लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे पर फिर धंसी सड़क, 14 और जगहों पर आईं दरारें

HIGHLIGHTS
- 45 किमी के ग्रीनफील्ड हिस्से में 80 से ज्यादा जगह पैचवर्क हो चुका है।
- रावल गांव के पास डिवाइडर किनारे छह फीट लंबा और चार फीट गहरा गड्ढा बना।
- आईआईटी खड़गपुर की टीम ने 30 नमूने और सात घंटे की वीडियो रिकॉर्डिंग जुटाई।
लखनऊ। पिछले 24 घंटे में लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे पर 14 और स्थानों पर सड़क धंसने की समस्या सामने आई है। उन्नाव से लखनऊ जाने वाली लेन पर किमी संख्या 28.6 से 63.9 के बीच बाबा खेड़ा, अमरसस, भवानी खेड़ा, रावल, बड़ौरा, अड़ेरुवा और बेहटा नथई सिंह गांव के पास सड़क धंसने, नालियां बनने और पानी भरने से यातायात प्रभावित हुआ। रावल गांव के पास डिवाइडर के किनारे करीब छह फीट लंबा और चार फीट गहरा गड्ढा बन गया है।
रविवार को बारिश के बाद समतल सड़क पर नालियां बन गईं और कई जगह पानी जमा रहा। वहीं, पहले की कमियों को दूर करने के लिए किए गए पैचवर्क भी अब उखड़ने लगे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि सड़क निर्माण में लापरवाही के बाद अब मरम्मत में भी जल्दबाजी की जा रही है, जिसके कारण समस्या कम होने के बजाय बढ़ रही है।
27 दिन में सामने आईं 35 बड़ी कमियां
रविवार को एक और टीम एक्सप्रेसवे की सड़क की चौड़ाई की माप करती नजर आई। उन्नाव से लखनऊ के बीच 63 किलोमीटर लंबे छह लेन के एक्सप्रेसवे के निर्माण पर 4200 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं। इसका उद्घाटन 13 जुलाई को हुआ था और 14 जुलाई से इस पर आवागमन शुरू हुआ। 45 किलोमीटर के ग्रीनफील्ड हिस्से में महज 27 दिनों में 35 बड़ी कमियां सामने आ चुकी हैं।
अब तक 80 से अधिक स्थानों पर पैचवर्क किया जा चुका है, जबकि कई जगहों पर अभी भी काम चल रहा है। एक्सप्रेसवे पर 120 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से कार चलने का दावा किया गया था, लेकिन गड्ढों और पैचवर्क के कारण वाहन चालकों को परेशानी हो रही है। हालांकि, टोल नहीं लगने के कारण एक्सप्रेसवे पर वाहनों की आवाजाही लगातार बनी हुई है।
लखनऊ जा रहे मोहम्मद आरिफ ने बताया कि वाहन चलाते समय डर बना रहता है। वह गाड़ी की रफ्तार 50 से 80 किलोमीटर प्रति घंटे के बीच ही रखते हैं। 45 मिनट में लखनऊ पहुंचने के दावे के बजाय अब करीब सवा घंटे का समय लग रहा है। उन्नाव-लखनऊ लेन पर रावल गांव के पास तीन नए पैच बनाए गए हैं। इसी लेन पर किमी संख्या 39.7 के करीब 100 मीटर के दायरे में नया पैचवर्क किया जा रहा है।
लखनऊ से उन्नाव जाने वाली लेन पर इसराइल खेड़ा के पास सड़क उखड़ गई है। इन तीनों स्थानों पर पहले भी मरम्मत की जा चुकी है। सेवानिवृत्त सहायक अभियंता एके शुक्ला ने बताया कि जब तक सड़क के नीचे मिट्टी में नमी की समस्या का समाधान नहीं किया जाएगा, तब तक कोई भी पैचवर्क टिक नहीं पाएगा।
800 पन्नों के दस्तावेज से सामने आएंगी खामियां
लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे के निर्माण में हुई खामियों की जानकारी उन 800 पन्नों के दस्तावेजों से सामने आएगी, जिन्हें आईआईटी खड़गपुर की टीम 30 नमूनों और सात घंटे की वीडियो रिकॉर्डिंग के साथ लेकर गई है। अब 12 दिन बाद प्रोफेसर केएस रेड्डी भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) मुख्यालय को अपनी रिपोर्ट सौंपेंगे।
जांच पूरी करने के बाद टीम के सदस्य लौट चुके हैं। एक्सप्रेसवे पर जांच के दौरान प्रो. रेड्डी ने कार्यदायी संस्था पीएनसी, स्वतंत्र एजेंसी और एनएचएआई के अधिकारियों से सवाल किए और वीडियो रिकॉर्डिंग भी कराई। टीम ने कई जगहों से नमूने भी लिए। इनमें कुछ नमूने उन चार प्रमुख स्थानों से लिए गए, जहां सड़क ज्यादा धंसी थी, जबकि कुछ नमूने ग्रीनफील्ड के सामान्य स्थानों से लिए गए।
अब टीम दोनों तरह के नमूनों के बीच अंतर की जांच करेगी। ग्रीनफील्ड क्षेत्र से सूखी मिट्टी, गीली मिट्टी और ढाई से तीन मीटर नीचे की मिट्टी के नमूने लिए गए हैं। दिल्ली से आए एनएचएआई के सदस्य आलोक दीपांकर ने भी जांच के दौरान कार्यदायी संस्था के सदस्यों से सवाल किए।
आईआईटी की टीम एक्सप्रेसवे के पूरे डिजाइन की रिपोर्ट भी साथ ले गई है। इसके जरिए यह जांच की जाएगी कि पीएनसी ने डिजाइन में किसी तरह का बदलाव तो नहीं किया। एनएचएआई के क्षेत्रीय अधिकारी, लखनऊ गौतम विशाल के अनुसार, रिपोर्ट 10 से 12 दिनों में आने की संभावना है।
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