शंकराचार्य और शिष्य पर आरोपों में फर्जीवाड़ा, वकील ने किया खुलासा

जगद्गुरु शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के वकील डॉ. पीएन मिश्रा ने शुक्रवार को कहा कि शंकराचार्य और उनके शिष्य स्वामी मुकुंदानंद के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने वाले आशुतोष ब्रह्मचारी अब अपने ही बनाए जाल में फंसते जा रहे हैं। डॉ. मिश्रा ने आरोप लगाया कि ब्रह्मचारी अदालत में सफेद झूठ पेश कर रहे हैं और जल्द ही शंकराचार्य की ओर से उनके खिलाफ मानहानि का मुकदमा दायर किया जाएगा।
पासपोर्ट को लेकर आरोप निराधार
डॉ. मिश्रा ने मीडिया से बातचीत में बताया कि आशुतोष ब्रह्मचारी ने कोर्ट में शपथ पत्र देकर शंकराचार्य और उनके शिष्य का पासपोर्ट जब्त करने की मांग की है, ताकि वे विदेश न जा सकें। लेकिन, वकील का दावा है कि शंकराचार्य और मुकुंदानंद के पास कोई पासपोर्ट नहीं है। उन्होंने कहा कि धर्मशास्त्रों के अनुसार शंकराचार्य को विदेश यात्रा करने की अनुमति नहीं है। ऐसा करने पर उन्हें पतित घोषित किया जा सकता है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि 1940 में पुरी के शंकराचार्य को विदेश यात्रा करने पर पतित घोषित किया गया था।
हमले के आरोप को जांच में पाया गया फर्जी
डॉ. मिश्रा ने यह भी दावा किया कि आशुतोष ब्रह्मचारी ने शंकराचार्य और उनके शिष्यों को फंसाने के लिए ट्रेन में फर्जी हमला रचने की कोशिश की थी। लेकिन जांच में यह मामला झूठा पाया गया।
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सीएमओ की मेडिकल जांच में नाक पर मामूली खरोंच मिली, जो इतना हल्का था कि टांके की आवश्यकता तक नहीं थी।
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जीआरपी के एसपी ने अपनी जांच में भी मामले को असत्य पाया।
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50 से अधिक सीसीटीवी फुटेज में देखा गया कि ट्रेन की बोगी में किसी ने कोई हमला नहीं किया।
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कोच अटेंडेंट ने भी बताया कि शंकराचार्य और उनके शिष्य सुरक्षित थे।
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घटना के बाद शंकराचार्य ने 70 किलोमीटर यात्रा करके प्रयागराज में मेडिकल जांच कराई।
डॉ. मिश्रा ने कहा कि सभी सबूतों से यह स्पष्ट है कि आशुतोष ब्रह्मचारी द्वारा लगाए गए आरोप बेमानी और फर्जी हैं।
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