भारत में बढ़ा अमीरों का कुनबा, 100 करोड़ से ज्यादा आय वाले करदाता 39% बढ़कर 576 हुए

HIGHLIGHTS
- आकलन वर्ष 2026 में 100 करोड़ से अधिक आय वालों की संख्या 576 हुई।
- एक साल में इस वर्ग के करदाताओं की संख्या 39 फीसदी बढ़ी।
- 1 करोड़ से अधिक आय वाले करदाताओं की संख्या 5.35 लाख से ज्यादा हुई।
भारत में उच्च आय वर्ग के करदाताओं की संख्या में तेजी से बढ़ोतरी हो रही है। एसबीआई रिसर्च की एक रिपोर्ट के मुताबिक, आकलन वर्ष 2026 में 100 करोड़ रुपये या उससे अधिक सालाना आय घोषित करने वाले करदाताओं की संख्या 39 फीसदी बढ़कर 576 हो गई। आकलन वर्ष 2025 में यह संख्या 415 थी। यह बढ़ोतरी देश में आय बढ़ने, कारोबार के विस्तार और आर्थिक गतिविधियों में तेजी का संकेत देती है।
रिपोर्ट के अनुसार, केवल अति-उच्च आय वर्ग में ही नहीं, बल्कि 1 करोड़ रुपये या उससे अधिक आय घोषित करने वाले करदाताओं की संख्या में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। आकलन वर्ष 2026 में इस श्रेणी में 5,35,672 करदाता रहे। आकलन वर्ष 2025 में यह संख्या 4,71,419 थी। इस तरह इस वर्ग में सालाना आधार पर 14 फीसदी की बढ़ोतरी हुई।
रिपोर्ट में बताया गया है कि सबसे ऊपरी आय वर्ग में वृद्धि की रफ्तार व्यापक उच्च आय वर्ग की तुलना में काफी तेज रही है। 100 करोड़ रुपये से अधिक आय वाले करदाताओं की संख्या में पिछले कुछ वर्षों के दौरान उतार-चढ़ाव के साथ बढ़ोतरी हुई है। आकलन वर्ष 2022 में इस श्रेणी में 142 करदाता थे। आकलन वर्ष 2023 में यह संख्या 301 हो गई, जो 112 फीसदी की वृद्धि थी। आकलन वर्ष 2024 में संख्या मामूली घटकर 284 रह गई। इसके बाद आकलन वर्ष 2025 में यह बढ़कर 415 और आकलन वर्ष 2026 में 576 हो गई।
क्या एक करोड़ रुपये से अधिक आय वाले करदाताओं की संख्या भी बढ़ी है?
एक करोड़ रुपये से अधिक आय वाले करदाताओं की संख्या लगातार बढ़ी है। आकलन वर्ष 2022 में इस वर्ग में 1,93,800 करदाता थे। आकलन वर्ष 2023 में यह संख्या बढ़कर 2,69,184 हो गई। आकलन वर्ष 2024 में यह 3,49,974 तक पहुंची, जबकि आकलन वर्ष 2025 में 4,71,419 करदाता रहे। आकलन वर्ष 2026 में यह संख्या बढ़कर 5,35,672 हो गई।
रिपोर्ट के मुताबिक, आकलन वर्ष 2022 की तुलना में अब 1 करोड़ रुपये से अधिक आय वाले करदाताओं की संख्या दोगुने से भी ज्यादा हो चुकी है। वहीं, 100 करोड़ रुपये से अधिक आय वाले करदाताओं की संख्या चार गुना बढ़ी है।
देश की अर्थव्यवस्था के लिए क्या अनुमान हैं?
एसबीआई रिसर्च ने अपनी रिपोर्ट में भारतीय अर्थव्यवस्था को लेकर सकारात्मक अनुमान भी जताए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में भारत की सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) वृद्धि दर 8 फीसदी रहने का अनुमान है। इसके अलावा, ऋण वृद्धि 19.3 फीसदी रहने की संभावना जताई गई है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि भारतीय रिजर्व बैंक की एफसीएनआर(बी) जमा योजना के जरिए विदेशी मुद्रा भंडार मजबूत होने की उम्मीद है। भारत का विदेशी मुद्रा भंडार बढ़कर 707 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है। ये आंकड़े देश की आर्थिक स्थिति में मजबूती के संकेत देते हैं।
क्या सभी क्षेत्रों में समान आर्थिक वृद्धि दिख रही है?
रिपोर्ट में यह भी संकेत दिया गया है कि अर्थव्यवस्था के सभी क्षेत्रों में समान मजबूती नहीं दिखाई दे रही है। जून तिमाही के दौरान स्वास्थ्य सेवा, सीमेंट और मनोरंजन जैसे कुछ क्षेत्रों में लाभ पर दबाव देखने को मिला।
इससे पता चलता है कि शीर्ष आय वर्ग और कुछ व्यवसायों की आय में मजबूत वृद्धि के बावजूद कॉरपोरेट जगत के सभी हिस्सों में एक जैसा प्रदर्शन नहीं हो रहा है। कुछ क्षेत्रों को अभी भी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। यह दर्शाता है कि आर्थिक सुधार सभी क्षेत्रों में एक समान नहीं है।
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