआईओएस डॉ. प्रवेश कुमार ने कहा कि बच्चों को सही खान-पान की आदतें सिखाने में माता-पिता की भूमिका भी अहम है। स्कूलों को इस संबंध में निर्देश दिए जाएंगे, लेकिन इसके लिए अभिभावकों को भी जागरूक होकर सहयोग करना होगा।
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