मणिपुर हिंसा में कुकी महिला की दर्दनाक मौत, सामूहिक बलात्कार का मामला

मणिपुर में मई 2023 से जारी मैतेई-कुकी संघर्ष ने एक बार फिर मानवाधिकार संकट को उजागर किया है। कुकी जनजाति की एक महिला, जो पिछले साल इंफाल से अपहृत होकर सामूहिक दुष्कर्म की भयानक घटना का शिकार बनी थी, अब अपने घातक चोटों के कारण चल बसी। परिवार का कहना है कि न्याय न मिलने और लगातार मानसिक और शारीरिक पीड़ा के चलते उसकी मौत हुई।
मई 2023 का अपहरण
हिंसा के उग्र होने के दौरान, 20 वर्षीय महिला को मई 2023 में इंफाल से अगवा कर लिया गया। एफआईआर में दर्ज विवरण के अनुसार चार काली शर्ट पहने व्यक्ति उसे पहाड़ी इलाके में ले गए, जहां तीन लोगों ने बारी-बारी से उसके साथ दुष्कर्म किया। कुकी संगठनों का आरोप है कि मीरा पाइबी के कुछ सदस्यों ने उसे मैतेई पुरुषों के हवाले किया।
पीड़िता ने जुलाई 2023 में एनडीटीवी को बताया था कि उसे एक सफेद बोलेरो में ले जाया गया और चालक को छोड़कर तीन लोगों ने उसके साथ दुष्कर्म किया। उन्होंने उसकी मारपीट की और पूरी रात उसे भोजन और पानी नहीं दिया। किसी तरह सुबह वॉशरूम जाने का बहाना बनाकर उसने मौके का फायदा उठाकर पहाड़ी से भागने में सफलता पाई।
इलाज के दौरान मौत
गंभीर चोटों के बावजूद महिला ने खुद को बचाया और कांगपोकपी पहुंची, जहां से उसे कोहिमा अस्पताल में भर्ती कराया गया। पुलिस में शिकायत दो महीने बाद 21 जुलाई को दर्ज हुई। इंडिजिनस ट्राइबल लीडर्स फोरम (आईटीएलएफ) ने बताया कि उसे लैंगगोल ले जाकर बलात्कार किया गया और बिष्णुपुर में गंभीर हालत में छोड़ दिया गया।
आईटीएलएफ ने कहा कि महिला को गंभीर शारीरिक चोटें और मानसिक सदमा लगा, साथ ही गर्भाशय से संबंधित स्वास्थ्य समस्याएं भी उत्पन्न हुईं। गुवाहाटी में इलाज के दौरान 10 जनवरी 2026 को उसकी मृत्यु हो गई।
परिवार में शोक
पीड़िता की मां ने बताया कि उनकी बेटी एक मिलनसार और खुशमिजाज लड़की थी। घटना के बाद उसकी मुस्कान और जीवन का उत्साह समाप्त हो गया। वह इंफाल में रिश्तेदार के साथ ब्यूटी पार्लर में काम करती थी और उसके कई मित्र थे।
मणिपुर में हिंसा का बड़ा असर
मणिपुर में भूमि अधिकार और राजनीतिक प्रतिनिधित्व को लेकर भड़की हिंसा ने अब तक 260 से अधिक लोगों की जान ले ली है और लगभग 50,000 लोग विस्थापित हुए हैं। आईटीएलएफ ने पीड़िता की स्मृति में कैंडल मार्च आयोजित करने की घोषणा की है।
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